Mohammed israil
रायगढ़ (छ.ग.) — विकास के दावों की पोल पडे़ तब जब 55 वर्षीय तुलसी बाई राठिया की तबीयत अचानक बिगड़ गई और सड़क की बिगड़ी हालत के कारण न एम्बुलेंस पहुंच सकी, न वाहन। पति लक्ष्मण राठिया ने पड़ोसी दुलेश्वर की मदद से पत्नी को गोद में उठाकर कीचड़ से भरे लगभग 500 मीटर के रास्ते पर पैदल खून-पसीना बहाकर अस्पताल पहुंचाया। यह सिर्फ एक तस्वीर नहीं — यह ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की बेमियादी विफलता और सुशासन की ढीली कमर का जीता-जागता सबूत है।

छत्तीसगढ़ में ऐसी घटनाएं दुर्लभ नहीं—स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर करोड़ों रुपए भारत सरकार और राज्य सरकार की योजनाओं के लिए खर्च हो रहे हैं, लेकिन ग्रामीण इलाके आज भी चिकित्सा मुसीबतों और आवागमन संकट में दबी हुई नजर आती हैं।
केस 2 — डॉक्टर ने मांगी पोस्ट-mortem के लिए रिश्वत, बच्चे के शव सड़ने पर छोड़े गए
सूरजपुर जिले में डूबकर मौत हुई दो बच्चों के शव को पोस्ट-mortem के लिए ₹10,000 रिश्वत की मांग के कारण घंटों तक बाल्कनी पर छोड़ दिया गया, जिससे शव सड़ने लगे। यह मामला सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की अपार नैतिक एवं प्रशासनिक विफलता को उजागर करता है।
स्वास्थ्य संकट का नया चेहरा
कंडरजा मोहल्ला के मध्यम आयु वर्ग की 55 वर्षीय तुलसी बाई राठिया जब तेज बुखार और कंपकंपी का शिकार हुईं, तो स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता की पोल खुल गई। सड़क इतनी खराब थी कि न एम्बुलेंस, न कोई साधारण वाहन घर तक जा सकता था। पति लक्ष्मण राठिया ने पड़ोसी दुलेश्वर की मदद से पत्नी को गोद में उठाकर कीचड़ भरी करीब 500 मीटर की दूरी तय की — जब सड़क थोड़ी सी बेहतर हुई, तभी उन्हें ऑटो द्वारा अस्पताल पहुंचाया गया। यह एक तस्वीर नहीं, बल्कि स्वास्थ्य तंत्र और इन्फ्रास्ट्रक्चर की शर्मनाक विफलता का जीवंत प्रमाण है।
छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग सुविधाओं के लाख दावों की आड़ में अक्सर असहाय ग्रामीणों को जमीनी संकट में छोड़ देता है — और ये सिर्फ एक उदाहरण नहीं।
स्वास्थ्य सेवाओं की असंवेदनशीलता
घटना विवरण स्रोत 2 बच्चों का पोस्ट-mortem के लिए रिश्वत सुरगुजा में दो मासूम की डूबने से मौत हुई, परिजनों से पोस्ट-mortem के लिए ₹10,000 की मांग, शव लाशें क्षय; कार्रवाई में डॉक्टर को बंधन, BMO निलंबित, ₹4 लाख मुआवजा प्रस्तावित। CHO की आत्महत्या खैरागढ़-छुईखदान में महिला सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी आरती यादव ने विभागीय मानसिक प्रताड़ना व अतिभार के कारण आत्महत्या कर ली। पिछले 3 वर्षों में ऐसी 5 CHOs इसी हालात में जान गंवा चुकी हैं। एचसी की नाराजगी: एंबुलेंस सुविधा विफल बिलासपुर व दंतेवाड़ा में आपात स्थिति में एंबुलेंस की अनुपस्थिति से मौतें, हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग व रेलवे की लापरवाही पर सख्त सवाल उठाए। सर्जिकल ब्लेड की कमी राज्य के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में जंग लगे, खराब सर्जिकल ब्लेड पाए गए — स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें तुरंत वापस बुलाया।
स्वास्थ्य सुविधा दावों तक ही सीमित
इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था केवल दावों तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि वह नागरिकों के जीवन के साथ खिलवाड़ तक पहुँच गई है। गरीबों की जान, गरीबों की मेहनत, और सरकारी लांछनात्मक अनुपस्थिति इस प्रणाली का काला सच पेश करते हैं।
सुनिए वित्त मंत्री ओपी चौधरी जी… जनता को आपसे है बड़ी उम्मीद


छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी से आज पूरे क्षेत्र की जनता की निगाहें जुड़ी हैं। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहर तक, लोग विकास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की आस लगाए बैठे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली, शिक्षा में संसाधनों की कमी और ग्रामीण सड़कों की जर्जर हालत ऐसे मुद्दे हैं जिन पर जनता को ठोस पहल की उम्मीद है।
विशेषकर स्वास्थ्य क्षेत्र में हालिया घटनाओं ने सरकारी तंत्र की लापरवाही को उजागर किया है—जहां इलाज के अभाव में लोगों की जानें गईं और समय पर संसाधन न मिलने से मरीजों को गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ा। यही हाल गांवों की कनेक्टिविटी और किसानों को समय पर सहायता पहुंचाने में देखा गया है।
वित्त मंत्री के रूप में ओपी चौधरी के सामने अब यह बड़ी चुनौती है कि वे इन बुनियादी समस्याओं को प्राथमिकता दें और पारदर्शी योजनाओं के साथ जनता का भरोसा जीतें। क्षेत्र की जनता को न केवल घोषणाओं की, बल्कि जमीनी बदलाव की उम्मीद है—ताकि आने वाले समय में यहां के लोग गर्व से कह सकें कि उनकी आवाज़ मंत्री तक पहुंची और उसका असर दिखा।



