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सिम्स में मिला गरीब मरीज को नया जीवन…सिकल सेल पीड़ित महिला का सफल कूल्हा प्रत्यारोपण, अब दर्दमुक्त जीवन की ओर बढ़ रही…

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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Mohammed israil
Bilaspur Chhattisgarh बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पताल सिम्स (सिम्स बिलासपुर) में एक और बड़ी चिकित्सा सफलता दर्ज की गई है। सिकल सेल रोग से पीड़ित 30 वर्षीय महिला के दोनों कूल्हों का सफल प्रत्यारोपण कर उसे चलने-फिरने योग्य बना दिया गया। यह उपलब्धि इसलिए और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सिकल सेल के मरीजों का कूल्हा प्रत्यारोपण अत्यंत जटिल और जोखिम भरा माना जाता है। यह ऑपरेशन पूरी तरह आयुष्मान कार्ड के तहत निःशुल्क किया गया।


🔹 ऐसे हुआ ऑपरेशन, जानिए पूरा मामला

बिल्हा निवासी 30 वर्षीय महिला 30 जून 2025 को सिम्स बिलासपुर के अस्थिरोग विभाग में परामर्श के लिए पहुँची। महिला दोनों कूल्हों में अत्यधिक दर्द के कारण चलने, बैठने और रोजमर्रा के कार्य करने में असमर्थ थी।

जांच करने पर अस्थिरोग विभाग के डॉ. तरुण सिंह ठाकुर ने पाया कि महिला सिकल सेल एनीमिया से ग्रसित है, जिसके चलते दोनों कूल्हे पूरी तरह से खराब हो चुके हैं। मरीज की रक्त की भारी कमी के कारण यह ऑपरेशन काफी जटिल था, लेकिन 6 यूनिट रक्त चढ़ाने के बाद फिटनेस मिलने पर ऑपरेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

  • बाएं कूल्हे का ऑपरेशन – 7 जुलाई 2025
  • दाएं कूल्हे का ऑपरेशन – 29 जुलाई 2025

दोनों ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहे और महिला अब दर्द मुक्त है, चलने-फिरने में पूरी तरह सक्षम है।


🔹 यह रहा सर्जरी में शामिल डॉक्टरों का दल

  • सर्जन टीम:
    • डॉ. तरुण सिंह ठाकुर (सहायक प्राध्यापक)
    • डॉ. रवि महोबिया
    • डॉ. सोमेश शुक्ला
    • पीजी रेसिडेंट टीम
    • मार्गदर्शक – डॉ. ए. ए. बेन (विभागाध्यक्ष, अस्थिरोग विभाग)
  • एनेस्थिसिया टीम:
    • डॉ. मधुमिता मूर्ति (विभागाध्यक्ष)
    • डॉ. मिल्टन, डॉ. श्वेता, डॉ. भावना
    • दर्द प्रबंधन में इनकी अहम भूमिका रही
  • नर्सिंग सपोर्ट:
    • योगेश्वरी और टीम
  • प्रशासनिक सहयोग:
    • डॉ. आर. मूर्ति (अधिष्ठाता)
    • डॉ. लखन सिंह (चिकित्सा अधीक्षक)

कूल्हे की बीमारी: कारण और इलाज

  • सिकल सेल रोग एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जो हड्डियों में ऑक्सीजन की आपूर्ति को बाधित करता है।
  • इससे कूल्हे की हड्डी (फीमर हेड) में रक्त की कमी हो जाती है, और वह धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त हो जाती है।
  • शुरुआती लक्षण –
    • चलने में दर्द
    • उठने-बैठने में कठिनाई
    • जांघ और कमर के जोड़ में जकड़न
  • गंभीर अवस्था में केवल कूल्हा प्रत्यारोपण ही एकमात्र समाधान होता है।

निजी अस्पतालों में कितना होता है खर्च?

अस्पताल का प्रकार कुल खर्च (दोनों कूल्हे) निजी अस्पताल (छत्तीसगढ़) ₹4 लाख से ₹7 लाख तक मेट्रो सिटी प्राइवेट हॉस्पिटल ₹6 लाख से ₹12 लाख तक सरकारी अस्पताल (जैसे सिम्स) ₹0 (आयुष्मान कार्ड से निःशुल्क)

👉 सिम्स में यह पूरी प्रक्रिया आयुष्मान कार्ड से पूर्णतः निःशुल्क की गई, जो गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों के लिए जीवन बदलने वाली सुविधा है।


छत्तीसगढ़ में सरकारी स्तर पर उपलब्ध सुविधाएं

  • सिम्स बिलासपुर, रायपुर मेडिकल कॉलेज, जगदलपुर मेडिकल कॉलेज जैसे प्रमुख सरकारी अस्पतालों में अब हड्डी प्रत्यारोपण, हृदय रोग, कैंसर, यूरोलॉजी और न्यूरोलॉजी जैसी सेवाएं निशुल्क उपलब्ध हैं।
  • आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य योजना के तहत गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करती है।
  • ऑपरेशन, दवाइयां, जांच, और इम्प्लांट सब शामिल होते हैं।

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