00 गिरोह ने एक फर्जी कॉल सेंटर के माध्यम से रिलायंस इंश्योरेंस पॉलिसी का पैसा वापस दिलाने के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपए की ठगी
00 थाना रेंज साइबर एवं एसीसीयू बिलासपुर की ऐतिहासिक सफलता

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस की रेंज साइबर और एसीसीयू (एंटी क्राइम एंड सायबर यूनिट) बिलासपुर ने एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई पुलिस महानिरीक्षक (बिलासपुर रेंज) डॉ. संजीव शुक्ला और पुलिस अधीक्षक (बिलासपुर) रजनेश सिंह के निर्देशन में की गई।
गिरोह ने एक फर्जी कॉल सेंटर के माध्यम से रिलायंस इंश्योरेंस पॉलिसी का पैसा वापस दिलाने के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये ठगे। इस मामले में पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें गिरोह ने अलग-अलग शुल्क के नाम पर ₹48,42,075/- की धोखाधड़ी की थी।
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कैसे सामने आया मामला
सारंगढ़ के निवासी सुभाष चंद्र गुरु (62 वर्ष) ने शिकायत की थी कि 2022 से 2024 के बीच उन्हें 8381815808, 9540918473, 9118428483, 7970882319 और 9289771925 नंबरों से कॉल आए। कॉल करने वालों ने रिलायंस इंश्योरेंस पॉलिसी का जमा पैसा वापस दिलाने का झांसा दिया।
आरोपियों ने “अनापत्ति प्रमाण पत्र (No Objection Certificate)” के नाम पर शुल्क लिया।
समय-समय पर विभिन्न बहानों से राशि वसूली गई।
अंततः प्रार्थी से कुल ₹48,42,075/- ठग लिए गए।
शिकायत मिलने के बाद प्रकरण को थाना कोतवाली सारंगढ़ में अपराध संख्या 556/2024 के तहत पंजीकृत किया गया। बाद में जांच थाना रेंज साइबर बिलासपुर को सौंपी गई।
ठगी का पूरा नेटवर्क: क्या और कैसे हुआ
तकनीकी जांच और टीम की कार्यवाही
1. बैंक स्टेटमेंट की जांच:
प्रार्थी के बैंक खातों की पूरी जानकारी ली गई और उन खातों में जमा हुई राशि के प्रवाह को ट्रैक किया गया।
2. साइबर क्राइम पोर्टल की मदद:
ठगी में शामिल मोबाइल नंबरों और बैंक खातों के बारे में तकनीकी जानकारी हासिल की गई।
3. दिल्ली और यूपी में जांच अभियान:
आरोपियों के दिल्ली और उत्तर प्रदेश में सक्रिय होने की पुष्टि होने पर विशेष टीम गठित की गई।
टीम ने 5 दिनों तक लगातार जांच की।
नोएडा, दिल्ली और आसपास के इलाकों में छापेमारी की गई।
कड़कड़ाती ठंड और देर रात तक टीम सक्रिय रही।
4. मुख्य सरगना की गिरफ्तारी:
नोएडा के सदरपुर कॉलोनी, सेक्टर 45 में कुलदीप सिंह को गिरफ्तार किया गया। उसने गिरोह के अन्य सदस्यों की जानकारी दी।
अपराधियों की गिरफ्तारी
तीनों आरोपी अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किए गए:
| क्रमांक | नाम | पता (स्थानीय और स्थायी) |
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| 1 | कुलदीप सिंह (42 वर्ष) | नोएडा और गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश |
| 2 | नितेश कुमार (34 वर्ष) | नोएडा और कन्नौज, उत्तर प्रदेश |
| 3 | शैलेष मिश्रा (36 वर्ष) | संगम विहार, दिल्ली, और सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश |
जांच में जुटाए गए सबूत
फर्जी दस्तावेज: फर्जी आधार कार्ड, चेकबुक, डायरी।
डिजिटल उपकरण: मोबाइल फोन और ठगी में उपयोग किए गए एटीएम कार्ड।
ठगी का लेखा-जोखा: डायरी में ठगी गई रकम और खर्च का विवरण।
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क्या करते थे आरोपी
1. डाटा खरीदना:
आरोपियों ने फर्जी कॉल सेंटर स्थापित किया था, जहां वे मोबाइल नंबर और ग्राहक डेटा खरीदते थे।
2. फर्जी दस्तावेज:
वे आधार कार्ड, सिम कार्ड, और बैंक खातों को फर्जी दस्तावेजों से तैयार करते थे।
3. झांसे का तरीका:
पीड़ितों को पॉलिसी के पैसे वापस दिलाने या लुभावने ऑफर्स के नाम पर ठगा जाता था।
4. रकम का ट्रांसफर:
ठगी से प्राप्त रकम को विभिन्न फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर कर एटीएम से निकाला जाता था।
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जब्त संपत्ति और अपराधियों का खुलासा
आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि:
कॉल सेंटर से प्राप्त डेटा के माध्यम से वे लोगों को फंसा लेते थे।
ठगी की रकम से संपत्तियों में निवेश किया गया।
बैंक खातों और एटीएम कार्ड का उपयोग पूरी योजना में किया गया।
आरोपियों से ठगी की रकम और उससे अर्जित संपत्तियों की जानकारी जुटाकर उन्हें जब्त करने की कार्रवाई की जा रही है।
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पुलिस की सतर्कता: प्रमुख योगदान
इस सफल कार्रवाई में शामिल अधिकारी:
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर): श्री राजेन्द्र जायसवाल।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ACCU): श्री अनुज गुप्ता।
सीएसपी कोतवाली: श्री अक्षय प्रमोद सबाद्रा।
रेंज साइबर थाना प्रभारी: निरीक्षक राजेश मिश्रा।
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बिलासपुर पुलिस की अपील: साइबर अपराध से बचाव के टिप्स
सतर्कता बरतें:
1. अनजान कॉल्स और व्हाट्सएप ग्रुप से बचें।
2. अनजान व्यक्तियों के साथ बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
3. लुभावने ऑफर्स (पैसा दोगुना करने आदि) के झांसे में न आएं।
4. फर्जी वेबसाइट और एप्स से दूरी बनाएं।
क्या करें:
1. साइबर अपराध होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क करें।
2. Cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज करें।



