LKG में फिर से एडमिशन शुरू करने की मांग; बोले- नर्सरी बंद करना गलत, गरीब परिवारों के बच्चों की अंग्रेजी शिक्षा पर पड़ेगा सीधा असर
बिलासपुर। स्वामी आत्मानंद स्कूलों की नर्सरी कक्षाओं में LKG के प्रवेश को लेकर अब सियासत भी तेज हो गई है। पालकों द्वारा जिला प्रशासन से आगामी शैक्षणिक सत्र में LKG में दोबारा प्रवेश शुरू करने की मांग के बीच पूर्व विधायक शैलेश पांडे ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने नर्सरी कक्षाओं को बंद करने के फैसले को गलत बताते हुए आरोप लगाया कि विधानसभा में इस मामले को लेकर गलत जानकारी दी जा रही है। उनका कहना है कि यह सिर्फ स्कूल में एडमिशन का विषय नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की शिक्षा और भविष्य से जुड़ा सवाल है।
गरीब परिवारों की परेशानी से जुड़ा है LKG का प्रवेश
बिलासपुर में SAGES नर्सरी स्कूलों में LKG के प्रवेश को लेकर पालकों की चिंता सामने आई है। पालकों ने 20 अगस्त को कलेक्टर के नाम आवेदन सौंपकर आगामी शैक्षणिक सत्र में LKG कक्षा में पुनः प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।
पालकों का कहना है कि वे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। इनमें रिक्शा चालक, घरेलू कामगार, ठेला लगाने वाले, सब्जी विक्रेता और रोजी-मजदूरी करने वाले परिवार शामिल हैं। सीमित आमदनी में परिवार का खर्च चलाना ही मुश्किल है। ऐसे में बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाना इन परिवारों के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती बन जाता है।
निजी स्कूलों की फीस उठाना मुश्किल
पालकों के मुताबिक निजी स्कूलों में सिर्फ फीस ही नहीं, बल्कि किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक खर्च भी होते हैं। सीमित आय वाले परिवारों के लिए इन खर्चों को लगातार वहन करना संभव नहीं है।
ऐसे में स्वामी आत्मानंद स्कूलों की नर्सरी कक्षाओं के जरिए उन्हें अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा दिलाने का अवसर मिल रहा था। पालकों का कहना है कि सरकारी व्यवस्था के माध्यम से उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने का सपना पूरा हो रहा है।
‘नर्सरी बंद करना गरीब बच्चों के साथ अन्याय’
पूर्व विधायक शैलेश पांडे ने कहा कि नर्सरी की कक्षाओं को बंद करना उचित नहीं है। उनके मुताबिक बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जो निजी स्कूलों की फीस वहन नहीं कर सकते। ऐसे परिवारों के बच्चों के लिए स्वामी आत्मानंद स्कूलों की नर्सरी कक्षाएं अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा का महत्वपूर्ण अवसर हैं।
उन्होंने कहा कि नर्सरी की कक्षा बंद होने का सीधा असर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों पर पड़ेगा। उनका कहना है कि सरकार और प्रशासन को इस मामले को केवल प्रवेश प्रक्रिया के रूप में नहीं, बल्कि बच्चों की शिक्षा और भविष्य के सवाल के रूप में देखना चाहिए।
विधानसभा में गलत जानकारी देने का आरोप
पूर्व विधायक ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस मामले को लेकर विधानसभा में गलत जानकारी दी जा रही है। उनका कहना है कि जमीनी स्तर पर पालकों की स्थिति और उनकी जरूरत अलग तस्वीर सामने ला रही है।
उन्होंने आगामी सत्र में LKG की प्रवेश प्रक्रिया दोबारा शुरू करने और SAGES की नर्सरी कक्षाओं को यथावत संचालित रखने की मांग का समर्थन किया है।
पालकों ने प्रशासन से लगाई गुहार
पालकों ने जिला प्रशासन से अपील की है कि नर्सरी स्कूलों को बंद करने के बजाय उन्हें पहले की तरह संचालित रखा जाए। उनका कहना है कि यदि LKG में प्रवेश प्रक्रिया बंद रहती है तो इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ेगा, जो निजी स्कूलों का खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं।
पालकों ने प्रशासन से मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और बच्चों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए आगामी शैक्षणिक सत्र में LKG में नए प्रवेश शुरू करने की मांग की है।
बॉक्स | किन परिवारों की चिंता सबसे ज्यादा
SAGES की नर्सरी कक्षाओं में LKG प्रवेश को लेकर जिन परिवारों ने चिंता जताई है, उनमें—
रिक्शा चालक परिवार
घरेलू कामगार परिवार
ठेला लगाने वाले परिवार
सब्जी विक्रेता
रोजी-मजदूरी करने वाले परिवार
शामिल हैं। पालकों का कहना है कि सीमित आय में निजी स्कूलों की फीस और अन्य शैक्षणिक खर्च उठाना मुश्किल है।
बॉक्स | पालकों की प्रमुख मांगें
1. आगामी शैक्षणिक सत्र में LKG में दोबारा प्रवेश शुरू किया जाए।
2. SAGES की नर्सरी कक्षाओं को यथावत संचालित रखा जाए।
3. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो।
4. अंग्रेजी माध्यम की सरकारी शिक्षा का अवसर बच्चों को मिलता रहे।
5. मामले पर जिला प्रशासन सहानुभूतिपूर्वक विचार करे।
पालक बोले- निजी स्कूल का खर्च संभव नहीं
एक पालक ने कहा कि वे आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से हैं और निजी स्कूल की फीस देना उनके लिए बहुत मुश्किल है। आत्मानंद स्कूल की नर्सरी में बच्चों को पढ़ाने से उन्हें राहत मिली है। उनकी मांग है कि LKG में फिर से एडमिशन शुरू किया जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई जारी रह सके।
शैलेश पांडे बोले- यह सिर्फ एडमिशन का मामला नहीं
पूर्व विधायक शैलेश पांडे के मुताबिक यह सिर्फ एडमिशन का विषय नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य से जुड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जो निजी स्कूलों की फीस वहन नहीं कर सकते। स्वामी आत्मानंद स्कूलों की नर्सरी कक्षाएं ऐसे बच्चों के लिए अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा का बड़ा अवसर हैं। इसलिए प्रशासन को पालकों की मांग पर संवेदनशीलता से विचार करते हुए आगामी सत्र में LKG की प्रवेश प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी चाहिए।
अब प्रशासन के फैसले पर टिकी नजर
पालकों की मांग जिला प्रशासन के सामने पहुंच चुकी है। एक ओर आर्थिक रूप से कमजोर परिवार LKG में दोबारा प्रवेश और नर्सरी कक्षाओं को जारी रखने की मांग कर रहे हैं, वहीं पूर्व विधायक शैलेश पांडे ने इस मुद्दे को सरकार की नीतियों और विधानसभा में दी जा रही जानकारी से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। अब पालकों की नजर प्रशासन के अगले कदम पर है।



