बिलासपुर |
छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक आज बिलासपुर में होने जा रही है, लेकिन बैठक शुरू होने से पहले ही चेंबर के भीतर घमासान मच गया है। बिलासपुर में पहली बार प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक आयोजित होने के बावजूद बिलासपुर संभाग के कार्यकारी अध्यक्ष कमल सोनी ने शनिवार देर रात अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके साथ जिला कार्यकारी अध्यक्ष श्रीकांत पांडेय के भी पद छोड़ने की खबर है। इस्तीफे की वजह को लेकर चेंबर के भीतर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
कमल सोनी ने चेंबर की मौजूदा कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि संगठन की गतिविधियां रायपुर और आसपास के क्षेत्रों तक सीमित होती जा रही हैं। उनका कहना है कि प्रदेश के दूसरे जिलों और संभागों के व्यापारियों तथा उद्योगों से जुड़े मुद्दों को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिल रही है।
दूसरी ओर प्रदेशाध्यक्ष सतीश थोरानी ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्हें कमल सोनी का इस्तीफा प्राप्त ही नहीं हुआ है और संगठन में किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जा रहा है। संविधान संशोधन के मुद्दे पर भी दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग सामने आए हैं।
बैठक से पहले इस्तीफे ने बढ़ाया विवाद
प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक रविवार सुबह 11 बजे तिफरा स्थित होटल ग्रैंड लोटस में प्रस्तावित है। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि चेंबर की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक पहली बार रायपुर से बाहर बिलासपुर में हो रही है।
लेकिन बैठक से ठीक पहले संभाग और जिला स्तर के पदाधिकारियों के इस्तीफे ने माहौल गरमा दिया है। कमल सोनी ने संगठन के संविधान, नेतृत्व में क्षेत्रीय संतुलन और बिलासपुर की कथित उपेक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं।
उनका आरोप है कि संगठन में महत्वपूर्ण पदों को लेकर ऐसी व्यवस्था बनी हुई है, जिससे रायपुर और नया रायपुर क्षेत्र को ज्यादा अवसर मिलता है और प्रदेश के दूसरे क्षेत्रों के व्यापारी नेतृत्व की दौड़ में पीछे रह जाते हैं।
धारा-15 पर सबसे बड़ा विवाद
घमासान का सबसे बड़ा मुद्दा चेंबर के संविधान की धारा-15 को लेकर है। कमल सोनी का कहना है कि इस धारा में अध्यक्ष, महामंत्री और कोषाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए रायपुर एवं नया रायपुर क्षेत्र से पात्रता का प्रावधान दूसरे क्षेत्रों के व्यापारियों के लिए असमान स्थिति पैदा करता है।
सोनी का आरोप है कि संविधान में बदलाव, संतुलित नेतृत्व और सभी संभागों को समान प्रतिनिधित्व देने के मुद्दे को 9 अगस्त की बैठक के एजेंडे से हटा दिया गया।
वहीं प्रदेशाध्यक्ष सतीश थोरानी का कहना है कि संविधान संशोधन से संबंधित कोई ड्राफ्ट उन्हें मिला ही नहीं। उनके मुताबिक सोनी को संशोधन का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए कहा गया था, लेकिन अब तक वह ड्राफ्ट प्राप्त नहीं हुआ है।
थोरानी का यह भी कहना है कि संविधान संशोधन कोई निजी या केवल कार्यकारिणी स्तर का विषय नहीं है। इस पर आमसभा में चर्चा होती है और निर्णय सर्वसम्मति से लिया जाता है।
यानी धारा-15 को लेकर दोनों पक्षों की तस्वीर बिल्कुल अलग है—एक तरफ इसे एजेंडे से हटाए जाने का आरोप है, तो दूसरी तरफ ड्राफ्ट ही नहीं मिलने की बात कही जा रही है।
रायपुर तक सीमित है चेंबर? आरोप ने बढ़ाई हलचल
कमल सोनी ने संगठन पर सीधे आरोप लगाया है कि चेंबर की गतिविधियों और प्राथमिकताओं में रायपुर एवं आसपास के क्षेत्रों का प्रभाव अधिक दिखाई देता है।
उनका कहना है कि रायपुर, भिलाई, दुर्ग और आसपास के क्षेत्रों से जुड़े विषय संगठन के माध्यम से शासन-प्रशासन तक अपेक्षाकृत तेजी से पहुंचते हैं, जबकि बिलासपुर सहित अन्य जिलों की मांगों को उसी स्तर पर सामने नहीं लाया जा रहा।
प्रदेशाध्यक्ष सतीश थोरानी ने इस आरोप को भी खारिज किया है। उनका कहना है कि रायपुर और आसपास के क्षेत्र में व्यापारियों की संख्या अधिक होने के कारण वहां से समस्याएं ज्यादा संख्या में सामने आती हैं। इसे भेदभाव के रूप में नहीं देखा जा सकता।
बिलासपुर को स्टेट कैपिटल रीजन में शामिल करने का मुद्दा भी गरमाया
विवाद सिर्फ चेंबर के संविधान तक सीमित नहीं है। बिलासपुर को स्टेट कैपिटल रीजन यानी एससीआर में शामिल करने का मुद्दा भी आरोप-प्रत्यारोप के केंद्र में आ गया है।
कमल सोनी का कहना है कि रायपुर, भिलाई, दुर्ग और आसपास के क्षेत्रों को एससीआर में शामिल किया गया है, लेकिन बिलासपुर को लेकर चेंबर की ओर से अपेक्षित पहल नहीं की गई।
वहीं सतीश थोरानी का कहना है कि बिलासपुर को एससीआर में शामिल करने के संबंध में उद्यमियों की ओर से चेंबर को कोई लिखित प्रस्ताव ही नहीं मिला। ऐसे में पहल नहीं करने का आरोप उचित नहीं है।
संसाधनों से समृद्ध बिलासपुर, फिर भी इंडस्ट्रियल पार्क का मुद्दा क्यों नहीं उठा?
कमल सोनी ने बिलासपुर के औद्योगिक विकास को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बिलासपुर के पास बिजली, कोयला, रेलवे, लाइमस्टोन, पानी और हाईकोर्ट जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं एवं संसाधन मौजूद हैं। इसके बावजूद यहां इंडस्ट्रियल पार्क की मांग को शासन स्तर तक प्रभावी तरीके से नहीं पहुंचाया गया।
चेंबर अध्यक्ष सतीश थोरानी का जवाब है कि बिलासपुर में इंडस्ट्रियल पार्क को लेकर संगठन के पास कोई मांग पत्र नहीं आया है। यदि औपचारिक मांग आती है तो उस पर सरकार से चर्चा की जाएगी।
आज बैठक में क्या होगा, सबकी नजरें बिलासपुर पर
प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक आज सुबह 11 बजे तिफरा के होटल ग्रैंड लोटस में होगी। बैठक से पहले ही जिस तरह संभाग अध्यक्ष के इस्तीफे, संविधान की धारा-15, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, एससीआर और औद्योगिक विकास को लेकर सवाल उठे हैं, उससे अब सबकी नजरें बिलासपुर की बैठक पर टिक गई हैं।
पहली बार रायपुर से बाहर प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक और उसी से पहले बिलासपुर के पदाधिकारियों के इस्तीफे ने चेंबर की आंतरिक राजनीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक ओर कमल सोनी संगठन में क्षेत्रीय असंतुलन और बिलासपुर की उपेक्षा का सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रदेशाध्यक्ष सतीश थोरानी इन आरोपों को गलत बताते हुए संगठन की प्रक्रिया और नियमों का हवाला दे रहे हैं।
अब देखना यह है कि रविवार की बैठक में यह विवाद किस रूप में सामने आता है और धारा-15, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व तथा बिलासपुर के औद्योगिक विकास से जुड़े सवालों पर प्रदेश कार्यकारिणी के भीतर क्या चर्चा होती है।



