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छत्तीसगढ़ की सियासत गरमाई: कांग्रेस ने भाजपा के शीर्ष नेताओं पर बोला हमला, रमन सिंह और रवि भगत के बहाने वित्त मंत्री को बनाया निशाना, जानिए पीसीसी अध्यक्ष बैजऔर पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर क्या कहा….

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
3 Min Read

Mohammed israil Bilaspur Chhattisgarh बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज़ हो गया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेता लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से भाजपा और उसके वरिष्ठ नेताओं पर निशाना साध रहे हैं। जहां एक ओर छत्तीसगढ़कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की “सीएम पद की महत्वाकांक्षा” पर सवाल उठाए, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा में आदिवासी नेताओं के प्रति रवैये को लेकर तीखा हमला किया है।


छत्तीसगढ़ की राजनीति एक बार फिर गरमाई हुई है। सोशल मीडिया इन दिनों कांग्रेस के नेताओं की हमलावर पोस्ट से भर गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने हाल ही में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की राजनीतिक सक्रियता पर सवाल उठाते हुए ट्वीट किया कि “क्या डॉ. रमन सिंह अब भी मुख्यमंत्री बनने के सपने देख रहे हैं?” यह बयान सीधे तौर पर भाजपा के अंदरखाने की उठापटक की ओर इशारा करता है, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि प्रदेश भाजपा में नेतृत्व को लेकर मतभेद गहराते जा रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा के युवा आदिवासी नेता और भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष रवि भगत को लेकर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि रवि भगत को “अडानी संचार विभाग” से जुड़े सवाल उठाने की वजह से पार्टी से निकालने की धमकी दी जा रही है। बघेल ने इस कार्रवाई को आदिवासी नेतृत्व को दबाने की साजिश करार देते हुए भाजपा और आरएसएस की “वनवासी” मानसिकता पर तीखा तंज कसा।

भूपेश बघेल ने लिखा, “रवि भगत की विचारधारा अलग हो सकती है लेकिन वह मेहनत से राजनीति में आगे बढ़े आदिवासी युवा हैं। भाजपा का यह रवैया बताता है कि कोई भी न अडानी से सवाल पूछ सकता है, न ही भ्रष्टाचार पर।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा डीएमएफ और सीएसआर घोटालों पर पर्दा डालने के लिए भीतरघात कर रही है।

इन घटनाक्रमों के बीच कांग्रेस की रणनीति स्पष्ट दिख रही है—भाजपा की आंतरिक कलह को उजागर कर उसे जनता के सामने ‘जनविरोधी’ और ‘विकास विरोधी’ के तौर पर प्रस्तुत करना। विधानसभा चुनावों से पहले इस तरह की सियासी गर्मी यह दर्शाती है कि आने वाले महीने छत्तीसगढ़ की राजनीति में और भी ज्यादा उथल-पुथल वाले हो सकते हैं।कांग्रेस की ये रणनीतिक हमले भाजपा की छवि और आंतरिक संरचना को चुनौती देने की दिशा में एक ठोस प्रयास माने जा सकते हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस सियासी दबाव का किस तरह से जवाब देती है और क्या प्रदेश में कोई नई सियासी चालें सामने आती हैं।


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