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कलेक्टर साहब…ठेकेदार की इतनी हिम्मत.. कलेक्ट्रेट में ही बच्चों को रंग रोगन में लगाया, श्रम विभाग के अधिकारियों की नींद नहीं खुल रही

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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0 कर्मचारियों की नाराजगी व मीडिया को देख  बच्चों को वापस भेजा

बिलासपुर। बाल मजदूरी अपराध है। इसकी जानकारी अफसर से लेकर आम लोगों को है ,लेकिन ठेकेदारों में कानून का खौफ नहीं रह गया है ।हाल यह है कि शुक्रवार को कलेक्ट्रेट में रंग रोगन का कार्य लेने वाले ठेकेदार ने बच्चों को ही काम पर लगा दिया था। इस दौरान मीडिया कर्मी के पहुंचने की खबर लगते ही ठेकेदार की कर्मचारी सक्रिय हुए और बच्चों को मौके से रवाना कर दिया।
बीते कुछ दिनों से कलेक्ट्रेट में रंग रोगन का कार्य चल रहा है। इस कार्य में ठेकेदार के मजदूर लगे हुए हैं। शुक्रवार की सुबह 10 बजे के करीब कलेक्टर जब अपने चेंबर में मौजूद थे तो ठेकेदार ने गुपचुप तरीके से रंग रोगन के कार्य में बच्चों को लगा रखा था। इस पर जब एक कर्मचारी की नजर पड़ी तो उन्होंने बच्चों से उनका आधार कार्ड मांगा तो उन्होंने कहा कि वह घर पर छोड़कर आए हैं साथ ही अपनी उम्र 14 से 15 वर्ष के बीच होना बताया।बच्चे दीवार की घिसाई पर लगे हुए थे उसे तक में उन्होंने बताया कि वे लोग रतनपुर के आसपास के रहने वाले हैं और कक्षा दसवीं के छात्र हैं। इसे लेकर कलेक्ट्रेट के कर्मचारियों ने नाराजगी भी जताई। बच्चों से ठेकेदार के संबंध में पूछताछ की लेकिन वह कोई जवाब नहीं दे सके। इस बीच ठेकेदार के मुंशी की नजर मीडिया कर्मी और कर्मचारी की ओर लग गई उसने बच्चों को तत्काल ही मौके से रवाना कर दिया।

सुरक्षा नियमों को रखा ताक पर

ठेकेदारों को सुरक्षा नियमों की परवाह नहीं होती है कलेक्ट्रेट में चल रहे कार्य के दौरान भी देखने को मिला। यहां काम में लगे कर्मचारी ऊंचाई पर बगैर हेलमेट और सेफ्टी बेल्ट के रंग रोगन कर रहे थे। इसे गंभीर हादसा होने की आशंका बनी रहती है।

क्या है बाल श्रम रोकने कानून

बाल श्रम को रोकने और उसका नियमन करने के लिए, भारत में बाल श्रम (निषेध एवं नियमन) अधिनियम, 1986 बनाया गया है. इस कानून के मुताबिक, 14 साल से कम उम्र के बच्चों को किसी भी तरह के खतरनाक कामों में लगाया नहीं जा सकता। इसके अलावा, इस कानून में ये भी प्रावधान हैं:

इस कानून के तहत, बच्चों के काम करने के घंटों और काम करने की परिस्थितियों को नियंत्रित किया जाता है.

14 से 18 साल के बच्चों को किशोर माना जाता है. इन बच्चों को खनन, ज्वलनशील पदार्थों, विस्फोटकों से जुड़े कामों में लगाया नहीं जा सकता.

इस कानून के तहत, अगर किसी बच्चे को काम पर लगाया जाता है, तो उसका सर्वोत्तम हित सबसे पहले ध्यान में रखा जाएगा.

बाल श्रम से जुड़े अपराधों के लिए भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 370-374 में जुर्माना और सज़ा का प्रावधान है.

बाल श्रम को रोकने के लिए, संविधान में भी कुछ प्रावधान हैं:
अनुच्छेद 39 का खंड (f) बच्चों और युवाओं को शोषण और परित्याग से बचाने की बात करता है.
अनुच्छेद 21ए, शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता देता है।

बाल मज़दूरी कराने पर सज़ा:

बाल श्रम करवाने वाले नियोक्ता को 3 महीने से 1 साल तक की जेल या 10,000 से 20,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.

अगर कोई व्यक्ति एक बार सज़ा मिलने के बाद भी काम कराना जारी रखता है, तो उसे फिर से एक से तीन साल तक की जेल हो सकती है.

अगर आपको किसी बच्चे को मज़दूरी करते हुए देखा जाए, तो आप चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

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