
बिलासपुर।
पर्दे के पीछे रहकर मरीजों की जिंदगी बचाने वाले ‘मौन नायकों’ का सम्मान, कोरोना काल में दिन-रात सेवा से लेकर आधुनिक चिकित्सा तक लैब टेक्नोलॉजिस्ट की भूमिका रेखांकित
बिलासपुर। किसी मरीज की बीमारी की सटीक पहचान करनी हो, उपचार की दिशा तय करनी हो या इलाज के प्रभाव का आकलन करना हो—हर कदम पर प्रयोगशाला जांच की भूमिका निर्णायक होती है। जांच रिपोर्ट की सटीकता जहां चिकित्सकों को सही उपचार का आधार देती है, वहीं इसमें मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट (एमएलटी) की जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण होती है। चिकित्सा व्यवस्था के इसी अहम लेकिन अक्सर पर्दे के पीछे रहने वाले पक्ष को रेखांकित करते हुए छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर में 24 अक्टूबर को मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट को चिकित्सा दल का अभिन्न हिस्सा बताते हुए कहा कि इनके बिना मरीजों की बीमारी का सही निदान और प्रभावी उपचार सुनिश्चित करना कठिन है। उन्होंने एमएलटी कर्मचारियों को ‘सफेद कोट में जीवन बचाने वाले मौन नायक’ बताते हुए कहा कि प्रयोगशालाओं में पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाले इन कर्मियों का योगदान मरीजों की सुरक्षा और बेहतर चिकित्सा सेवाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री विभाग के विभागाध्यक्षों, चिकित्सकों तथा मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट स्टाफ की उपस्थिति रही। इस अवसर पर एमएलटी कर्मचारियों के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें सम्मानित किया गया।
सटीक जांच से तय होती है उपचार की दिशा
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने अपने संबोधन में कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में प्रयोगशाला जांच केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मरीज की बीमारी को समझने और उपचार की सही दिशा निर्धारित करने का महत्वपूर्ण आधार है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर चिकित्सक बीमारी की पहचान करने, उपचार संबंधी निर्णय लेने और मरीज की स्थिति का आकलन करने में सक्षम होते हैं। ऐसे में मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट की दक्षता, सावधानी और जिम्मेदारी सीधे तौर पर चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता से जुड़ी है।
उन्होंने कहा कि सिम्स का उद्देश्य यहां आने वाले प्रत्येक मरीज को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना है, ताकि वह स्वस्थ होकर चेहरे पर मुस्कान के साथ घर लौट सके। इस लक्ष्य को हासिल करने में चिकित्सकों के साथ-साथ प्रयोगशाला में काम करने वाले कर्मचारियों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
डॉ. मूर्ति ने प्रयोगशालाओं में उपलब्ध सुविधाओं और संसाधनों से जुड़ी कमियों को दूर करने की दिशा में प्रयास करने का आश्वासन भी दिया। उनके संबोधन में आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में एमएलटी कर्मचारियों की भूमिका, उनकी जिम्मेदारियों और संस्थान में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर रहा।
आधुनिक चिकित्सा में तकनीकी दक्षता और सटीकता जरूरी
कार्यक्रम में माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. सागरिका ध्यान ने एमएलटी टीम को चिकित्सा सेवाओं की अग्रिम पंक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके कठिन परिश्रम और समर्पण की सराहना की। उन्होंने प्रयोगशाला कर्मियों की भूमिका को मरीजों के उपचार और स्वास्थ्य सेवाओं के सुचारु संचालन के लिए महत्वपूर्ण बताया।
पैथोलॉजिस्ट डॉ. साधना बागड़े ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान में लगातार नई तकनीकें विकसित हो रही हैं और शोध के माध्यम से जांच की प्रक्रियाओं में बदलाव आ रहे हैं। ऐसे में मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट के लिए जरूरी है कि वे अपने ज्ञान, तकनीकी कौशल और कार्यक्षमता को निरंतर विकसित करते रहें, ताकि बदलती चिकित्सा जरूरतों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण जांच सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
बायोकेमिस्ट्री विभागाध्यक्ष डॉ. विभा टंडन ने जांच की सटीकता को सुरक्षित उपचार की बुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि प्रयोगशाला जांच में त्रुटि होने से मरीज के उपचार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए प्रत्येक जांच को पूरी सावधानी, सटीकता और जिम्मेदारी के साथ करना आवश्यक है। प्रयोगशाला कर्मियों की सतर्कता मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
पैथोलॉजिस्ट डॉ. चित्रांगी ने बीमारियों की पहचान और मरीजों के उपचार में लैब टेक्नोलॉजिस्ट के योगदान पर प्रकाश डाला। वहीं, डॉ. पूर्णिमा ने एमएलटी कर्मचारियों को स्वास्थ्य सेवाओं के गुमनाम नायक बताते हुए उनके समर्पण और जिम्मेदारी की सराहना की।
ल्यूवेनहॉक के योगदान को किया याद
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों और एमएलटी साथियों का तिलक लगाकर तथा गुलाब का फूल भेंट कर स्वागत करने के साथ हुई। स्वागत उद्बोधन में श्रीमती आबिदा बेगम ने मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि यह दिवस महान वैज्ञानिक एंटोनी वॉन ल्यूवेनहॉक के जन्मदिवस के अवसर पर मनाया जाता है। ल्यूवेनहॉक को सूक्ष्मजीवों के अध्ययन और सूक्ष्मदर्शी के विकास में महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाना जाता है। सूक्ष्मदर्शी के माध्यम से सूक्ष्म जीवों का अध्ययन आधुनिक सूक्ष्मजीव विज्ञान और प्रयोगशाला चिकित्सा के विकास में महत्वपूर्ण साबित हुआ। इसी वैज्ञानिक विरासत ने बीमारी की पहचान और चिकित्सा जांच की आधुनिक पद्धतियों के विकास का मार्ग प्रशस्त किया।
कोरोना काल में भी नहीं थमे जांच के प्रयास
कार्यक्रम का संचालन करते हुए शिरोमणि नायक ने कोरोना महामारी के दौर के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि जब महामारी के कारण बड़ी संख्या में लोग घरों में रहने को मजबूर थे, तब मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट दिन-रात अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे थे। संक्रमण की जांच से लेकर बीमारी की पहचान तक, प्रयोगशाला कर्मियों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी सेवाएं जारी रखीं।
उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान एमएलटी कर्मचारियों की भूमिका ने यह स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य व्यवस्था में प्रयोगशाला सेवाएं कितनी अनिवार्य हैं। चिकित्सकों के उपचार संबंधी निर्णयों के लिए विश्वसनीय जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराना उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति उनका समर्पण हमेशा याद रखा जाएगा।
इस दौरान शिवकुमारी बघेल ने ‘मत कहो खुदा से…’ गीत प्रस्तुत कर उपस्थित साथियों का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि एमएलटी कर्मचारियों को इस बात पर गर्व है कि वे पर्दे के पीछे रहकर भी मरीजों की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। गीत और अनुभवों के माध्यम से कार्यक्रम में सेवा, समर्पण और पेशेवर जिम्मेदारी की भावना को अभिव्यक्त किया गया।
चिकित्सकों और कर्मचारियों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित चिकित्सकों को पौधे भेंट कर सम्मानित किया गया। वहीं, मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट स्टाफ को उपहार देकर उनके योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया। आयोजन का उद्देश्य प्रयोगशाला कर्मियों के कार्यों को पहचान देना और स्वास्थ्य सेवाओं में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करना रहा।
कार्यक्रम के अंत में किशोर जायसवाल ने आभार व्यक्त किया। आयोजन को सफल बनाने में वरिष्ठ स्टाफ दुष्यंत रॉय, देव सिंह मर्को, किरण श्रीवास और सोमाराज श्रीवास सहित खेदूत साहू, रवि पांडे, मनीष चतुर्वेदी, जया शाह, श्वेता वर्मा, पिंकी वाधवानी, बृजभान संजय, सुमन गुप्ता, रमेश श्रीवास, रविंद्र, अरुण, नरेंद्र, रामफल, कृष्णा, अजय तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का विशेष सहयोग रहा।
