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चना गले में फंसा, मासूम की सांस थमी: परिजनों ने मेडिकल कॉलेज पर इलाज में लापरवाही बरतने के लगाए आरोप, जानिए क्या है पूरा मामला….

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर, कोरबा। कोरबा जिले में एक दर्दनाक हादसे में दो साल के मासूम दिव्यांश की गले में चना फंसने से मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि कोरबा मेडिकल कॉलेज में इलाज में गंभीर लापरवाही हुई, जिससे बच्चे की जान नहीं बचाई जा सकी। डॉक्टरों ने हालांकि इलाज में कोताही से इनकार किया है, लेकिन अस्पताल की व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं।


कोरबा के एक परिवार में उस वक्त मातम छा गया जब घर के आंगन में खेल रहा दो वर्षीय दिव्यांश अचानक कमरे में पहुंचा और वहां रखे चने को निगल लिया। चना उसके गले में अटक गया, जिससे उसे सांस लेने में तकलीफ होने लगी। परिजन घबराकर उसे तुरंत कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले गए।

परिजनों का कहना है कि वे सुबह 8 बजे से अस्पताल में मौजूद थे, लेकिन शाम तक बच्चे का समुचित इलाज नहीं हो सका। दिव्यांश के चाचा गोलू बंसल ने डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “हर बार कहा गया कि सीनियर डॉक्टर देखेंगे, लेकिन वह समय पर नहीं पहुंचे। इसी देरी में बच्चे की हालत बिगड़ती गई और शाम को उसकी मौत हो गई।”

डॉक्टरों की ओर से अलग पक्ष भी सामने आया है। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. हरबंश ने कहा कि जब बच्चा अस्पताल लाया गया, तब तक वह गंभीर अवस्था में था। चना उसके फेफड़ों में चला गया था, जिससे आंतरिक रक्तस्राव शुरू हो गया था। डॉक्टरों की टीम ने तत्काल इलाज शुरू किया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। उन्होंने लापरवाही के आरोपों से इनकार किया।

बच्चे के शव को पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया, जिसे वे अंतिम संस्कार के लिए अपने गृह ग्राम ले गए। बंसल परिवार ने इस मामले की शिकायत स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों से की है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।


⚠️ सावधानी जरूरी: चना, छोटी बैटरियां और खिलौने बन सकते हैं जानलेवा

छोटे बच्चों के लिए चने, मूंगफली, मटर जैसे सूखे दाने या फिर खिलौनों की छोटी-छोटी बैटरियां बेहद खतरनाक हो सकती हैं। ये सांस नली में फंस जाएं तो जान का खतरा बन जाता है। कई बार बैटरी निगलने पर रासायनिक प्रतिक्रिया से आंतरिक अंगों को नुकसान होता है।

बचाव के लिए क्या करें:

  • 3 साल से छोटे बच्चों को छोटे दाने या सूखे मेवे न दें।
  • बच्चों के हाथ में ऐसे खिलौने न दें जिनमें ढीली बैटरियां हों।
  • छोटे सामान जैसे सिक्के, पिन, दाने, बैटरी आदि बच्चों की पहुंच से दूर रखें।
  • ऐसी किसी घटना की आशंका हो तो तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाएं, देरी न करें।

परिजनों में जागरूकता जरूरी

बच्चों की सुरक्षा के लिए अभिभावकों को और ज्यादा सजग रहने की जरूरत है। साथ ही समाज स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।


📌 कोरबा मेडिकल कॉलेज पर पहले भी लगे हैं लापरवाही के आरोप

यह पहली बार नहीं है जब कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल पर लापरवाही के आरोप लगे हैं। इससे पहले भी जुड़वां बच्चों की मौत के एक मामले में अस्पताल पर इलाज में लापरवाही और दस्तावेजी फर्जीवाड़े के आरोप लगे थे। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से अस्पताल की साख पर सवाल उठ रहे हैं।


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