Latest news

रायपुर : छत्तीसगढ़ के साहित्यकार एवं कवि विनोद कुमार शुक्ल को ज्ञानपीठ पुरस्कार, मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने दी बधाई

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
3 Min Read

रायपुर। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित साहित्यकार, उपन्यासकार एवं कवि विनोद कुमार शुक्ल को ज्ञानपीठ पुरस्कार सम्मान की घोषणा पर  हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है। उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गौरव का क्षण बताया और कहा कि शुक्ल जी ने  छत्तीसगढ़ को भारत के साहित्यिक मानचित्र पर गौरवान्वित होने का अवसर प्रदान किया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विनोद कुमार शुक्ल का साहित्य  विचारों और संवेदनाओं का अद्वितीय संगम है, जो जनमानस को छूता है। उनकी रचनाओं में गहराई, मौलिकता और मानवीय सरोकारों की झलक मिलती है। उनका रचना संसार छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू को भारत के कोने-कोने में पहुँचाता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ज्ञानपीठ जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से सम्मानित होना न केवल उनके सृजन की पहचान है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक एवं साहित्यिक वैभव की भी मान्यता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने उनके दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की है।

उनका पहला कविता संग्रह 1971 में ‘लगभग जय हिन्द’ नाम से प्रकाशित हुआ। 1979 में ‘नौकर की कमीज़’ नाम से उनका उपन्यास आया जिस पर फ़िल्मकार मणि कौल ने इसी से नाम से फिल्म भी बनाई। कई सम्मानों से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल को उपन्यास ‘दीवार में एक खिड़की ‘साहित्य अकादमी’ पुरस्कार प्राप्त हो चुका है।
विनोद कुमार शुक्ल हिंदी कविता के वृहत्तर परिदृश्य में अपनी विशिष्ट भाषिक बनावट और संवेदनात्मक गहराई के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने समकालीन हिंदी कविता को अपने मौलिक कृतित्व से सम्पन्नतर बनाया है और इसके लिए वे पूरे भारतीय काव्य परिदृश्य में अलग से पहचाने जाते हैं।
विनोद कुमार शुक्ल की प्रमुख कृतियाँ हैं कविता संग्रह- “लगभग जयहिंद” वर्ष 1971., ” वह आदमी चला गया नया गरम कोट पहिनकर विचार की तरह” वर्ष 1981.,”सब कुछ होना बचा रहेगा” वर्ष 1992.,”अतिरिक्त नहीं “वर्ष 2000.”कविता से लंबी कविता”वर्ष 2001.,”आकाश धरती को खटखटाता है ” वर्ष 2006.,”पचास कविताएँ” वर्ष 2011, ” कभी के बाद अभी ” वर्ष 2012., ‘ कवि ने कहा” -चुनी हुई कविताएँ वर्ष 2012.और “प्रतिनिधि कविताएँ’ वर्ष 2013..
उनके चर्चित उपन्यास हैं -‘ नौकर की कमीज़ ‘ वर्ष 1979., ‘ खिलेगा तो देखेंगे ‘ वर्ष 1996.,’ दीवार में एक खिड़की रहती थी ‘ वर्ष 1997.,’ हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी और बौना पहाड़ ‘ वर्ष 2011., ‘ यासि रासा त ‘ वर्ष 2017., और ‘ एक चुप्पी जगह’ वर्ष 2018.
कहानी संग्रह जो प्रसिद्द हुए – ‘ पेड़ पर कमरा ‘ वर्ष 1988., ‘ महाविद्यालय ‘ वर्ष 1996., ‘ एक कहानी ‘ वर्ष 2021., ‘ घोड़ा और अन्य कहानियाँ ‘ वर्ष 2021.शुक्ल जी का रचना संसार और भी विस्तारित,बहुआयामी और समृद्ध है।

खबर को शेयर करने के लिए क्लिक करे।।