Mohammed israil
रायपुर।छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में दोस्ती, भरोसे और रिश्ते की जमीन अब खून से लाल होती जा रही है। पिछले एक हफ्ते में 6 हत्या की वारदातों ने न सिर्फ पुलिस की नींद उड़ा दी है, बल्कि शहर की कानून व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा मामला राखी थाना क्षेत्र का है, जहां एक मामूली बहस ने बचपन की दोस्ती को दरिंदगी में बदल दिया।
📌 गर्लफ्रेंड को लेकर विवाद… फिर पत्थरों से कुचल दी दोस्त की लाश
तीन बचपन के दोस्त – दिनेश मानिकपुरी (20), साहेब दास मानिकपुरी (19) और सोहन उर्फ पिंटू कंडरा (25) – 24 जुलाई की शाम बेंद्री गांव के पास गिट्टी खदान में शराब पार्टी कर रहे थे। इस दौरान गांव की एक लड़की को लेकर आपस में विवाद बढ़ गया। गुस्से में साहेब और सोहन ने दिनेश के गले और पेट में चाकू से वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया।
हत्या के बाद पहचान मिटाने के इरादे से दोनों ने पत्थर से उसका सिर और चेहरा कुचल दिया, फिर लाश को बोरी में भरकर पत्थर डालकर खदान की डबरी में फेंक दिया — ताकि शरीर पानी में पूरी तरह डूब जाए।
🕵️♂️ तैरती बोरी से निकला कत्ल का राज
24 जुलाई की शाम ग्रामीणों को खदान के पानी में तैरती एक बोरी दिखी, जिससे पैर बाहर निकला हुआ था। सूचना मिलते ही राखी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। बोरी खोलते ही सब हैरान रह गए — अंदर दिनेश का शव था, जिसे बर्बरता से मारा गया था। सिर और पेट पर गहरे घाव थे।
जांच में पता चला कि दिनेश को आखिरी बार साहेब और सोहन के साथ देखा गया था। पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर जब पूछताछ की, तो उन्होंने सच कबूल लिया। हत्या में इस्तेमाल की गई स्कूटी और मोबाइल भी बरामद कर लिए गए हैं।
🚨 रायपुर: अब ‘सिटी ऑफ ब्लड’?

रायपुर में हत्याओं का ग्राफ खतरनाक मोड़ पर है। सिर्फ जुलाई के एक हफ्ते में 6 हत्या, और जनवरी 2025 से अब तक कुल 30 हत्याएं हो चुकी हैं। नशा, अवैध चाकू की ऑनलाइन खरीद और अपराधियों की ऑनलाइन पहचान छुपाने की तकनीकें पुलिस को लगातार चकमा दे रही हैं।
पुलिस का कहना है कि —
“कई अपराधी ऑनलाइन साइट से चाकू मंगाते हैं। मोबाइल नंबर तो असली होता है लेकिन पता फर्जी डालते हैं। ऐसे में ट्रेस करना चुनौती बन गया है।”
📊 3 साल में 220 हत्याएं, और गिनती जारी…
साल हत्या की संख्या 2022 75 2023 65 2024 79 (अब तक सबसे ज्यादा) 2025 30 (जनवरी से जुलाई तक)
रायपुर में पिछले तीन सालों में हत्या की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन प्रशासन अब तक इन पर लगाम लगाने में विफल साबित हुआ है।
❗ सरकार और सिस्टम पर सवाल
रायपुर स्मार्ट सिटी बनने की ओर बढ़ रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि सड़कों पर खून बह रहा है। क्या राजधानी को ‘क्राइम कैपिटल’ बनने से कोई रोक पाएगा?
- शहर में CCTV नेटवर्क का दावा, लेकिन घटनाएं बेधड़क
- अवैध चाकू की बिक्री पर अब तक कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं
- नशे के खिलाफ अभियान ठंडे बस्ते में
- युवाओं में बढ़ती हिंसा, दोस्त-दोस्त के दुश्मन बनते जा रहे हैं
📣 समय रहते नहीं जागी सरकार तो राजधानी बन जाएगी ‘हत्या नगरी’
रायपुर को सुरक्षित बनाने की ज़िम्मेदारी सरकार और पुलिस प्रशासन की है। एक के बाद एक हो रही हत्याओं ने इस शहर की पहचान को दांव पर लगा दिया है। अब वक्त आ गया है कि सरकार जागे, सख्त कानून बने, अवैध हथियारों की बिक्री रोकी जाए और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाए।



