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सड़क निर्माण बना जी का जंजाल, पावर हाउस से लाल खदान ओवरब्रिज तक ट्रैफिक भगवान भरोसे

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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45-50 मिनट में तय हो रहा चंद मिनटों का सफर, सड़क के एक हिस्से की खुदाई और वेयरहाउस के बाहर खड़े ट्रकों से बढ़ी परेशानी; व्यवस्था नहीं सुधरी तो देवरीखुर्द चौक पर होगा चक्काजाम
बिलासपुर। सड़क निर्माण के नाम पर पावर हाउस से लाल खदान ओवरब्रिज के पहले तक यातायात व्यवस्था लोगों के लिए मुसीबत बन गई है। सड़क के एक हिस्से को निर्माण के लिए खोद दिया गया है, जबकि दूसरे हिस्से से दोनों ओर का ट्रैफिक निकाला जा रहा है। इसी बीच वेयरहाउस में चावल खाली करने आने वाले ट्रकों की लंबी कतार सड़क पर स्थायी परेशानी बनी हुई है। न ट्रैफिक पुलिस की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही निर्माण स्थल पर सुरक्षा के लिए जरूरी संकेतक और स्टॉपर नजर आ रहे हैं। ऐसे में वाहन चालक आपस में उलझते हुए किसी तरह रास्ता पार कर रहे हैं। हालात नहीं सुधरे तो देवरीखुर्द चौक पर चक्काजाम किया जाएगा।


प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता और लाल खदान निवासी अभय नारायण राय ने विज्ञप्ति जारी कर सड़क निर्माण के दौरान यातायात व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पावर हाउस से ओवरब्रिज तक का ट्रैफिक भगवान भरोसे चल रहा है। जिस दूरी को सामान्य परिस्थितियों में कुछ मिनटों में तय किया जा सकता है, उसे पार करने में 45 से 50 मिनट लग रहे हैं। इससे आम लोगों, वाहन चालकों और रोजाना इस मार्ग से गुजरने वालों को भारी परेशानी हो रही है।
न ट्रैफिक जवान, न निर्माण स्थल पर सुरक्षा के इंतजाम
अभय नारायण राय के मुताबिक, पावर हाउस और देवरीखुर्द मोड़ पर यातायात नियंत्रित करने के लिए ट्रैफिक पुलिस के जवानों की व्यवस्था नहीं है। सड़क निर्माण कर रहे ठेकेदार ने भी पर्याप्त स्टॉपर और चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए हैं। सड़क के एक हिस्से की खुदाई के बाद दूसरे हिस्से से दोनों दिशाओं के वाहनों की आवाजाही हो रही है। इससे रास्ता संकरा हो गया है और वाहनों के बीच निकलने की होड़ में जाम की स्थिति बन रही है।
उन्होंने कहा कि वाहन चालक आपस में उलझ रहे हैं और किसी तरह रास्ता पार करने को मजबूर हैं। निर्माण स्थल पर यातायात को व्यवस्थित करने के लिए जरूरी इंतजाम नहीं होने से दुर्घटना की आशंका भी बनी हुई है।
वेयरहाउस के ट्रकों ने बढ़ाई मुश्किल
इस मार्ग पर वेयरहाउस में चावल खाली करने आने वाले ट्रकों की लंबी कतार भी परेशानी बढ़ा रही है। सड़क निर्माण के कारण पहले ही यातायात प्रभावित है, ऊपर से सड़क किनारे खड़े ट्रकों के चलते वाहनों के निकलने के लिए जगह कम पड़ रही है। बड़ी बसें, भारी ट्रक और ओवरलोड वाहन दिनभर ही नहीं, शाम और रात में भी इस मार्ग से गुजरते हैं।
राय ने सवाल उठाया कि जब महमंद चौक से पावर हाउस तक नो-एंट्री का मार्ग है, तब भी भारी वाहन किस तरह लगातार आवाजाही कर रहे हैं? यातायात नियमों और प्रतिबंधों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है? निर्माण कार्य के दौरान भारी वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित किए बिना जाम से राहत कैसे मिलेगी?
फोन करने पर मिलता है एक ही जवाब—सड़क बनने तक ऐसे ही चलेगा
अभय नारायण राय ने आरोप लगाया कि यातायात विभाग, संबंधित लोक निर्माण विभाग और नगर निगम के अधिकारियों को फोन करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। उनके मुताबिक, शिकायत करने पर एक ही जवाब मिलता है कि जब तक सड़क नहीं बन जाती, तब तक व्यवस्था इसी तरह चलेगी।
उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण में समय लग सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि लोगों को तब तक अव्यवस्थित यातायात और जाम की परेशानी झेलने के लिए छोड़ दिया जाए। निर्माण पूरा होने तक वैकल्पिक यातायात व्यवस्था, पुलिस जवानों की तैनाती और भारी वाहनों के नियमन जैसे जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए।
कलेक्टर की समीक्षा के बाद भी सवाल—निर्माण पूरा होने तक ट्रैफिक कैसे संभलेगा?
राय ने बताया कि एक दिन पहले ही कलेक्टर ने अधिकारियों के साथ निर्माण कार्यों की समीक्षा की थी। इस दौरान निर्माण जल्द पूरा होने का आश्वासन मिला है। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि सड़क बनने तक यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए क्या किया जा रहा है?
उनका कहना है कि निर्माण कार्य पूरा होने की समयसीमा अपनी जगह है, लेकिन तब तक रोजाना जाम में फंसने वाले लोगों को राहत देना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। पावर हाउस से लाल खदान ओवरब्रिज तक यातायात नियंत्रित करने के लिए तत्काल व्यवस्था जरूरी है।
व्यवस्था नहीं सुधरी तो देवरीखुर्द चौक पर चक्काजाम
अभय नारायण राय ने चेतावनी दी है कि यदि यातायात व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं किया गया तो देवरीखुर्द चौक पर चक्काजाम किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन और संबंधित विभागों से मांग की है कि सड़क निर्माण पूरा होने तक ट्रैफिक पुलिस की तैनाती की जाए, निर्माण स्थल पर पर्याप्त स्टॉपर और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, वेयरहाउस के बाहर ट्रकों की कतार को व्यवस्थित किया जाए और भारी वाहनों की आवाजाही पर नियमों के मुताबिक नियंत्रण रखा जाए।
अब सवाल यह है कि सड़क निर्माण के दौरान यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए प्रशासन कब कदम उठाएगा? फिलहाल, सड़क की खुदाई, ट्रकों की कतार और ट्रैफिक प्रबंधन की कमी से परेशान लोगों को राहत मिलने का इंतजार है।

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