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स्मृति ईरानी के छत्तीसगढ़ दौरे से क्या कुछ बदलने वाला है ? सत्ता का रिपोर्ट कार्ड, संगठन की नई बिसात और सबसे बड़ा सवाल—क्या महतारियों की झोली और भरेगी? मिशन 2028–29 से पहले भाजपा का मैराथन सियासी मंथन

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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मंत्रिमंडल में बदलाव और महिला नेतृत्व, वरिष्ठ नेताओं के भविष्य पर भी क्या बनेगी रणनीति
Md israil| रायपुर, बिलासपुर
बढ़ती महंगाई के बीच क्या छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन की राशि बढ़ेगी? क्या महिला-केंद्रित योजनाओं में नए लाभ जुड़ेंगे? क्या भाजपा संगठन में महिलाओं और वरिष्ठ नेताओं की भूमिका को लेकर नई व्यवस्था सामने आएगी? और क्या 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले मंत्रियों, विधायकों तथा संगठन के पदाधिकारियों के कामकाज की जवाबदेही तय होगी? भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री और छत्तीसगढ़ की नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी के 25–26 अक्टूबर के रायपुर प्रवास के इर्द-गिर्द इन सवालों पर राजनीतिक नजर टिकी है।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का ट्वीट भी चर्चा में…

सभी फोटो फाइल।

दो दिनों में प्रस्तावित 12 बैठकों का कार्यक्रम केवल संगठनात्मक औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रदेश में सत्ता और संगठन के बीच तालमेल की समीक्षा का अवसर है। 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 90 में से 54 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। कांग्रेस को 35 और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को एक सीट मिली थी। अब पार्टी के सामने चुनौती है कि चुनावी जीत को बूथ स्तर की सक्रियता, जनसंपर्क और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से कैसे जोड़ा जाए।
महतारियों की झोली और भरेगी?
छत्तीसगढ़ की राजनीति में महतारी वंदन योजना महिला मतदाताओं से जुड़ा अहम मुद्दा है। पात्र महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। ऐसे में सवाल है कि क्या सरकार आने वाले समय में इस राशि को बढ़ाने या महिला हितग्राहियों के लिए अतिरिक्त लाभ देने पर विचार करेगी? क्या स्मृति ईरानी के दौरे में महिला सशक्तीकरण, महिला मोर्चा की सक्रियता और संगठन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा होगी?
फिलहाल राशि बढ़ाने या मंत्रिमंडल में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने का कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। लेकिन आगामी चुनावों के संदर्भ में महिला मतदाताओं से संवाद और महिला-केंद्रित योजनाओं की समीक्षा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। ‘महतारियों की झोली और भरेगी?’—यह अभी फैसला नहीं, बल्कि दौरे से जुड़ा बड़ा राजनीतिक सवाल है।
मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही की कसौटी
स्मृति ईरानी प्रदेश अध्यक्ष किरण देव, संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, प्रदेश पदाधिकारियों, संभाग व जिला प्रभारियों, जिलाध्यक्षों तथा पूर्व विधायकों-सांसदों से चर्चा करेंगी। दूसरे दिन विधायकों, सांसदों, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा सहित मंत्रिमंडल, निगम-मंडल पदाधिकारियों तथा विचार परिवार के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें प्रस्तावित हैं।
इन बैठकों में सरकारी योजनाओं की पहुंच, जनप्रतिनिधियों की क्षेत्रीय सक्रियता, कार्यकर्ताओं से संवाद और सत्ता-संगठन के समन्वय पर फीडबैक महत्वपूर्ण हो सकता है। बूथ समितियों, पन्ना प्रमुखों और जिला इकाइयों की सक्रियता के साथ चुनाव में हारी सीटों की समीक्षा भी चर्चा का विषय है। लगभग 36 हारी हुई सीटों की समीक्षा की बात सामने आई है, हालांकि इसे आधिकारिक एजेंडे का पुष्ट आंकड़ा मानने से पहले पुष्टि जरूरी है।
वरिष्ठ नेताओं से लेकर मिशन 2028–29 तक
पूर्व जनप्रतिनिधियों और पुराने संगठनात्मक पदाधिकारियों से बैठक के जरिए अनुभव का उपयोग तथा नई जिम्मेदारियों को लेकर चर्चा की संभावना है। हालांकि, किसी बड़े संगठनात्मक फेरबदल, वरिष्ठ नेताओं की वापसी या मंत्रिमंडल में बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
भाजपा 31 अक्टूबर से 5 नवंबर तक ‘घुसपैठिए हटाओ–देश बचाओ’ अभियान की भी तैयारी कर रही है, जिसमें पदयात्रा, संगोष्ठी और सोशल मीडिया गतिविधियों की रिपोर्ट है। इसे स्मृति ईरानी की बैठकों में तय नई रणनीति मानने की पुष्टि नहीं है।
12 बैठकों का एजेंडा, नजर नतीजों पर
25 अक्टूबर को ‘मन की बात’ श्रवण, प्रदेश व जिला संगठन की बैठकें, पूर्व जनप्रतिनिधियों से संवाद और शाम को कोर ग्रुप की बैठक प्रस्तावित है। 26 अक्टूबर को विधायकों, सांसदों, मंत्रिमंडल, निगम-मंडल पदाधिकारियों और विचार परिवार के प्रतिनिधियों से चर्चा के साथ मीडिया संवाद की भी बात कही जा रही है।
स्मृति ईरानी के इस दौरे में इसलिए निगाह केवल संगठनात्मक बैठकों पर नहीं, बल्कि उन मुद्दों पर भी रहेगी जो सीधे सरकार, कार्यकर्ताओं और मतदाताओं से जुड़े हैं—महिला सहायता का भविष्य, संगठन में महिलाओं की भूमिका, जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही, वरिष्ठ नेतृत्व का समन्वय और आगामी चुनावों की तैयारी। सबसे बड़ा सवाल यही है: क्या इस मंथन से महतारियों की झोली भरने, संगठन को नई दिशा देने और मिशन 2028–29 की तैयारी के लिए कोई ठोस पहल सामने आएगी?

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