बिलासपुर के ढेका में जमीन को लेकर घमासान; स्थगन आदेश के बाद अधूरे पड़े मकान, जांच अधिकारी की निष्पक्षता पर भी उठे सवाल
सवाल बड़ा है—सरकारी आबादी की जमीन पर वर्षों से काबिज मां-बेटी के प्रधानमंत्री आवास का निर्माण क्यों रुका? पहले राजस्व जांच में कब्जा मिलने का दावा, अब दूसरे पक्ष की आपत्ति पर रोक। कलेक्टर से शिकायत के बाद मामले में निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

बिलासपुर। शहर से लगे ग्राम पंचायत ढेका में सरकारी जमीन पर अधिकार को लेकर विवाद गहरा गया है। एक तरफ प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अपने घर का सपना पूरा करने में जुटी मां-बेटी हैं, तो दूसरी तरफ भू-स्वामी योजना के तहत करीब 70 एकड़ जमीन पर दावा करने वाले भूपेंद्र सिंह गांधी की आपत्ति है। विवाद के बीच नायब तहसीलदार के स्थगन आदेश ने अंबालिका सिंह और विमला सिंह के मकानों का निर्माण रोक दिया है। अब दोनों ने कलेक्टर और एसडीएम के सामने शिकायत दर्ज कराते हुए जांच अधिकारी बदलने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब संबंधित जमीन को लेकर पहले भी राजस्व जांच होने और मौके पर मां-बेटी का कब्जा पाए जाने का दावा किया जा रहा है, तो अब निर्माण पर रोक लगाने की नौबत क्यों आई? क्या जमीन के स्वामित्व और कब्जे की स्थिति स्पष्ट किए बिना प्रधानमंत्री आवास के निर्माण को रोकना उचित है? फिलहाल इन सवालों का जवाब जांच और न्यायालयीन कार्यवाही से ही सामने आएगा।
क्या है पूरा मामला?
ढेका निवासी अंबालिका सिंह और विमला सिंह के मुताबिक, गांव के खसरा नंबर 41/22 और 41/26 की जमीन सरकारी आबादी की है। उनका दावा है कि वे कई वर्षों से इस जमीन पर काबिज हैं। इसी आधार पर ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत ने वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उनके मकान निर्माण के लिए राशि स्वीकृत की थी।
मकानों का निर्माण वर्ष 2023-24 में शुरू हुआ। पहली किश्त मिलने के बाद दूसरी किश्त की राशि नहीं मिलने से निर्माण कार्य बीच में ही रोकना पड़ा। नतीजा यह हुआ कि दोनों मकान अधूरे रह गए। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, अब पंचायत की ओर से दूसरी किश्त की राशि जारी होने के बाद उन्होंने दोबारा निर्माण शुरू किया, लेकिन इसी बीच जमीन विवाद को लेकर स्थगन आदेश जारी हो गया और निर्माण फिर रुक गया।
पहले जांच में कब्जा मिलने का दावा, फिर विवाद कैसे बढ़ा?
अंबालिका सिंह और विमला सिंह का कहना है कि जमीन पर उनके कब्जे को लेकर राजस्व विभाग पहले भी जांच कर चुका है। उनके अनुसार, तत्कालीन तहसीलदार की जांच में मौके पर उनका कब्जा पाया गया था। इसके बाद राजस्व अधिकारियों ने रिकॉर्ड में उनके नाम दर्ज करने की सिफारिश भी की थी।
हालांकि, रिकॉर्ड में नाम दर्ज करने की सिफारिश और जमीन के स्वामित्व का अंतिम निर्धारण अलग-अलग बातें हैं। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि पूर्व जांच की रिपोर्ट में वास्तव में क्या दर्ज है, नाम दर्ज करने की सिफारिश पर आगे क्या कार्रवाई हुई और वर्तमान विवाद में जमीन की कानूनी स्थिति क्या है।
70 एकड़ जमीन के दावेदार की आपत्ति पर रोक लगाने का आरोप
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि गांव में नहीं रहने वाले भूपेंद्र सिंह गांधी की आपत्ति के बाद उनके मकानों का निर्माण रोक दिया गया। गांधी ने भू-स्वामी योजना के तहत सरकारी आबादी की जमीन पर दावा किया है और जमीन पर कब्जे से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना के मकानों के निर्माण पर आपत्ति जताई है।
मां-बेटी का आरोप है कि नायब तहसीलदार विनिता शर्मा ने उनकी स्थिति और पूर्व जांच के तथ्यों पर पर्याप्त विचार किए बिना निर्माण पर रोक लगा दी। उनका कहना है कि इस कार्रवाई से उनके घर अधूरे पड़े हैं और वे अपनी समस्या के समाधान के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
जांच अधिकारी पर सवाल, दूसरे अधिकारी से जांच की मांग
विवाद ने अब जांच की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत के मुताबिक, भूपेंद्र सिंह गांधी ने दोबारा जांच कराने के लिए आवेदन दिया था। इसके बाद जांच की जिम्मेदारी नायब तहसीलदार विनिता शर्मा को सौंपी गई।
अंबालिका सिंह और विमला सिंह का आरोप है कि मौके का निरीक्षण करने के बाद आसपास रहने वाले लोगों से समुचित पूछताछ नहीं की गई। उन्हें आशंका है कि जांच की प्रक्रिया में दूसरे पक्ष को फायदा पहुंच सकता है। इसी आधार पर उन्होंने कलेक्टर और एसडीएम आकांक्षा त्रिपाठी को आवेदन देकर जांच किसी अन्य अधिकारी से कराने की मांग की है।
हालांकि, जांच अधिकारी के पक्षपात करने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस संबंध में शिकायतकर्ताओं की आपत्ति और प्रशासन का पक्ष सामने आना जरूरी है।
नायब तहसीलदार का पक्ष: न्यायालय में चल रहा है मामला
नायब तहसीलदार विनिता शर्मा के मुताबिक, ग्राम पंचायत ढेका में भू-स्वामी योजना के तहत अंबालिका सिंह, विमला सिंह और भूपेंद्र गांधी ने जमीन पर अपने-अपने दावे किए हैं। विवाद को लेकर मामला न्यायालय में विचाराधीन है और दोनों पक्षों से जवाब मांगा गया है।
उन्होंने बताया कि विवादित जमीन पर निर्माण रोकने के लिए आवेदन दिया गया था। इसी के आधार पर नियमानुसार स्थगन आदेश जारी किया गया है।
एसडीएम बोलीं: जानकारी लेकर करेंगे कार्रवाई
एसडीएम आकांक्षा त्रिपाठी ने कहा कि उन्हें फिलहाल मामले की जानकारी नहीं है। यदि शिकायत प्राप्त हुई है, तो उसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पंचायत से स्वीकृत प्रधानमंत्री आवास योजना के मकानों का निर्माण क्यों रोका गया है, इसकी जानकारी ली जाएगी।
अब प्रशासन के सामने ये अहम सवाल
खसरा नंबर 41/22 और 41/26 की जमीन का राजस्व रिकॉर्ड क्या कहता है?
पूर्व तहसीलदार की जांच रिपोर्ट में कब्जे को लेकर क्या निष्कर्ष दर्ज हैं?
रिकॉर्ड में नाम दर्ज करने की सिफारिश पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?
भू-स्वामी योजना के तहत भूपेंद्र सिंह गांधी के दावे का आधार क्या है?
विवादित जमीन पर स्थगन आदेश किन तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर जारी किया गया?
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत राशि और निर्माण की स्थिति को लेकर प्रशासन क्या कदम उठाएगा?
क्या कलेक्टर शिकायत के आधार पर किसी दूसरे अधिकारी से जांच कराने का निर्णय लेंगे?
घर का सपना अधर में, फैसले का इंतजार
ढेका का यह विवाद केवल जमीन पर कब्जे का मामला नहीं रह गया है। इसके साथ दो परिवारों के आवास, सरकारी जमीन के रिकॉर्ड, भू-स्वामी योजना के दावे और प्रशासनिक कार्रवाई की निष्पक्षता जैसे मुद्दे भी जुड़े हैं।
एक ओर मां-बेटी अपने वर्षों पुराने कब्जे और प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति का हवाला देकर निर्माण पूरा करने का रास्ता मांग रही हैं, वहीं दूसरे पक्ष ने जमीन पर अपना दावा पेश किया है। अब निगाहें जिला प्रशासन की जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया पर हैं। सबसे जरूरी है कि जमीन की वास्तविक स्थिति तथ्यों और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर स्पष्ट हो, ताकि किसी भी पक्ष के अधिकार प्रभावित न हों और प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों की स्थिति पर भी नियमानुसार निर्णय लिया जा सके।
