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सुन लीजिए हमारी भी फरियाद…पटवारियों ने उठाई DCS, एग्रिस्टेक पंजीयन, नक्शा बटांकन और धारा 115 की व्यवहारिक समस्याएं, जिला प्रशासन से तत्काल समाधान की मांग

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर, छत्तीसगढ़ |
राजस्व अमले के बीच वर्तमान में शासन द्वारा संचालित योजनाओं — डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS), एग्रिस्टेक फॉर्मर पंजीयन, नक्शा बटांकन और राजस्व पुस्तक परिपत्र की धारा 115 — के क्रियान्वयन में आ रही तकनीकी व व्यवहारिक अड़चनों को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी कड़ी में पटवारियों ने संयुक्त रूप से जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर इन योजनाओं में व्याप्त चुनौतियों को रेखांकित किया है और प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग की है।

पटवारियों का कहना है कि वे शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं को ज़मीनी स्तर पर ईमानदारी से लागू कर रहे हैं, किंतु तकनीकी जटिलताओं, संसाधनों की कमी और असंगत प्रक्रियाओं के चलते उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने विभिन्न योजनाओं में सुधार के लिए कई व्यवहारिक सुझाव भी दिए हैं।


🔹 DCS (डिजिटल क्रॉप सर्वे) से संबंधित प्रमुख समस्याएं और सुझाव:

  1. स्थानीय स्तर पर सर्वेयर नियुक्ति की मांग – तहसील स्तर पर ही सर्वेयरों की नियुक्ति की जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे और नियंत्रण सुनिश्चित हो सके।
  2. मानदेय भुगतान में पारदर्शिता – पटवारियों को सर्वेयरों द्वारा मानदेय को लेकर प्रताड़ित किया जा रहा है। यह कार्य उनकी नियमित ड्यूटी से अतिरिक्त है, इसलिए भुगतान की स्पष्ट और सरल प्रक्रिया बनाई जाए।
  3. सुरक्षा प्रावधान की मांग – फील्ड सर्वे के दौरान सांप-बिच्छू आदि से खतरा बना रहता है, ऐसे में बीमा या आपदा प्रबंधन के तहत सुरक्षा कवर देने की आवश्यकता है।
  4. सर्वे दूरी का निर्धारण – विवादों और आवागमन कठिनाई को देखते हुए खेत से कम से कम 200 मीटर की दूरी से सर्वे हो।
  5. एप्रूवल प्रक्रिया में बदलाव – सर्वे पश्चात् अनुमोदन (एप्रूवल) RAEO (कृषि विस्तार अधिकारी) से किया जाए न कि पटवारी ID से, जिससे कृषि विभाग की भूमिका प्रभावी बनी रहे।

🔹 एग्रिस्टेक फॉर्मर पंजीयन की व्यवहारिक चुनौतियाँ:

  1. एप्रूवल RAEO को सौंपा जाए – कृषि विभाग के नोडल रहने के कारण पंजीयन का अनुमोदन RAEO के माध्यम से हो।
  2. पुराना डाटा बना बाधा – दो साल पूर्व का अपूर्ण व त्रुटिपूर्ण डाटा पंजीयन प्रक्रिया को जटिल बना रहा है।
  3. फेस एप्रूवल प्रणाली अव्यवहारिक – लाभार्थियों के आधार से लिंक न होना, संयुक्त खाते व प्रवासी कृषकों के कारण फेस एप्रूवल कठिन हो गया है।
  4. डाटा अपडेट के बाद ही पंजीयन हो – किसी एक खातेदार का पंजीयन विवाद उत्पन्न कर सकता है, इसलिए सभी जानकारियाँ अपडेट होने के बाद ही प्रक्रिया शुरू हो।
  5. RAEO को ID न देने की स्थिति में फेस एप्रूवल बंद हो – यदि RAEO को ID नहीं मिलती है तो यह प्रणाली तत्काल प्रभाव से बंद होनी चाहिए।
  6. कार्यभार को देखते हुए सहानुभूति की अपील – पटवारियों की कार्यदबाव की स्थिति को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन से सहानुभूतिपूर्वक कार्रवाई की अपील की गई है।

🔹 नक्शा बटांकन से जुड़ी व्यावहारिक दिक्कतें:

  1. वर्षा ऋतु में कार्य असंभव – स्थल निरीक्षण हेतु भूमि माप जरूरी है जो वर्षा ऋतु में संभव नहीं। अतः प्राकृतिक विराम का प्रावधान हो।
  2. कृषकों की अनुपस्थिति – मौके पर कृषकों की अनुपलब्धता सीमांकन को जटिल बनाती है।
  3. सूचना का अभाव – ग्राम स्तर तक सूचना न पहुंचने से विरोध की स्थिति बनती है।
  4. ऑटो म्यूटेशन के कारण गड़बड़ी – नए खसरा नंबर अपडेट नहीं होने से माइनस एंट्री जैसी त्रुटियां सामने आ रही हैं।

🔹 धारा 115 से संबंधित समस्याएं:

  1. तहसील स्तर पर लटकते प्रकरण – पटवारियों द्वारा समय पर प्रविष्टियाँ दर्ज की जाती हैं, परंतु तहसीलदार स्तर पर कई महीनों तक लंबित रहती हैं।
  2. समय सीमा निर्धारण की मांग – खातेदारों को न्याय और लाभ समय पर मिले, इसके लिए अधिकतम 7 से 15 दिनों की समय-सीमा तय की जाए।

🔻 प्रशासन से मांग:

पटवारियों ने मांग की है कि उपरोक्त सभी समस्याओं और सुझावों को ध्यान में रखते हुए जिला स्तर से एकरूप व स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। ताकि योजनाओं का संचालन सुचारू, पारदर्शी, सुरक्षित और समन्वित रूप से किया जा सके और राजस्व अमले पर अनावश्यक दबाव समाप्त हो।


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