बिलासपुर। ग्लोबल टाइगर डे पर अचनाकमार टाइगर रिजर्व से आई एक उत्साहजनक खबर ने छत्तीसगढ़ के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को नई पहचान दी है। WWF-India और छत्तीसगढ़ वन विभाग की ताज़ा रिपोर्ट ‘रिकवरिंग स्ट्राइप्स’ के मुताबिक, वर्षों की नीरवता के बाद अब अचनाकमार की जंगलों में बाघों की मौजूदगी फिर से मजबूत हो रही है — कैमरा ट्रैप सर्वे में 10 बाघ दर्ज किए गए हैं, जिनमें कई प्रजनन योग्य हैं।



WWF-India ने अचनाकमार टाइगर रिजर्व (ATR) पर जारी अपनी ताज़ा रिपोर्ट में बाघों की संख्या, शिकार की स्थिति और आवासीय गलियारों के महत्व को लेकर अहम जानकारी दी है। रिपोर्ट बताती है कि जहां ATR में कभी सिर्फ 5 बाघ रह गए थे, वहीं अब दिसंबर 2023 के सर्वे में यह संख्या दोगुनी होकर 10 तक पहुंच गई है। इनमें कुछ बाघ पास के कन्हा और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से प्रव्रजित होकर आए हैं — जो अचनाकमार की पुनर्स्थापित हो रही पारिस्थितिकी का बड़ा संकेत है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, बाघों की स्थायी आबादी का संकेत मिलने के पीछे सबसे अहम भूमिका वन्यजीव गलियारों और प्राकृतिक आवागमन मार्गों की रही है, जो मध्यप्रदेश के बाघों को छत्तीसगढ़ की ओर खींच रहे हैं।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के उपेन्द्र दुबे ने कहा, “पिछले 15 वर्षों में पहली बार ATR में ऐसा संतुलित लिंगानुपात और बाघिनों के बच्चों की उपस्थिति देखने को मिली है। यह इस क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है।”
छत्तीसगढ़ के प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुधीर कुमार अग्रवाल ने इस मौके पर कहा, “यह रिपोर्ट वैज्ञानिक आंकड़ों और स्थलीय अनुसंधान पर आधारित है और यह हमारे संरक्षण व प्रबंधन योजनाओं को मजबूती देगी।”
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:
- ATR में 10 बाघ दर्ज, जिनमें से कुछ प्रजनन योग्य बाघ और बाघिनें हैं।
- बाघों का प्रव्रजन कन्हा व बांधवगढ़ से हुआ, जो संरक्षण प्रयासों की सफलता दर्शाता है।
- शिकार प्रजातियों की स्थिति – कुछ क्षेत्रों में अभी भी घनत्व कम है, जिसे सुधारना जरूरी है।
- WWF-India और छत्तीसगढ़ वन विभाग मिलकर आवास संरक्षण, समुदाय सहभागिता और वनकर्मियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं।
- वन्यजीव गलियारों को संरक्षित रखना अब प्राथमिकता बन गया है, जिससे आनुवंशिक विविधता बनी रहे।



