Mohammed israil
रायपुर, बिलासपुर।धरमजयगढ़ वनमंडल क्षेत्र में एक बार फिर बड़े मांसाहारी वन्यप्राणी की मौजूदगी की आशंका ने वन विभाग को सतर्क कर दिया है। बीते कुछ दिनों में छाल और लैलूंगा परिक्षेत्र में मिले पंजों के निशानों ने खतरे की घंटी बजा दी है। विशेषज्ञों को जांच के लिए प्लास्टर कास्ट भेजा गया है, वहीं ग्रामीणों से सतर्कता बरतने की अपील की गई है।
धरमजयगढ़ वनमंडल के छाल परिक्षेत्र के ग्राम कोकदार में ग्रामीणों ने खेत के पास किसी विशाल जानवर के पंजे के निशान देखे थे, जिसके बाद उन्होंने तत्काल वन विभाग को सूचना दी। वन अमला मौके पर पहुंचा और पाया कि निशान किसी लार्ज कार्निवोर (बड़े मांसाहारी जानवर) के हैं।
इसके बाद 3 अगस्त को लैलूंगा परिक्षेत्र में भी इसी तरह के निशान मिले। वन विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए सतत निगरानी और पेट्रोलिंग शुरू कर दी है। विभाग ने पंजों के निशान का प्लास्टर कास्ट तैयार कर विशेषज्ञों के पास भेजा है, जिसकी रिपोर्ट से साफ होगा कि यह किस जानवर का पदचिन्ह है।
वन विभाग ने बताया कि 5 अगस्त को ओडिशा के सुंदरगढ़ वनमंडल में भी ऐसे ही पदचिन्ह देखे गए हैं। इसके बाद वहां के अधिकारियों को भी सतर्क कर दिया गया है।
धरमजयगढ़ वनमंडलाधिकारी ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे किसी भी संभावित खतरे की जानकारी तुरंत वन विभाग को दें, और जंगल या खेतों में अकेले न जाएं।
🔎 1: किस जानवर के हो सकते हैं ये पंजों के निशान?
इन निशानों को देखकर वन्यजीव विशेषज्ञों का अनुमान है कि ये निशान इन जानवरों के हो सकते हैं:
- बाघ (Tiger)
- तेंदुआ (Leopard)
- भालू (Sloth Bear)
- जंगली कुत्ता (Wild Dog – Dhole)
- लकड़बग्घा (Hyena)
👉 विशेषज्ञों का मानना है कि निशान के आकार, गहराई और चाल के पैटर्न से इनकी पहचान की जा सकती है। परीक्षण के बाद ही पुष्टि होगी।
2: ग्रामीणों के लिए सतर्कता और सुरक्षा उपाय
- अकेले जंगल या खेतों की ओर न जाएं।
- किसी प्रकार के पदचिन्ह दिखने पर तत्काल वन विभाग को सूचना दें।
- मवेशियों को खुले जंगल में न छोड़ें।
- बच्चों को खेत या जंगल के किनारे खेलने से रोकें।
- वन विभाग द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें।
क्या पहले भी देखे गए हैं ऐसे जानवर?
धरमजयगढ़ क्षेत्र में पहले भी कुछ बाघ और तेंदुए देखे जा चुके हैं। साल 2022 में लैलूंगा क्षेत्र में बाघ के मूवमेंट की पुष्टि की गई थी, जबकि 2023 में भालू द्वारा एक ग्रामीण को घायल करने की घटना सामने आई थी।
इसलिए यह इलाका संभावित रूप से बड़े शिकारी प्राणियों के कॉरिडोर में आता है और वन विभाग पहले से इस क्षेत्र को ‘सेंसिटिव ज़ोन’ के तौर पर चिह्नित कर चुका है।



