Bilaspur Chhattisgarh बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के भाटापारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक अनोखा और सफल प्रसव हुआ, जब ग्राम कोदवा निवासी सरोजिनी वर्मा ने सामान्य प्रसव के माध्यम से एक साथ तीन बच्चों (ट्रिपलेट्स) को जन्म दिया। चिकित्सकीय दृष्टिकोण से यह प्रसव न केवल जटिल था, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और टीम के समर्पण का उदाहरण भी है।
29 वर्षीय सरोजिनी वर्मा, पति हेमलाल वर्मा, ने बुधवार को भाटापारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तीन बच्चों को जन्म दिया। खास बात यह रही कि यह प्रसव पूरी तरह सामान्य रहा और केंद्र में निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा के तहत संपन्न हुआ। तीनों नवजात पूर्णतः स्वस्थ हैं और मां की भी स्थिति स्थिर व संतोषजनक है।
प्रसव के दौरान स्वास्थ्य केंद्र का समस्त स्टाफ सक्रिय रहा। खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेन्द्र माहेश्वरी के नेतृत्व में सभी नवजातों एवं मां का संपूर्ण स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जिसमें सभी स्वस्थ पाए गए। इस अवसर पर कलेक्टर दीपक सोनी एवं सीएमएचओ डॉ. राजेश कुमार अवस्थी ने चिकित्सा स्टाफ की तारीफ करते हुए कहा कि यह उपलब्धि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मिल रही बेहतर सुविधाओं का प्रमाण है।
तीन बच्चों के एक साथ जन्म का कारण क्या है?
विशेषज्ञों के अनुसार, एक साथ तीन बच्चों का जन्म (ट्रिपलेट्स) कई कारकों पर निर्भर करता है:
- प्राकृतिक कारण: महिलाओं में एक से अधिक अंडाणु निकलना (multi-ovulation) या एक निषेचित अंडाणु का विभाजन।
- अनुवांशिकता: परिवार में पहले से जुड़वां या ट्रिपलेट्स का इतिहास।
- उम्र: 30 से अधिक उम्र की महिलाओं में मल्टीपल प्रेग्नेंसी की संभावना अधिक होती है।
- फर्टिलिटी ट्रीटमेंट: हालांकि इस मामले में प्राकृतिक प्रसव हुआ, लेकिन आमतौर पर IVF जैसी प्रक्रियाओं से ट्रिपलेट्स की संभावना बढ़ती है।
स्वास्थ्य की दृष्टि से ट्रिपलेट्स में क्या सावधानियां जरूरी होती हैं?
- नियमित जांच और पोषण पर विशेष ध्यान
- शिशुओं में जन्म के बाद संक्रमण का खतरा अधिक होता है, इसलिए विशेष देखभाल की आवश्यकता
- समयपूर्व प्रसव की संभावना अधिक होती है, जिससे नवजातों को नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) की जरूरत पड़ सकती है



