Latest news

यह कैसी आज़ादी…?प्रधानमंत्री चला रहे ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान, वहीं छत्तीसगढ़ में लाखों पेड़ों की बलि — वन विभाग का दफ्तर भी पीछे नहीं

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
4 Min Read

Mohammed israil

बिलासपुर। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे देश में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत हरियाली बचाने और वृक्षारोपण को बढ़ावा देने का संदेश दे रहे हैं, वहीं छत्तीसगढ़ में हरित क्रांति की जड़ें ही काटी जा रही हैं। रायगढ़ में कोल ब्लॉक निर्माण के नाम पर लाखों पेड़ों की बेरहमी से कटाई हो रही है, तो बिलासपुर — जिसे न्यायधानी कहा जाता है — में खुद वन विभाग के अफसर अपने दफ्तर के हरे-भरे पेड़ों को जड़ों समेत उखाड़ने में संकोच नहीं कर रहे।


छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में बीते दिनों कोल ब्लॉक के लिए बड़े पैमाने पर जंगलों का सफाया किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस प्रक्रिया में लाखों पेड़ों को काटा जा रहा है, जिनमें कई दशक पुराने सघन वृक्ष भी शामिल हैं। वहीं बिलासपुर में हालात और भी हैरान करने वाले हैं। न्यायधानी के वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक दफ्तर परिसर में ही हरे-भरे, स्वस्थ पेड़ों की कटाई कर दी गई। इस काम के लिए न तो किसी तरह की सार्वजनिक सूचना दी गई और न ही आवश्यक अनुमति लेने की औपचारिकता पूरी की गई। इस मामले को लेकर  वन संरक्षक प्रभात मिश्रा से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि एक अशोक का पेड़ गिर रहा था जिसे ही काटा गया है इसके अलावा और कोई अन्य पेड़ों की कटाई नहीं की गई है।

स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों ने आरोप लगाया है कि यह घटना कोई पहली नहीं है। इसके पहले भी दफ्तर के पास लगे हरे-भरे पेड़ों को कथित “विकास कार्य” के नाम पर काट दिया गया था। हैरानी की बात यह है कि जिस आठ रोड इलाके में जिला प्रशासन ने कुछ साल पहले बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान चलाया था, वहां आज पौधे सूखे पड़े हैं या अस्तित्व में ही नहीं हैं।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब संरक्षण का जिम्मा खुद सरकारी विभागों पर है, और वही खुलेआम पेड़ों की बलि चढ़ा रहे हैं, तो आम नागरिकों से क्या उम्मीद की जा सकती है। उनका सवाल है — “क्या यह आज़ादी सिर्फ नारों में ही सीमित रह गई है?”

  • अभियान बनाम हकीकत: पीएम मोदी का ‘एक पेड़ मां के नाम’ देशव्यापी वृक्षारोपण मिशन
  • जमीनी हालात: रायगढ़ में लाखों पेड़ों की कटाई, बिलासपुर में वन विभाग के दफ्तर में पेड़ों का सफाया
  • पूर्व घटनाएं: स्मार्ट रोड क्षेत्र में लगाए गए पौधे जीवित नहीं, कोई रखरखाव नहीं
  • पर्यावरण पर असर: तापमान में वृद्धि, भूजल स्तर में गिरावट, वायु गुणवत्ता में गिरावट की आशंका


बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने पेड़ों की कटाई मामले में किसी भी तरह की जानकारी से इंकार किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की अनुमति देने का अधिकार एसडीएम स्तर पर है और संबंधित अधिकारी ही इसके लिए जिम्मेदार हैं। कलेक्टर ने कहा कि पेड़ों की कटाई की प्रक्रिया, कारण और अनुमति से जुड़ी जानकारी सीधे एसडीएम कार्यालय से ही प्राप्त की जा सकती है। इस बयान से यह साफ है कि जिला प्रशासन ने जिम्मेदारी निचले स्तर के अधिकारियों पर डाल दी है, जबकि पर्यावरण प्रेमी इसे गंभीर लापरवाही मान रहे हैं।

खबर को शेयर करने के लिए क्लिक करे।।