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28 साल की सेवा के बाद भी TET क्यों? 25 अगस्त को शिक्षक निकालेंगे ‘टेट मुक्ति रैली’

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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प्रदेश के सभी जिलों में प्रदर्शन कर कलेक्टर-डीईओ को सौंपेंगे ज्ञापन; बिलासपुर में 4,100 और संभाग में करीब 19 हजार शिक्षक TET की अनिवार्यता से प्रभावित
बिलासपुर। वर्षों से सेवा दे रहे सहायक शिक्षक, शिक्षक और व्याख्याता अब TET की अनिवार्यता के खिलाफ सड़क पर उतरने की तैयारी में हैं। छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने 25 अगस्त को प्रदेश के सभी जिलों में ‘टेट मुक्ति रैली’ निकालने का ऐलान किया है। रैली के बाद मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री, शिक्षा सचिव और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के नाम कलेक्टर एवं जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
मोर्चा का कहना है कि पूर्व से नियुक्त शिक्षकों के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में TET अनिवार्य नहीं था, लेकिन नई प्रक्रिया के कारण वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। मोर्चा ने सवाल उठाया है कि 28 वर्ष का सेवा अनुभव रखने वाले शिक्षक से अब TET परीक्षा क्यों कराई जा रही है? संगठन ने TET से प्रभावित शिक्षकों की सेवा सुरक्षा की गारंटी लेने का दावा किया है।
22-23 अगस्त को जिलों में बैठक, फिर 25 को रैली
25 अगस्त की रैली को लेकर 22 और 23 अगस्त को प्रत्येक जिले में TET प्रभावित शिक्षकों के साथ बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों में रैली की तैयारी और आगे की रणनीति तय की जाएगी।
मोर्चा ने प्रदेशभर के सहायक शिक्षकों, शिक्षकों और व्याख्याताओं से इन बैठकों में शामिल होकर रणनीति में भाग लेने का आह्वान किया है। संगठन का कहना है कि आंदोलन को परिणाम तक पहुंचाने के लिए प्रभावित शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
बिलासपुर में 4,100, संभाग में 19 हजार शिक्षक प्रभावित
शिक्षक संघर्ष मोर्चा के अनुसार बिलासपुर जिले में करीब 4,100 सहायक शिक्षक और शिक्षक TET की अनिवार्यता से प्रभावित होंगे। वहीं पूरे बिलासपुर संभाग में यह संख्या करीब 19 हजार बताई गई है। इसी वजह से बिलासपुर सहित प्रदेश के सभी जिलों में आंदोलन को व्यापक रूप देने की तैयारी है।
मोर्चा बोला- हड़ताल और परिणाम दो अलग बातें
छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रदेश संयोजक संजय शर्मा, वीरेंद्र दुबे और केदार जैन ने शिक्षकों से मोर्चा के साथ तालमेल बनाकर रणनीति में शामिल होने का आह्वान किया है।
उन्होंने कहा कि विभाग के साथ इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई है और इससे शिक्षकों का अहित नहीं होने देने को लेकर सकारात्मक पहल का भरोसा मिला है। हालांकि, अपने हितों की रक्षा के लिए प्रभावित शिक्षकों को स्वयं भी संघर्ष करना होगा। उनका कहना है कि हड़ताल करना और हड़ताल को परिणाम में बदलना दो अलग विषय हैं।
मोर्चा के प्रदेश संयोजकों का नारा है— “हमने दिलाया है, हम ही दिलाएंगे।” संगठन का कहना है कि संविलियन और पेंशन के मुद्दों पर पूर्व में किए गए संघर्षों के कारण शिक्षकों और कर्मचारियों को उनके नेतृत्व पर भरोसा है।
भर्ती-पदोन्नति नियम में TET नहीं था, फिर नई प्रक्रिया क्यों?
शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने कहा कि पूर्व में नियुक्त शिक्षकों के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में TET अनिवार्य नहीं था। अब नई प्रक्रिया से पुराने शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। संगठन ने इसे विसंगति बताते हुए सवाल उठाया है कि वर्षों की सेवा और अनुभव के बावजूद शिक्षकों को TET जैसी परीक्षा देने के लिए बाध्य क्यों किया जा रहा है।
मोर्चा के तीनों प्रदेश संयोजकों ने स्पष्ट किया कि TET प्रभावित शिक्षकों की सेवा सुरक्षा की गारंटी छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा की है।
शिक्षा सचिव और DPI संचालक से हुई लंबी चर्चा
मोर्चा के प्रदेश संयोजक संजय शर्मा, वीरेंद्र दुबे और केदार जैन ने शिक्षा सचिव कमलप्रीत सिंह और लोक शिक्षण संचालक ऋतुराज रघुवंशी से मुलाकात कर TET प्रभावित शिक्षकों के मुद्दे पर लंबी चर्चा की। इस दौरान संगठन की ओर से तैयार कार्ययोजना अधिकारियों के सामने रखी गई।
मोर्चा के अनुसार अधिकारियों ने विषय पर तत्काल जानकारी लेते हुए सकारात्मक पहल का भरोसा दिया है।
B.Ed ब्रिज कोर्स पर भी पहल
बैठक में प्रदेशभर के शिक्षकों के लिए B.Ed ब्रिज कोर्स कराए जाने का आग्रह भी किया गया। मोर्चा के अनुसार इस मांग को स्वीकार करते हुए संबंधित अधिकारियों ने SCERT को बैठक कर कार्ययोजना तैयार करने के लिए कहा है। इस विषय पर भी सकारात्मक पहल का भरोसा दिया गया।
13 फरवरी 2026 के भर्ती-पदोन्नति नियम में संशोधन की मांग
शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने 13 फरवरी 2026 को जारी नई भर्ती एवं पदोन्नति नियमावली को शिक्षकों के लिए विसंगतिपूर्ण बताते हुए उसमें संशोधन का सुझाव सरकार के समक्ष रखा है।
संगठन ने पुरानी पेंशन का लाभ पूर्ण रूप से शिक्षकों को दिलाने के लिए पूर्व सेवा की गणना किए जाने का पक्ष भी मजबूती से रखा है।
केंद्रीय स्तर का वेतनमान और वेतन विसंगति दूर करने की मांग
बैठक में शिक्षक-कर्मचारियों से जुड़े एक अन्य प्रमुख मुद्दे को भी उठाया गया। मोर्चा ने छत्तीसगढ़ के शिक्षक एवं कर्मचारियों को केंद्रीय स्तर का वेतनमान दिए जाने तथा मौजूदा वेतन विसंगति दूर करने की मांग रखी।
संगठन ने सरकार के समक्ष इन सभी मुद्दों पर अपनी विस्तृत कार्ययोजना और मांगों को रखा है।
प्रदेशभर के पदाधिकारी रहे मौजूद
शिक्षा सचिव और लोक शिक्षण संचालक से हुई चर्चा में छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रदेश संयोजक संजय शर्मा, वीरेंद्र दुबे, केदार जैन, सुधीर प्रधान, देवनाथ साहु, योगेश सिंह ठाकुर, चंद्रशेखर तिवारी, धर्मेश शर्मा, जितेंद्र शर्मा, गिरजा शंकर शुक्ला, ताराचंद जायसवाल सहित प्रदेशभर के पदाधिकारी और सहसंयोजक शामिल हुए।
अब 25 अगस्त की टेट मुक्ति रैली को लेकर प्रत्येक जिले में बैठकें की जाएंगी। 22 और 23 अगस्त को TET प्रभावित शिक्षकों के साथ बैठक के बाद 25 अगस्त को जिला मुख्यालयों में रैली निकालकर मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री, शिक्षा सचिव और DPI के नाम कलेक्टर एवं DEO को ज्ञापन सौंपने की तैयारी है।

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