मोदी के जन्मदिन पर कांग्रेस का बड़ा सियासी वार—‘सेवा संकल्प’ नहीं, बेरोजगारी, महंगाई और वादाखिलाफी दिवस मनाए भाजपा
बिलासपुर में कांग्रेस की पत्रकारवार्ता में मोदी सरकार के 12 साल से लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यकाल और छत्तीसगढ़ में ‘मोदी की गारंटी’ तक पर निशाना | 43 सवालों के जरिए भाजपा से मांगा जवाब
बिलासपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर जहां भारतीय जनता पार्टी देशभर में सेवा और समर्पण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित कर रही है, वहीं बिलासपुर में कांग्रेस ने इसी आयोजन को लेकर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। बिलासपुर शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सिधांशु मिश्रा और ग्रामीण कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री ने पत्रकारवार्ता में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और उनके लंबे राजनीतिक कार्यकाल को ‘सेवा और समर्पण’ के रूप में मनाया जाना जनता के साथ सबसे बड़ा राजनीतिक छलावा है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भाजपा यदि प्रधानमंत्री का जन्मदिन मनाना चाहती है तो उसे इसे ‘सेवा संकल्प दिवस’ के बजाय बेरोजगारी दिवस, महंगाई दिवस, वादाखिलाफी दिवस, किसान धोखा दिवस, नोटबंदी दिवस, जीएसटी दिवस और जुमला दिवस के रूप में मनाना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी का जन्मदिन 17 सितंबर को मनाया जाता है। 2026 में प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी उनके जन्मदिन पर प्रधानमंत्री के देशवासियों से मिले शुभकामना संदेशों के प्रति आभार व्यक्त करने की जानकारी दी है। कांग्रेस की पत्रकारवार्ता इसी राजनीतिक संदर्भ में केंद्र सरकार के कामकाज और भाजपा के दावों पर सवाल खड़े करने के तौर पर सामने आई।
‘सेवा नहीं, विवादों और असफलताओं से भरा कार्यकाल’—कांग्रेस
सिधांशु मिश्रा और महेंद्र गंगोत्री ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी का कार्यकाल विवादों और असफलताओं से भरा रहा है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक मोदी के कार्यकाल को ‘सेवा और समर्पण’ के रूप में प्रस्तुत करना जनता के साथ क्रूर मजाक है।
कांग्रेस ने अपने आरोपों के समर्थन में महंगाई, रोजगार, किसानों, नोटबंदी, जीएसटी, श्रमिकों, आदिवासी अधिकार, सार्वजनिक उपक्रमों, पेट्रोल-डीजल की कीमतों, रुपये की विनिमय दर, मणिपुर हिंसा और जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग जैसे मुद्दों को सामने रखा।
कांग्रेस के आरोपों में प्रमुख मुद्दे
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से किए गए कई वादे पूरे नहीं हुए। इनमें—
100 दिन में महंगाई कम करने का दावा।
हर साल दो करोड़ रोजगार देने का वादा।
हर घर तक नल और हर सिर पर छत का लक्ष्य।
काला धन वापस लाने का दावा।
विदेशों में जमा काले धन की वापसी।
प्रत्येक व्यक्ति के खाते में 15 लाख रुपये आने से जुड़ा राजनीतिक दावा।
किसानों की आय दोगुनी करने का वादा।
स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुरूप एमएसपी तय करने का मुद्दा।
गरीबी, बेरोजगारी और भुखमरी पर सवाल।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि इसके विपरीत देश में गरीबी, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता बढ़ी है।
नोटबंदी पर फिर हमला—‘काला धन कहां गया?’
कांग्रेस ने 2016 की नोटबंदी को मोदी सरकार की प्रमुख नीतिगत विफलताओं में गिनाते हुए कहा कि काले धन पर अंकुश लगाने के दावे के बावजूद विमुद्रीकृत मुद्रा का लगभग पूरा हिस्सा बैंकिंग प्रणाली में वापस आ गया।
RBI के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार नोटबंदी के बाद विमुद्रीकृत नोटों के बड़े हिस्से की वापसी बैंकिंग प्रणाली में हुई थी।
कांग्रेस ने कहा कि नोटबंदी से छोटे कारोबार और असंगठित क्षेत्र को नुकसान हुआ और सरकार को इस फैसले के वास्तविक परिणामों का जवाब देना चाहिए।
GST पर भी कांग्रेस का सवाल
कांग्रेस नेताओं ने जीएसटी के क्रियान्वयन को लेकर आरोप लगाया कि जटिल कर व्यवस्था और लगातार होने वाले बदलावों से छोटे और मध्यम कारोबारियों यानी MSME क्षेत्र को परेशानी हुई।
पत्रकारवार्ता में कांग्रेस ने जीएसटी को भी मोदी सरकार की उन प्रमुख नीतियों में शामिल किया जिन्हें लेकर वह जनता के बीच सवाल उठाना चाहती है।
किसानों से लेकर श्रमिकों तक—कांग्रेस ने खोला मोर्चा
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि किसानों की आय दोगुनी करने और एमएसपी को लेकर किए गए वादे पूरे नहीं हुए। साथ ही श्रमिक हितों से जुड़े पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर नए श्रम कानून लाने, वन अधिकार अधिनियम को कथित रूप से कमजोर करने और सार्वजनिक उपक्रमों एवं राष्ट्रीय संसाधनों के निजीकरण को लेकर भी सवाल उठाए गए।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सार्वजनिक संसाधनों और उपक्रमों को बड़े पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने की दिशा में इस्तेमाल किया गया।
इसी क्रम में कांग्रेस नेताओं ने ई-20 पेट्रोल को लेकर भी सवाल उठाते हुए इसे ‘मिलावट और मुनाफाखोरी’ से जोड़कर निशाना साधा।
मणिपुर पर सवाल—‘तीन साल से हिंसा, भाजपा चुप क्यों?’
पत्रकारवार्ता में मणिपुर का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि डबल इंजन सरकार के बावजूद मणिपुर लंबे समय से हिंसा और तनाव से जूझता रहा है और इस मुद्दे पर भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मणिपुर की स्थिति पर भाजपा की ओर से पर्याप्त राजनीतिक जवाबदेही सामने नहीं आई।
पेट्रोल-डीजल पर कांग्रेस का बड़ा दावा
कांग्रेस नेताओं ने पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में वृद्धि का मुद्दा उठाते हुए कहा कि 2014 में डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क लगभग 3.56 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल पर लगभग 9.48 रुपये प्रति लीटर था, जिसे मोदी सरकार के दौरान कई गुना बढ़ाया गया।
उन्होंने दावा किया कि पेट्रोल-डीजल से केंद्र ने 38 लाख करोड़ रुपये से अधिक और केंद्र-राज्य करों को मिलाकर 74 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की।
हालांकि वर्तमान केंद्रीय पेट्रोलियम कर संरचना में पेट्रोल-डीजल पर अलग-अलग घटकों—बेसिक एक्साइज, अतिरिक्त एक्साइज, AIDC और रोड/इंफ्रास्ट्रक्चर सेस—का समावेश है और दरों में समय-समय पर बदलाव हुआ है। PPAC की 2026 की मौजूदा तालिका इन अलग-अलग घटकों को दर्ज करती है।
रुपये की गिरावट भी कांग्रेस के निशाने पर
कांग्रेस नेताओं ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती विनिमय दर को मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों से जोड़ते हुए दावा किया कि 2014 में डॉलर लगभग 58-59 रुपये के स्तर पर था, जो अब 96-97 रुपये तक पहुंच गया है।
उन्होंने कहा कि रुपये की कमजोरी से आयात महंगा हुआ है और व्यापार संतुलन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यकाल को लेकर भी हमला
पत्रकारवार्ता में कांग्रेस नेताओं ने नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौर को भी राजनीतिक बहस के केंद्र में रखा। उन्होंने गुजरात में 2002 के गोधरा कांड के बाद हुए दंगों, बेस्ट बेकरी मामले और उस दौर की हिंसा को लेकर तत्कालीन राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी के कार्यकाल से जुड़े विवादों को देश कभी नहीं भूल सकता।
उन्होंने तत्कालीन गुजरात सरकार के मंत्रियों से जुड़े न्यायिक मामलों का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि मोदी के मुख्यमंत्री कार्यकाल में उनकी सरकार के कुछ मंत्रियों पर दंगों एवं हिंसा से जुड़े गंभीर आरोप लगे।
कोविड प्रबंधन और संवैधानिक संस्थाओं पर भी निशाना
कांग्रेस ने कोरोना महामारी के दौरान केंद्र सरकार के प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि कोविड काल में बड़ी संख्या में लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और गंगा में शव मिलने की घटनाओं ने देश को झकझोर दिया।
इसके साथ ही कांग्रेस नेताओं ने संवैधानिक संस्थाओं और जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने प्रचार अभियानों के जरिए वास्तविक सवालों को ढकने की कोशिश की।
छत्तीसगढ़ में ‘मोदी की गारंटी’ पर कांग्रेस का हमला
कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार को भी निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ की जनता से विधानसभा चुनाव के दौरान ‘मोदी की गारंटी’ के नाम पर किए गए कई वादे पूरे नहीं हुए।

कांग्रेस के अनुसार प्रमुख सवाल इस प्रकार हैं—
1. एक लाख सरकारी नौकरियां
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि एक लाख सरकारी नौकरी देने का वादा पूरा नहीं हुआ।
2. 500 रुपये में गैस सिलेंडर
कांग्रेस ने कहा कि 500 रुपये में रसोई गैस देने की गारंटी का वादा ढाई साल बाद भी पूरा नहीं किया गया।
3. अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अनियमित कर्मचारियों को 100 दिन के भीतर नियमित करने का वादा किया गया था, लेकिन नियमितीकरण नहीं हुआ।
4. महतारी वंदन
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रत्येक विवाहित महिला को बिना भेदभाव महतारी वंदन योजना का लाभ देने की बात कही गई थी, लेकिन इसका लाभ सभी महिलाओं को नहीं मिल रहा।
5. धान का 3100 रुपये भुगतान
कांग्रेस ने कहा कि प्रत्येक गांव में 3100 रुपये प्रति क्विंटल के एकमुश्त नगद भुगतान केंद्र खोलने का वादा किया गया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
6. बेरोजगारी भत्ता
छात्रों और बेरोजगार युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने के वादे पर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए।
7. छात्रों के लिए फ्री परिवहन पास
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि छात्रों को मुफ्त परिवहन पास देने का वादा भी पूरा नहीं किया गया।
8. बिजली बिल हाफ योजना
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ करने की योजना को बंद कर दिया गया, जबकि इसे जारी रखने का वादा किया गया था।
9. गौ सेवा और गोठान
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि गौ सेवा का संकल्प लेने के बाद गोठान योजना बंद कर दी गई और सरकार के कार्यकाल का बड़ा हिस्सा बीतने के बावजूद ‘मोदी की गारंटी’ के अनेक वादे पूरे नहीं हुए।
‘मोदी जी जवाब दें’—कांग्रेस ने एक साथ दागे 43 सवाल
पत्रकारवार्ता में कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के सामने 43 सवाल रखे। इन सवालों में अर्थव्यवस्था, महंगाई, रोजगार, किसान, नोटबंदी, कश्मीर, शिक्षा, स्वास्थ्य, मीडिया, भ्रष्टाचार, विदेश नीति, महिला सुरक्षा और सरकारी संपत्तियों से जुड़े मुद्दे शामिल रहे।
1. अच्छे दिन कब आएंगे?
2. किसके खाते में 15 लाख रुपये जमा किए गए?
3. महंगाई कब कम होगी?
4. पेट्रोल-डीजल के दाम कब कम होंगे?
5. दो करोड़ बेरोजगारों को रोजगार दिया गया क्या?
6. चीन को लाल आंख कब दिखाएंगे?
7. नोटबंदी से जनता और सरकार को क्या मिला?
8. धारा 370 हटने के बाद कश्मीर में कितने लोगों ने प्लॉट खरीदे और कितनी कंपनियों ने प्लांट लगाए?
9. किसानों की आय दोगुनी हुई क्या?
10. बेटियां सुरक्षित क्यों नहीं हैं?
11. शिक्षा संस्थानों की हालत खस्ता क्यों है?
12. जीएसटी से व्यापारियों और सरकार ने क्या पाया और क्या खोया?
13. 100 स्मार्ट सिटी का वादा था, कितने स्मार्ट सिटी बने?
14. सांसदों द्वारा गोद लिए गए गांवों में से कितने गांवों का विकास हुआ और कितने गांव अभी भी विकास की प्रतीक्षा में हैं?
15. स्वतंत्र आवाज उठाने वाले मीडिया को क्यों दबाया जा रहा है?
16. सरकारी संपत्तियों को बेचकर कब तक देश चलाया जाएगा?
17. सरकार ने देश में कितने नए सरकारी अस्पताल खोले?
18. सरकार ने कितने नए बांध बनाए?
19. पुलवामा में सेना के जवानों की हत्या का जिम्मेदार कौन है?
20. जनधन योजना के तहत खोले गए कितने खाते अभी भी सक्रिय हैं?
21. बिजनेस समिट में हुए कितने एमओयू वास्तव में लागू हुए और कितने रद्द हुए?
22. कितनी विदेशी कंपनियों ने भारत में कितना निवेश किया और उनमें कितने भारतीय स्थानीय लोगों को रोजगार मिला?
23. केंद्रीय मंत्रिमंडल के कितने मंत्रियों के बच्चे भारत के सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं?
24. स्वच्छ भारत अभियान में करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन कितने शहर वास्तव में स्वच्छ हुए?
25. भारत भुखमरी के मामले में लगातार निचले स्तर पर क्यों जा रहा है?
26. बोलने की आजादी के मामले में भारत क्यों पिछड़ रहा है?
27. पिछले वर्षों में ‘गोदी मीडिया’ की तादाद क्यों बढ़ी? इसका जिम्मेदार कौन है?
28. पिछले वर्षों में ईडी और आयकर विभाग की कितनी रेड भाजपा नेताओं के खिलाफ पड़ीं?
29. 2014 से पहले जिन भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई की फाइलें होने की बात कही जाती थी, उनमें से कितने कांग्रेस नेताओं पर कार्रवाई हुई और कितनों को जेल भेजा गया?
30. क्या सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार पूरी तरह खत्म हो चुका है?
31. ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा दिया गया, लेकिन आज बेटियां भाजपा नेताओं से जुड़े मामलों में प्रताड़ना के आरोप लगाते हुए दिल्ली में धरना देने को मजबूर क्यों हो रही हैं?
32. नोटबंदी के बाद आतंकवाद खत्म होने की बात कही गई थी, क्या ऐसा हुआ? क्या कश्मीर में भारतीय जवान शहीद नहीं हो रहे?
33. ‘मां गंगा ने आपको बुलाया’ कहा गया था। गंगा सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च हुए, लेकिन क्या गंगा की सफाई पूरी तरह हो गई?
34. 2022 तक हर बेघर को अपना घर देने का वादा था, यह वादा कितना पूरा हुआ?
35. सरकार ने कितने एयरपोर्ट बनाए? अगर बनाए तो एयर इंडिया को बेचने की जरूरत क्यों पड़ी?
36. नोटबंदी के दौरान कितने भाजपा नेता नोट बदलने के लिए लाइन में खड़े हुए? कितनों के पास आय से अधिक काला धन मिला?
37. विदेशों में जमा काला धन कितने भारतीयों का है, किसका है और उसे वापस कब लाया जाएगा?
38. प्रधानमंत्री की प्रत्येक विदेश यात्रा पर कितना खर्च हुआ?
39. उज्ज्वला योजना के तहत कितने लाभार्थियों को मुफ्त सिलेंडर मिला और उनमें से कितने लोगों ने बाद में अपने पैसे से रिफिल कराया?
40. पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य बताया गया था, आज अर्थव्यवस्था की स्थिति क्या है?
41. 2000 रुपये का नोट सरकार ने ही जारी किया था, फिर कम समय में इसे वापस लेने का फैसला क्यों करना पड़ा? RBI के रिकॉर्ड के अनुसार 19 मई 2023 को 2000 रुपये के नोटों का प्रचलन मूल्य 3.56 लाख करोड़ रुपये था और बाद में उसका अधिकांश हिस्सा बैंकिंग प्रणाली में लौट गया।
42. डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति क्या है?
43. कितने कश्मीरी पंडित विस्थापित हुए?
‘मोदी की उपलब्धि महंगाई, बेरोजगारी और असमानता बढ़ाना’—कांग्रेस
पत्रकारवार्ता के अंत में कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक कार्यकाल को लेकर कहा कि यदि भाजपा उनके जन्मदिन को उनकी उपलब्धियों के आधार पर मनाना चाहती है तो कांग्रेस की नजर में इन वर्षों की प्रमुख उपलब्धियों में महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी, भुखमरी और असमानता में वृद्धि शामिल है।
कांग्रेस नेताओं ने किसानों से जुड़े वादों, नोटबंदी और जीएसटी को भी मोदी सरकार की नीतियों के केंद्र में रखा और कहा कि इन्हीं मुद्दों पर भाजपा को जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के कार्यकाल की दो प्रमुख नीतियां नोटबंदी और जीएसटी रहीं और इनके प्रभाव को लेकर देश में लगातार राजनीतिक बहस जारी है।
पत्रकारवार्ता में कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के जन्मदिन को लेकर अपने राजनीतिक अभियान का पूरा फोकस ‘सेवा और समर्पण’ बनाम ‘वादों और नतीजों’ की बहस पर रखा और केंद्र तथा छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार के सामने महंगाई, रोजगार, किसान, महिला सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था, नोटबंदी, जीएसटी और ‘मोदी की गारंटी’ से जुड़े सवालों की लंबी फेहरिस्त रखी।



