बिलासपुर,रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोमवार को बड़ी घोषणा करते हुए छत्तीसगढ़ के अधिकारी–कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (DA) में 2 प्रतिशत की वृद्धि की है। इस फैसले के बाद अब प्रदेश में कर्मचारियों को 55 प्रतिशत डीए मिलेगा, जो केंद्र सरकार के बराबर है। बावजूद इसके, छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने सरकार के इस कदम को अधूरा बताते हुए आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है।
फेडरेशन ने साफ कहा है कि “मोदी की गारंटी” के तहत रखी गई 11 सूत्रीय मांगों पर सरकार अब तक गंभीर नहीं हुई है। न तो कोई संवाद हुआ और न ही कोई ठोस पहल। ऐसे में केवल 2 फीसदी डीए वृद्धि कर्मचारियों के आंदोलन को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है।
फेडरेशन का स्पष्ट संदेश
फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने कहा कि सरकार कर्मचारियों की ताकत को न समझने की भूल कर रही है। जब तक सभी 11 मांगों पर ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने 22 अगस्त को होने वाले आंदोलन को “ऐतिहासिक” बनाने की अपील की।
फेडरेशन के प्रांतीय प्रवक्ता जी.आर. चंद्रा और प्रांतीय संगठन मंत्री रोहित तिवारी ने भी कहा कि आंदोलन कर्मचारियों के सम्मान और अधिकार की लड़ाई है। यह केवल वेतन या भत्ते का सवाल नहीं बल्कि शासन की उपेक्षा के खिलाफ सामूहिक संघर्ष है।
1 – 11 सूत्रीय मांगें (संक्षेप में)
- केंद्र के समान महंगाई भत्ता और समय पर डीए वृद्धि।
- पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करना।
- वेतन विसंगति दूर करना।
- संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण।
- प्रोन्नति (Promotion) नीति में पारदर्शिता।
- पदोन्नति में आरक्षण संबंधी लंबित मुद्दों का निराकरण।
- पेंशनर्स को समय पर लाभ।
- वेतनमान का समानिकरण।
- स्थानांतरण नीति में सुधार।
- आकस्मिक मृत्यु पर परिवार को विशेष पैकेज।
- अन्य भत्तों में केंद्र के अनुरूप संशोधन।
2 – कर्मचारियों का तर्क
- अभी केवल ₹500 से ₹1000 का मामूली जुर्माना जैसी स्थिति,
- केंद्र सरकार की पॉलिसी में 5 लाख रुपये तक की पेनाल्टी का प्रावधान,
- छत्तीसगढ़ में अभी तक इसे लागू नहीं किया गया,
- जब तक कड़े प्रावधान और ठोस कानून नहीं बनेंगे, शोर प्रदूषण पर रोक संभव नहीं।
3 – “मोदी की गारंटी” और कर्मचारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी रैलियों में सरकारी कर्मचारियों से जुड़े कई वादे किए थे। इन्हीं वादों को फेडरेशन ने “मोदी की गारंटी” का नाम देकर 11 सूत्रीय मांगों के रूप में पेश किया है। कर्मचारियों का मानना है कि भाजपा की सरकार को अपने वादों को तुरंत पूरा करना चाहिए।
👉 यानी, मुख्यमंत्री ने डीए वृद्धि कर एक अहम कदम जरूर उठाया है, लेकिन फेडरेशन का आंदोलन खत्म नहीं हुआ। अब सबकी नजरें 22 अगस्त पर हैं, जब कर्मचारी सड़कों पर उतरकर सरकार के सामने अपनी ताकत का प्रदर्शन करेंगे।



