Mohammed israil
बिलासपुर। गरियाबंद जिला अस्पताल में नर्स की जगह महिला सुरक्षा गार्ड द्वारा मरीज को इंजेक्शन लगाए जाने की घटना ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। इस मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के तौर पर दर्ज कर सुनवाई शुरू कर दी है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने शासन को कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह घटना न केवल चिकित्सा नैतिकता का उल्लंघन है, बल्कि प्रणालीगत विफलता का गंभीर उदाहरण है।

हाईकोर्ट की सख्ती
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि समाचार रिपोर्ट से स्पष्ट है कि जिला अस्पताल, गरियाबंद में स्टाफ नर्स की जगह एक महिला गार्ड मरीज को इंजेक्शन लगाती पाई गई। यह घटना तब सामने आई जब एक पूर्व नगर पार्षद ने इलाज के दौरान इसे कैमरे में कैद कर लिया और तस्वीरें वायरल हो गईं।
कोर्ट ने शासन से जवाब तलब करते हुए जिला कलेक्टर गरियाबंद से एक निजी हलफनामा मंगवाया है, जिसमें यह उल्लेख करना होगा कि—
- नोटिस का पालन किस तरह किया गया।
- भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए।
नोटिस और कार्रवाई
मामले का संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. वी.एस. नवरत्न और सिविल सर्जन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह नोटिस स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही और जनविश्वास पर गहरा आघात बताता है।
सुनवाई की तारीख
हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त को तय की है।

मरीज को गार्ड द्वारा इंजेक्शन लगाए जाने की तस्वीर वायरल, हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान।
मामला क्या है?
- स्थान – जिला अस्पताल, गरियाबंद
- घटना – महिला सुरक्षा गार्ड ने मरीज को इंजेक्शन लगाया
- कैसे हुआ खुलासा? – पूर्व नगर पार्षद ने मोबाइल कैमरे से वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया
- प्रशासन की कार्रवाई – कलेक्टर ने CMHO व सिविल सर्जन को नोटिस जारी किया
- कोर्ट का रुख – स्वतः संज्ञान, हलफनामा मांगा
प्रणालीगत विफलता पर कोर्ट की टिप्पणी
- चिकित्सा नैतिकता और पेशेवर मानकों का उल्लंघन
- मरीजों की सुरक्षा और जनविश्वास को खतरा
- केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं
- निगरानी तंत्र को मजबूत करने और दोषियों की जवाबदेही तय करने की जरूरत
स्वास्थ्य विशेषज्ञ की राय
डॉ. अजय मिश्रा, स्वास्थ्य अधिकार मंच:
“यह घटना बेहद गंभीर है। इंजेक्शन लगाने की प्रक्रिया प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ ही कर सकता है। गार्ड जैसे असंबद्ध कर्मियों को यह जिम्मेदारी देना न केवल मरीज की जान खतरे में डालता है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल खड़े करता है।”
पहले भी हुई ऐसी घटनाएँ
- 2019, रायपुर: आयुर्वेदिक अस्पताल में वार्ड बॉय द्वारा इंजेक्शन लगाए जाने की शिकायत।
- 2021, बिलासपुर: दवा वितरण में हेल्पर द्वारा डॉक्टर की जगह काम करने का मामला।
- 2023, दुर्ग: अस्पताल में झाड़ू लगाने वाले कर्मचारी ने ड्रिप चढ़ाई, मामला सामने आने पर हड़कंप।
अब सवाल यह है…
- क्या जिला अस्पतालों में पर्याप्त स्टाफ की कमी के कारण ऐसी घटनाएँ हो रही हैं?
- क्या स्वास्थ्य विभाग केवल नोटिस जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है?
- क्या सरकार अस्पतालों में जवाबदेही तय करने के लिए स्थायी निगरानी तंत्र बनाएगी?



