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सिम्स में अब जोड़ की जटिल सर्जरी होगी आसान, दो सप्ताह में शुरू होगी आर्थ्रोस्कोपी सुविधा

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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स्वतंत्रता दिवस पर अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति की बड़ी घोषणा,वीघुटने, कंधे, कूल्हे, टखने और कलाई की सर्जरी में मिलेगी आधुनिक सुविधा | हर महीने 8-10 मरीजों को पड़ती है आर्थ्रोस्कोपी की जरूरत
बिलासपुर। 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर ने संभाग के मरीजों के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुविधा की घोषणा की है। सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने ऐलान किया कि अस्पताल में दो सप्ताह के भीतर दूरबीन से जोड़ की सर्जरी यानी आर्थ्रोस्कोपी की सुविधा शुरू कर दी जाएगी। नई सुविधा शुरू होने के बाद घुटने, कंधे, कूल्हे, टखने और कलाई जैसे प्रमुख जोड़ों की जटिल सर्जरी सरकारी अस्पताल में ही आधुनिक तकनीक से की जा सकेगी।
इस सुविधा का सबसे बड़ा फायदा उन मरीजों को मिलेगा, जिन्हें जोड़ की समस्या के लिए अब तक आर्थ्रोस्कोपी सुविधा वाले निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता था। सिम्स के हड्डी रोग विभाग में हर महीने लगभग 8 से 10 मरीज ऐसे पहुंचते हैं, जिनके उपचार के लिए आर्थ्रोस्कोपी मशीन की जरूरत होती है। मशीन उपलब्ध होने के बाद इन मरीजों को उपचार के लिए बाहर जाने की आवश्यकता नहीं होगी।
छोटे छेद से जोड़ के अंदर पहुंचेगा कैमरा और उपकरण
आर्थ्रोस्कोपी आधुनिक दूरबीन आधारित शल्य तकनीक है। इसमें बड़े चीरे के बजाय जोड़ के आसपास छोटे छिद्र बनाए जाते हैं। इन्हीं छिद्रों के माध्यम से कैमरा और विशेष सर्जिकल उपकरण जोड़ के भीतर पहुंचाए जाते हैं। कैमरे से जोड़ के अंदर की स्थिति हाई-डेफिनिशन मॉनिटर पर स्पष्ट दिखाई देती है।
इस तकनीक की मदद से डॉक्टर लिगामेंट, मेनिस्कस और कार्टिलेज में हुई क्षति की पहचान कर उसका सटीक उपचार कर सकते हैं। परंपरागत बड़ी सर्जरी की तुलना में इसमें चीरा छोटा होने के कारण दर्द और रक्तस्राव कम होने, संक्रमण का खतरा घटने तथा मरीज के अपेक्षाकृत तेजी से रिकवर होने की संभावना रहती है।
सरकारी अस्पताल में मिलेगी आधुनिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी
सिम्स में आर्थ्रोस्कोपी सुविधा शुरू होना बिलासपुर संभाग के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब तक जिन मरीजों को जोड़ की ऐसी सर्जरी के लिए निजी अस्पतालों या दूसरे बड़े चिकित्सा केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ता था, उन्हें सिम्स में ही आधुनिक उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
विशेष रूप से घुटने और कंधे की चोट, लिगामेंट संबंधी समस्या, मेनिस्कस की क्षति तथा कार्टिलेज से जुड़ी जटिलताओं में आर्थ्रोस्कोपी उपयोगी तकनीक है। नई मशीन उपलब्ध होने के बाद हड्डी रोग विभाग में इस तरह के मरीजों के उपचार का दायरा भी बढ़ेगा।
स्वतंत्रता दिवस समारोह में ध्वजारोहण, राष्ट्र निर्माण का संकल्प
सिम्स परिसर में स्वतंत्रता दिवस समारोह गरिमामय माहौल में आयोजित किया गया। अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने ध्वजारोहण कर राष्ट्रध्वज को सलामी दी। उन्होंने मां भारती के वीर सपूतों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर उन्होंने चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, विद्यार्थियों, सुरक्षा कर्मियों, सफाई कर्मचारियों और प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सभी से संविधान के आदर्शों के अनुरूप सेवा करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
ये रहे मौजूद
समारोह में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह, सिम्स नोडल अधिकारी डॉ. भूपेंद्र कश्यप, डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. हेमलता सिंह, डॉ. आरती पांडेय, डॉ. चंद्रहास ध्रुव, डॉ. समीर पैकरा, डॉ. केशव कश्यप, डॉ. प्रकाश खरे, डॉ. आशुतोष कोरी और डॉ. अमित ठाकुर उपस्थित रहे।
इसके अलावा नर्सिंग अधीक्षक स्वाति कुमार, उज्ज्वला दास, सरिता बहादुर, पिंकी दास, पुष्प लता शर्मा, गरिमा पाण्डेय और उत्कर्ष शर्मा सहित सुरक्षा अधिकारी कमलेश दीवान, दिनेश निर्मलकर, जितेन दुबे, दिलीप यादव, संतोष चंद्र सेन, टीकाराम मतवाले, मो इकबाल, आशुतोष शर्मा, शैलेंद्र सिंह रावत, वेद प्रकाश सोनी, रवि क्षत्रिय, दुष्यंत राय, सुरेश साहू और प्रमोद यादव मौजूद रहे।
समारोह में सिम्स के बड़ी संख्या में चिकित्सक, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं शामिल हुए।

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