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छत्तीसगढ़ में यह कैसी महतारी वंदन…  सरकारी लापरवाही से गर्भवती और अजन्मे बच्चे की गई जान, जानिए क्या है पूरा मामला

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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Mohammed israil

आखिर कब तक महिलाओं की कोख सरकारी लापरवाही की बलि चढ़ती रहेगी?


बिलासपुर,रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही ने गर्भवती महिलाओं को मौत की राह पर छोड़ दिया है। बलौदाबाजार में 34 वर्षीय संतोषी साहू और उसके अजन्मे बच्चे की मौत, रायगढ़ में महिला का फर्श पर प्रसव, और बलरामपुर में गर्भवती को गोद में उठाकर अस्पताल ले जाने की घटना – ये सिर्फ हादसे नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता और विफलता के जीवित सबूत हैं। डॉक्टर नदारद, बुनियादी सुविधाएं गायब, और रेफरल सिस्टम मौत का निमंत्रण बन चुका है। सवाल है – आखिर कब तक महिलाओं की कोख सरकारी लापरवाही की बलि चढ़ती रहेगी?


छत्तीसगढ़ में सरकारी अस्पतालों की लापरवाही और संसाधनों की कमी लगातार गर्भवती महिलाओं की जान ले रही है। कभी उचित इलाज न मिलने से मां और अजन्मे बच्चे की मौत हो जाती है, तो कभी महिलाएं फर्श पर प्रसव करने को मजबूर हो जाती हैं। हालात इतने बदतर हैं कि परिजन मरीज को गोद में उठाकर ले जाने को मजबूर हैं। ताज़ा मामला बलौदाबाजार का है, जहां 34 वर्षीय गर्भवती संतोषी साहू और उसके अजन्मे बच्चे की मौत हो गई, जबकि रायगढ़ और बलरामपुर के पुराने मामलों ने भी स्वास्थ्य विभाग की पोल खोली थी।
केस 1: बलौदाबाजार – गर्भवती और अजन्मे बच्चे की मौत
बलौदाबाजार जिला, लवन
पीड़िता: संतोषी साहू (34 वर्ष)
घटना: डिलीवरी के समय परिजन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए।
5 घंटे तक कोई उचित इलाज नहीं, डॉक्टर उपलब्ध नहीं।
जिला अस्पताल रेफर, वहां भी 3 घंटे तक कोई सर्जन नहीं आया, केवल इंजेक्शन लगाए गए।
हालत बिगड़ने पर चंदा देवी निजी अस्पताल भेजा गया, आधे घंटे में 3000 रुपये का बिल और रायपुर रेफर।
रायपुर पहुंचने से पहले ही मौत घोषित।
आरोप: विभागीय लापरवाही, डॉक्टरों की अनुपस्थिति, रेफरल में देरी।
केस 2: रायगढ़ – फर्श पर प्रसव की शर्मनाक घटना
रायगढ़ जिला, (पुराना मामला)
घटना: गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा में अस्पताल लाया गया।
बेड और उचित सुविधा न मिलने पर महिला को फर्श पर प्रसव करना पड़ा।
वीडियो वायरल होने के बाद हड़कंप, लेकिन जिम्मेदारों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं।
आरोप: अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही, महिला की गरिमा और स्वास्थ्य अधिकार का उल्लंघन।
केस 3: बलरामपुर – महिला को गोद में उठाकर ले गया चालक
बलरामपुर जिला, (पुराना मामला)
घटना: प्रसव पीड़ा में महिला को अस्पताल लाया गया।
स्ट्रेचर या व्हीलचेयर तक उपलब्ध नहीं थी।
एंबुलेंस चालक ने महिला को गोद में उठाकर अस्पताल में पहुंचाया।
आरोप: बुनियादी सुविधाओं का अभाव, आपातकालीन सेवाओं की अनदेखी।

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