छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में फैली अव्यवस्था और लापरवाही पर गंभीर नाराजगी जताई है। रायपुर के एम्स में मरीजों को डॉक्टर से मिलने के लिए 48 घंटे तक इंतजार कराने और बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं में भारी कमी पर कोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है।
बिलासपुर रायपुर, 9 अगस्त 2025 |
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति की बेंच ने शुक्रवार को प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र की खामियों पर सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने समाचार पत्रों में में प्रकाशित एक खबर का संज्ञान लिया, जिसमें रायपुर के एम्स में मरीजों को डॉक्टर से मिलने के लिए रजिस्ट्रेशन के बाद करीब 48 घंटे का इंतजार कराने, लंबी कतारों और चिकित्सा प्रक्रियाओं में महीनों की देरी के मामले सामने आए थे।
- सर्जरी के लिए मरीजों को 4-4 महीने की तारीख दी जा रही है।
- एक्स-रे जैसी साधारण जांच के लिए भी 3 घंटे इंतजार करना पड़ रहा है।
- गर्भावस्था जांच किट में गलत परिणाम और घटिया गुणवत्ता की सर्जिकल सामग्री- दवाएं मिल रही हैं।
- लैब में फेल हुई जीवन रक्षक दवाएं भी बाजार में बिक रही हैं।
कोर्ट की टिप्पणी:
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “राज्य की बड़ी आबादी निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने में सक्षम नहीं है। वे सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में वहां की अव्यवस्था बेहद गंभीर और चिंताजनक है।”
कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
फैक्ट बॉक्स: छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों की बड़ी समस्याएं
- लंबा इंतजार:
- एम्स रायपुर में रजिस्ट्रेशन के बाद 48 घंटे का इंतजार
- सर्जरी के लिए 4 महीने की देरी
- बुनियादी जांच में भी परेशानी:
- एक्स-रे जैसी जांच के लिए 3 घंटे की प्रतीक्षा
- गुणवत्ता पर सवाल:
- गर्भावस्था जांच किट के गलत परिणाम
- घटिया सर्जिकल सामग्री और दवाएं
- खतरनाक लापरवाही:
- लैब में फेल दवाओं का बाजार में बिकना
कैसे 1: कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट पर हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सरकारी अस्पतालों की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई और सरकार से जवाब तलब किया।
कैसे 2: जांच में सामने आई लापरवाही
रिपोर्ट और शिकायतों में सामने आया कि मरीजों को इलाज में अत्यधिक विलंब हो रहा है, जबकि दवाओं और उपकरणों की गुणवत्ता में खामियां हैं।
कैसे 3: सरकार की जवाबदेही तय होगी
हाई कोर्ट के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग और राज्य सरकार को अब अदालत में विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी। इसमें सुधार के लिए उठाए गए कदमों का भी ब्योरा देना होगा।



