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छत्तीसगढ़ में ‘डॉग टेरर’! 2024 में 1.25 लाख से ज़्यादा कुत्ता काटने के केस, 2025 की शुरुआत में भी नहीं थमा कहर

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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Mohammed israil


बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक खून के प्यासे कुत्तों के निशाने पर, धमतरी में 9 साल की बच्ची की हालत नाजुक

बिलासपुर,रायपुर। छत्तीसगढ़ के शहर और गांव इन दिनों आवारा कुत्तों के आतंक से कराह रहे हैं। 2024 में राज्य में 1.25 लाख से ज्यादा लोग डॉग बाइट का शिकार हुए, और 2025 की शुरुआत भी खून से सनी खबरों के साथ हुई। धमतरी में 9 साल की अनन्या पर पांच कुत्तों के झुंड का हमला अब भी दिल दहला रहा है—सिर-चेहरे पर 16 टांके, संक्रमण मस्तिष्क तक।


2024 में छत्तीसगढ़ के डॉग बाइट का डरावना आंकड़ा

जिला मामले रायपुर 15,953 बिलासपुर 12,301 कोरबा 8,431 राजनांदगांव 6,328 बलौदाबाजार 5,035 जशपुर 4,898 महासमुंद 4,208 धमतरी(पहले 4 महीने) 886 दंतेवाड़ा 944


2025 की शुरुआत का खतरा

  • रायपुर में जनवरी के पहले 14 दिनों में ही 160+ मामले
  • 2023 की तुलना में 2024 में रायपुर में 47% वृद्धि
  • धमतरी में स्ट्रीट डॉग नसबंदी बंद होने से घटनाओं में इजाफा।

‘अनन्या’ पर खौफनाक हमला

7 अगस्त, नगरी ब्लॉक के मैनपुर गांव में चौथी की छात्रा अनन्या घर की बाड़ी में खेल रही थी। 5 आवारा कुत्तों ने घेरकर जमीन पर पटका, कपड़े फाड़े, और नोच-नोचकर खून से लथपथ कर दिया।

  • इलाज का सफर: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बोरई → सिविल अस्पताल नगरी → जिला अस्पताल धमतरी → मेकाहारा रायपुर।
  • चोट: सिर और चेहरे पर 16 टांके, संक्रमण मस्तिष्क तक।
  • स्थिति: गंभीर।

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य (2024 के आंकड़े)

  • 37 लाख+ डॉग बाइट केस देशभर में।
  • 54 मौतें रेबीज से।
  • 5,19,704 पीड़ित 15 साल से कम उम्र के बच्चे।
  • हर 7 पीड़ितों में 1 बच्चा
  • महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा केस — 4,85,345।

कैसे बढ़ा छत्तीसगढ़ में डॉग बाइट का खतरा

  1. नसबंदी ठप — धमतरी समेत कई जिलों में स्ट्रीट डॉग आबादी बेकाबू।
  2. अवैज्ञानिक फीडिंग — सड़कों, बाजारों, मोहल्लों में कुत्तों को खिलाना, झुंड बनाने को बढ़ावा।
  3. स्वास्थ्य खतरा — समय पर टीकाकरण न होने से रेबीज का जोखिम।
  4. कितना खतरनाक होता है रेबीज?
    रेबीज एक जानलेवा वायरल बीमारी है, जो रेबीज वायरस (लायसावायरस, रबडोवायरस परिवार) के कारण होती है. यह न्यूरोट्रॉपिक वायरस इंसानों के सेंट्रल नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है, जिससे दिमाग में तीव्र सूजन (इन्सेफेलाइटिस) होती है. इसे हाइड्रोफोबिया या जलकांटा भी कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षणों में पानी से डर लगना शामिल है. रेबीज मुख्य रूप से संक्रमित जानवरों खासकर कुत्तों के काटने से फैलता है. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, रेबीज से हर साल दुनियाभर में 26 हजार से 59 हजार लोग अपनी जान गंवा देते हैं. इनमें 95 फीसदी से ज्यादा मामले एशिया और अफ्रीका में सामने आते हैं. 

सुप्रीम कोर्ट का ‘डॉग बाइट मेनस’ पर गंभीर संज्ञान

  • क्या हुआ?
    सुप्रीम कोर्ट ने स्वयं संज्ञान (suo motu cognizance) लिया एक मीडिया रिपोर्ट पर, जिसमें दिल्ली में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और इससे होने वाली उत्परिवर्ती मौतों—विशेषकर बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों में—के बारे में भयावह जानकारी थी। अदालत ने इस रिपोर्ट को “अत्यंत चिंताजनक और भय पैदा करने वाला” बताया।
  • अदालत के निर्देश:
    सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पब्लिक इंटरेस्ट रिट याचिका के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया और इसे चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) भूषण आर. गावई के समक्ष रखे जाने का निर्देश दिया।
  • संकट की गंभीरता:
    अदालत ने रेखांकित किया कि दिल्ली व आसपास के क्षेत्रों में प्रतिदिन सैकड़ों डॉग बाइट्स की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिनमें से कई रोग—विशेषत: रैबीज—का कारण बन रही हैं। “अंततः मासूम बच्चे और बुजुर्ग इस जानलेवा बीमारी के शिकार हो रहे हैं।”
  • पशु कल्याण और सार्वजनिक सुरक्षा में संतुलन:
    इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा में समुदाय कुत्तों को रास्तों पर खिलाने के विरोध में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा था:
    “पब्लिक स्पेस सतर्कता के बिना कुत्तों को खिलाना मानवों तक के लिए खतरा है। अगर चाहें तो उन्हें अपने घर के अंदर ही खिलाएं।”
    कोर्ट ने ABC Rules-2023 के ग्राम/रिहायशी स्तर पर संवेदनशील लागू करने का आग्रह भी किया।
  • लोकमत का दबाव:
    समाज में बढ़ते डॉग अटैक्स के खतरे और सार्वजनिक सुरक्षा की गंभीर अनदेखी पर सुप्रीम कोर्ट की यह कार्रवाई एक महत्वपूर्ण संकेत है—कि यह अब केवल जिम्मेदार हरकत नहीं, बल्कि न्याय के तरीके से भी संभालना आवश्यक मामला बन चुका है।

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