Mohammed israil
शहर में बीते दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। निचले इलाकों से लेकर शहर के हृदयस्थल में स्थित सरकारी स्कूलों तक में पानी भर गया है। बंधवापारा स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला की हालत तो ऐसी है कि वहां बारिश की बूंदें गिरते ही छुट्टी की घंटी बज जाती है। इस स्कूल में शिक्षा का अधिकार नहीं, अब सिर्फ़ पानी का अधिकार दिखता है—जहां बच्चे नहीं, जलभराव कक्षाएं लेता है।
📌 समस्या-1: स्कूल नहीं, टापू बना परिसर
स्थान: शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला, बंधवापारा
स्थिति: स्कूल के सामने का मैदान और पूरा परिसर पानी से लबालब है। ग्राउंड ऐसा दिखता है जैसे किसी टापू का हिस्सा हो।
स्थिति का असर: स्कूल पहुंचने से पहले ही छात्रों को जल-संघर्ष करना पड़ता है।
📌 समस्या-2: कक्षाओं में पानी, छात्रों की छुट्टी
अंदर का दृश्य: कक्षा कमरों में घुटनों तक पानी भरा हुआ मिला। छात्रों को प्रवेश नहीं मिला।
स्थानीय बयान: छात्रों ने बताया कि बारिश होते ही उन्हें छुट्टी दे दी जाती है।
“हर साल यही होता है… बारिश मतलब छुट्टी,” — एक छात्रा
📌 समस्या-3: संक्रमण और बीमारियों का खतरा
स्वास्थ्य संकट: जलभराव के कारण छात्र-छात्राओं को त्वचा रोग और संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता है।
समाज सेविका का बयान: “पिछले कई सालों से यही हाल है, शिकायतें करने के बाद भी कोई समाधान नहीं होता।”
📌 समस्या-4: शिक्षक भी बेबस, विभाग मौन
शिक्षकों की स्थिति: शिक्षक बताते हैं कि हर बार उच्च अधिकारियों को सूचना दी जाती है, लेकिन समाधान नहीं निकलता।
राजेश विश्वकर्मा (हेड मास्टर) – “हमने विभाग को जानकारी दी है, लेकिन हर बारिश में यही हाल होता है।”
📌 समस्या-5: बच्चों की लापरवाही और जोखिम
छुट्टी के बाद का दृश्य: छुट्टी होने के बाद भी कई बच्चे स्कूल प्रांगण में भीगते रहे, खेलते रहे।
चिंता: अत्यधिक भीगने से बच्चों के बीमार पड़ने का खतरा, शिक्षक भी उन्हें रोकने में असमर्थ दिखे।
📌 समस्या-6: जिलेभर में फैला जलभराव का संकट
आंकड़े: जिले के 200 से अधिक शासकीय स्कूलों में बारिश के दौरान जलभराव की समस्या हर साल सामने आती है।
विभाग की उदासीनता: विभागीय अधिकारियों को पूरी जानकारी होने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
जनप्रतिनिधियों से लगा चुके हैं गुहार
बंधवापारा स्कूल की यह स्थिति सिर्फ एक उदाहरण है, लेकिन यह समस्या पूरी शिक्षा व्यवस्था की जमीनी सच्चाई को उजागर करती है। जब तक जल निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं होती, तब तक पढ़ाई हर बारिश के साथ बहती रहेगी। समय है कि शिक्षा विभाग, नगरीय प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर इस समस्या को प्राथमिकता से हल करें।



