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प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने के कगार पर…16 हजार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कर्मचारी 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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00  आपातकालीन सेवाएं भी पूरी तरह बंद रहेंगी।

कलेक्टर, सीएमएचओ, सीएस व बीएमओ सहित संबंधित अधिकारियों को आंदोलन की लिखित सूचना दे दी गई है।

बिलासपुर जिले के 750 कर्मचारी एवं प्रदेशभर के 16,000 हजार से ज्यादा एनएचएम कर्मचारी
इस आंदोलन में शामिल होंगे।

बिलासपुर :- छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ के बैनर तले आयोजित इस आंदोलन की जानकारी का. प्रदेश अध्यक्ष – श्याम मोहन दुबे, जिला अध्यक्ष –राजकुमार यादव, डॉ सौरभ शर्मा, डॉ नवनीत कौशिक,अजित नाविक, मुकेश अग्रवाल, प्रशांत शर्मा, अंशुमान तिवारी, ऋतुराज शर्मा ,श्वेता सिंह, केशर सिंह संजय सिंह, सूरज मनहर, जीवन महंत, सूरज चंद्राकर,अजिता पांडेय
उन्होंने कहा कि सरकार की बेरुखी और अड़ियल रवैये से आक्रोशित होकर इस बार कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय लिया है।

15 अगस्त तक सरकार की ओर से हमारी 10 सूत्रीय मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया हैं, जिसके चलते अब 18 अगस्त 2025 से प्रदेशभर के 16,000 से अधिक कर्मचारी कामबंद, कलमबंद हड़ताल करेंगे।

इस बार संघ ने विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) समेत सभी आपातकालीन सेवाओं को भी बंद रखने का कठोर निर्णय लिया है। शासन को इसकी पूर्व सूचना पहले ही दे दी गई है।

एनएचएम कर्मचारियों की 10 प्रमुख मांगे :

  1. संविलियन/स्थायीकरण
  2. पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना
  3. ग्रेड पे का निर्धारण
  4. कार्य मूल्यांकन प्रणाली में पारदर्शिता
  5. लंबित 27% वेतन वृद्धि
  6. नियमित भर्ती में एनएचएम कर्मचारियों के लिए आरक्षण
  7. अनुकम्पा नियुक्ति
  8. मेडिकल व अन्य अवकाश की सुविधा
  9. स्थानांतरण नीति
  10. न्यूनतम ₹10 लाख का कैशलेस चिकित्सा बीमा

20 वर्षों की सेवा के बाद भी उपेक्षा:

एनएचएम कर्मचारी पिछले 20 वर्षों से प्रदेश के सुदूर अंचलों से लेकर प्रमुख शासकीय संस्थानों तक स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बने हुए हैं।
कोविड-19 जैसी महामारी में भी इनकी भूमिका अतुलनीय रही है।
इसके बावजूद आज भी इन्हें मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया है, जबकि अन्य राज्यों में इसी मिशन के कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं।

राजनीतिक समर्थन और अब की अनदेखी:
का. प्रांताध्यक्ष श्याम मोहन दुबे ने बताया कि मौजूदा सरकार के कई वरिष्ठ नेता –
जैसे विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, विजय शर्मा, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, वन मंत्री केदार कश्यप एवं अन्य – बड़े नेताओं ने पूर्व में एनएचएम कर्मचारियों के मंचों पर आकर खुले समर्थन का आश्वासन देते रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के चुनावी घोषणा पत्र 2023 में “मोदी की गारंटी” में भी नियमितीकरण का वादा किया गया हैं।
लेकिन इस सरकार के विगत 20 माह में 160 से अधिक बार ज्ञापन व आवेदन देने के बाद भी कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया।

चेतावनी:
अब कर्मचारी आंदोलन के लिए बाध्य हैं।
18 अगस्त से यदि सरकार तत्काल संवाद स्थापित कर हमारी जायज़ मांगों पर निर्णय नहीं लेती है, तो प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से बेपटरी हो जाएंगी, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।
बैठक मेंविम्लेश बारी,अजीत नाविक,डॉ नवनीत कौशिक, आशीष सिंह ,जीवन महंत, राहुल मेर्सा, सूरज कुमार,डॉ तिलक चंद ,सतीश कुमार चौहान,नीरज सोनी,हरीश कुमार पटेल,राम नारायण कंवर,दीपक यादव,दीपक सिंह,मुकेश गुप्ता,सौरभ शर्मा,डॉ सुखनंदन साहू,किरण कुमार सेंडे,डॉ चंद्र शेखर शुक्ला
महिला विंग ,अजिता पांडे,डॉ चंद्रेला पाल,रूपवती मरावी,सुमन शर्मा,रामहिन , प्रियंका भगत समस्त संविदा स्वास्थ्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे ।

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