17 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी हड़ताल, बिलासपुर के मीना बाजार मैदान में जुटे अधिकारी



Bilaspur Chhattisgarh बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों ने 17 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आंदोलन की वजह से प्रदेशभर में राजस्व संबंधी कामकाज ठप हो गया है। सोमवार को बिलासपुर के मीना बाजार के पास मैदान में जिलेभर के तहसीलदार और नायब तहसीलदार एकजुट होकर धरने पर बैठे। प्रशासनिक सेवा संघ के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन का असर पूरे राज्य में दिखाई दे रहा है। अधिकारी जल्द मांगें नहीं माने जाने की स्थिति में आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दे रहे हैं। बिलासपुर में धरना प्रदर्शन के दौरान तहसीलदार गरिमा ठाकुर, राहुल शर्मा, आकाश गुप्ता, जयंती देवांगन, प्रकृति ध्रुव, विभोर यादव, नेहा कौशिक समिति जिले भर के तहसीलदार और नायब तहसीलदार उपस्थित थे।
📌 तहसीलदारों की 17 सूत्रीय प्रमुख मांगें
- तहसीलों में राजस्व लेखकों की पदस्थापना – WB/N, KGO जैसे कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति बंद कर नियमित नियुक्ति।
- दैनिक जमा नकदी प्रक्रिया में बदलाव – ट्रेजरी बंद होने के बाद जमा प्रक्रिया का विकल्प मिले।
- राजस्व न्यायालय के आदेशों की स्पष्ट प्रक्रिया – न्यायालयीन आदेशों को स्पष्ट और व्यावहारिक रूप से लागू करने की व्यवस्था।
- राजस्व निरीक्षकों के अधीन काम नहीं – तहसीलदारों को अधीनस्थ अधिकारियों के अधीन कार्य करने से रोका जाए।
- शासकीय वाहन की व्यवस्था – सभी तहसीलों में वाहन व चालक की अनिवार्य उपलब्धता।
- निलंबन से पहले जांच – बिना प्राथमिक जांच के निलंबन पर रोक।
- न्यायालयीन मामलों में आदेशों का पालन – व्यक्तिगत उत्तरदायित्व प्रणाली से बचाव।
- FIR की पूर्व सूचना अनिवार्य – FIR दर्ज करने से पहले स्पष्ट आदेश और सूचना।
- भत्तों का पुनरीक्षण – जोखिम व अतिरिक्त कार्यभार को देखते हुए भत्तों की समीक्षा।
- मानदेय के स्थान पर नियमित नियुक्ति – आउटसोर्सिंग के बजाय नियमित बहाली।
- प्रशिक्षित ऑपरेटर की नियुक्ति – e-Court, e-Revenue जैसे कामों के लिए प्रशिक्षित ऑपरेटर की नियुक्ति।
- SLR/ASLR की बहाली – पुनः अभिलेखीय कार्यों के लिए बहाली।
- मोबाइल नंबर की गोपनीयता – निजी मोबाइल नंबर का सार्वजनिक खुलासा न हो।
- सुरक्षाकर्मी की उपलब्धता – प्रत्येक तहसील में सुरक्षाकर्मी तैनात हो।
- भत्ते व सहायता राशि में बढ़ोत्तरी – तहसीलदारों को ₹25000 तक मासिक सहायता भत्ता।
- संघ को मान्यता – नायब तहसीलदार संघ को भी मान्यता दी जाए।
- भ्रष्टाचार के मामलों में निष्पक्ष जांच – साक्ष्यों के आधार पर न्यायसंगत कार्यवाही हो।
प्रशासनिक सेवा संघ के प्रदेश प्रवक्ता ओम प्रकाश चंद्रवंशी का कहना है कि वे लंबे समय से इन मांगों को शासन के सामने रख रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं होने के कारण मजबूरन उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। यदि सरकार जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तो आंदोलन को और उग्र रूप देने की चेतावनी दी गई है।
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