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मानव तस्करी व धर्मांतरण के आरोप में गिरफ्तार कैथोलिक ननों को NIA कोर्ट से जमानत, हाईप्रोफाइल केस में आया अहम मोड़

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
4 Min Read


✍️ [mohammed israil]

00 कोर्ट ने कहा पासपोर्ट करना होगा जमा, नहीं जा सकेंगे देश छोड़कर

बिलासपुर। मानव तस्करी और धर्मांतरण के सनसनीखेज आरोपों से जुड़े मामले में शुक्रवार को सुनवाई पूरी होने के बाद शनिवार को एनआईए कोर्ट ने अहम फैसला सुनायाजज सिराजुद्दीन कुरैशी की अदालत ने दोनों कैथोलिक ननों को सशर्त जमानत दे दी है, जिससे पूरे प्रदेश में राजनीतिक व सामाजिक प्रतिक्रिया की लहर दौड़ गई है। कोर्ट ने जमानत देने के साथ यह शर्त  भी लगा दी है कि दोनों को पासपोर्ट जमा करना होगा और देश छोड़कर बाहर नहीं जा सकेंगे।


क्या है मामला? कैसे हुई गिरफ्तारी?

मामला 25 जुलाई का है, जब दुर्ग रेलवे स्टेशन पर बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने दो कैथोलिक ननों और एक युवक को तीन आदिवासी लड़कियों के साथ पकड़ा था। आरोप लगाया गया था कि इन लड़कियों को बहला-फुसलाकर आगरा ले जाया जा रहा था, जहां उनका कथित धर्मांतरण कराने की साजिश रची गई थी।

इस घटनाक्रम के बाद स्टेशन पर भारी हंगामा हुआ और तीनों आरोपियों को जीआरपी के हवाले कर दिया गया
मामला भिलाई-3 थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली दुर्ग जीआरपी चौकी में दर्ज हुआ।
IPC की कई गंभीर धाराओं के साथ मानव तस्करी और धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गईं।

जमानत पर क्या कहा कोर्ट ने?

शनिवार को सुनाए गए आदेश में NIA कोर्ट ने ननों को सशर्त जमानत दी
➡️ अदालत ने कहा कि मामले की जांच प्रारंभिक अवस्था में है,
➡️ अभियोजन द्वारा पेश साक्ष्य अभी प्रथम दृष्टया आरोपों की पुष्टि करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
➡️ दोनों आरोपी ननों को पासपोर्ट जमा करने, पूछताछ में सहयोग और बिना अनुमति राज्य से बाहर न जाने की शर्त पर रिहा किया गया है।


राजनीतिक गलियारों में उबाल

इस मामले ने राज्य से लेकर दिल्ली तक सियासत को गरमा दिया था।
▶️ सत्तारूढ़ दल ने इसे विपक्ष द्वारा ‘धार्मिक घृणा भड़काने की साजिश’ बताया,
▶️ जबकि विपक्षी दलों ने इसे ‘लव जिहाद का नया चेहरा’ और ‘ईसाई मिशनरियों की साजिश’ करार दिया

अब जमानत के फैसले के बाद दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी व्याख्या कर रहे हैं, लेकिन स्पष्ट है कि मामला अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है — चार्जशीट और ट्रायल बाकी है


क्या कहते हैं कानूनी जानकार?

वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश पांडे के अनुसार:

जमानत का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं होता। कोर्ट ने केवल यह माना है कि आरोपी जांच में सहयोग कर सकते हैं, और फरार होने की संभावना नहीं है।
यह केस आगे भी लंबा चलेगा, और ट्रायल में असली परीक्षा होगी कि आरोप टिकते हैं या नहीं।


समाजिक संगठनों की निगाहें अब अगली सुनवाई पर

इस केस ने न केवल धार्मिक रूपांतरण के मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है, बल्कि
👉 आदिवासी क्षेत्रों में मिशनरी गतिविधियों की निगरानी,
👉 धार्मिक स्वतंत्रता बनाम धार्मिक दखल जैसे विषयों को भी प्रमुखता से उठाया है।


⏭️ आगे क्या होगा?

जमानत के बाद अब

  • NIA व स्थानीय पुलिस संयुक्त रूप से जांच जारी रखेंगी
  • डिजिटल व तकनीकी साक्ष्य जुटाने पर जोर रहेगा
  • आदिवासी लड़कियों के बयान व मेडिकल रिपोर्ट भी अहम होंगे
  • मामले की अगली सुनवाई की तारीख जल्द तय होगी

🔎 चलेगा ट्रायल

इस केस में जमानत ने एक नया मोड़ जरूर दे दिया है, लेकिन असली सच्चाई का फैसला अदालत के ट्रायल से ही होगा।तब तक यह मामला धर्मांतरण, आदिवासी संरक्षण और मिशनरी गतिविधियों पर बहस की धुरी बना रहेगा।


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