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पांच साल से बदहाल सड़क, जनता का फूटा गुस्सा; तालापारा में तीन घंटे चक्काजाम

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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भूमिपूजन के चार महीने बाद भी सड़क अधूरी, गिट्टी-मुरुम डालकर छोड़ा काम; धूल और गड्ढों से परेशान मोहल्लेवासियों ने खोला मोर्चा
बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर के तालापारा स्थित मारीमाई क्षेत्र में पांच साल से बदहाल सड़क की समस्या को लेकर आखिरकार स्थानीय लोगों का सब्र जवाब दे गया। जर्जर सड़क, जगह-जगह उखड़ी गिट्टी और लगातार उड़ती धूल से परेशान मोहल्लेवासियों ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। मस्जिद के सामने बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए और करीब तीन घंटे तक चक्काजाम कर दिया। इससे सड़क पर आवागमन बाधित रहा और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।


पांच साल से परेशानी, गिट्टी उखड़ी और धूल ने बढ़ाई मुसीबत
स्थानीय लोगों का आरोप है कि तालापारा के मारीमाई क्षेत्र की सड़क पिछले पांच साल से बदहाल स्थिति में है। सड़क की जगह-जगह गिट्टी उखड़ चुकी है और मार्ग पर चलना जोखिम भरा हो गया है। दोपहिया वाहन चालक असंतुलित होकर गिर रहे हैं और आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। वहीं, वाहनों की आवाजाही के साथ उड़ने वाली धूल ने मोहल्लेवासियों का जीना मुहाल कर दिया है। लोगों को आशंका है कि लगातार धूल के संपर्क में रहने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां और बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।


भूमिपूजन के चार महीने बाद भी पक्की सड़क का इंतजार
प्रदर्शनकारियों की नाराजगी का प्रमुख कारण यह है कि करीब चार महीने पहले विधायक और महापौर ने सड़क निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया था। लोगों को उम्मीद थी कि अब वर्षों पुरानी समस्या से मुक्ति मिलेगी और क्षेत्र में पक्की सड़क का निर्माण शुरू होकर जल्द पूरा हो जाएगा। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि पक्की सड़क बनाने के बजाय केवल गिट्टी और मुरुम डालकर काम अधूरा छोड़ दिया गया। इससे सड़क की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका और मोहल्लेवासियों की परेशानी पहले की तरह बनी हुई है।
अधिकारियों और नेताओं के चक्कर काटते रहे लोग
मोहल्लेवासियों का कहना है कि वे पिछले पांच साल से सड़क की समस्या को लेकर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के चक्कर काट रहे हैं। बार-बार शिकायत करने और आश्वासन मिलने के बावजूद हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। भूमिपूजन के बाद भी सड़क निर्माण पूरा नहीं होने से लोगों में नाराजगी और बढ़ गई है। प्रदर्शन के दौरान वार्ड क्रमांक 25 और 26 के पार्षदों की गैरमौजूदगी को लेकर भी लोगों ने असंतोष जताया। उनका सवाल है कि जब वार्ड के नागरिक बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तब उनकी समस्या को दूर कराने की जिम्मेदारी निभाने वाले जनप्रतिनिधि मौके पर क्यों मौजूद नहीं थे?


तीन घंटे तक चक्काजाम, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
सड़क की बदहाली से परेशान लोगों ने मस्जिद के सामने एकत्रित होकर चक्काजाम किया। करीब तीन घंटे तक चले विरोध प्रदर्शन के कारण मार्ग पर आवागमन प्रभावित रहा। प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दी कि यदि सड़क निर्माण की मांग पूरी नहीं हुई और समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
सवालों के घेरे में सड़क निर्माण और जवाबदेही
तालापारा के मारीमाई क्षेत्र की स्थिति ने सड़क निर्माण की प्रक्रिया और जिम्मेदारों की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब सड़क निर्माण के लिए भूमिपूजन हो चुका है, तो चार महीने बाद भी पक्की सड़क अधूरी क्यों है? पांच साल से जर्जर मार्ग पर चलने को मजबूर नागरिकों को राहत कब मिलेगी? आखिर गिट्टी और मुरुम डालकर काम छोड़ देने से समस्या का समाधान कैसे होगा?
फिलहाल मोहल्लेवासी धूल, गड्ढों और दुर्घटनाओं के खतरे के बीच आवागमन करने को मजबूर हैं। अब देखना यह है कि संबंधित जिम्मेदार इस विरोध को गंभीरता से लेते हुए सड़क निर्माण पूरा कराने के लिए ठोस कदम उठाते हैं या फिर तालापारा के लोगों को अपनी बुनियादी मांग पूरी कराने के लिए आगे भी आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।

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