जर्जर सड़कों, जलभराव और अधूरे निर्माण पर भी नाराजगी; बरतोरी-मोहतरा सड़क की जांच के आदेश, दोषी मिले तो बिजली अफसरों पर कार्रवाई
बिलासपुर, 8 अगस्त 2026। न्यायधानी में शनिवार को विकास कार्यों की समीक्षा के लिए बुलाई गई बैठक में प्रशासनिक व्यवस्था की कई तस्वीरें एक साथ सामने आईं। कहीं नई बनी सड़क के बीच बिजली का खंभा खड़ा मिला, कहीं जलभराव से शहर की व्यवस्था सवालों में रही तो कहीं पुराने निर्माण अब तक अधूरे पड़े हैं। इसी बीच डिप्टी सीएम एवं बिलासपुर जिले के प्रभारी मंत्री अरुण साव की समीक्षा बैठक से चार प्रमुख अधिकारी गायब थे।




कलेक्ट्रेट के मंथन सभाकक्ष में हुई बैठक में अधिकारियों के कामकाज की समीक्षा के दौरान जब बिल्हा, कोटा और तखतपुर जनपद पंचायतों के सीईओ तथा रतनपुर नगर पालिका के सीएमओ की मौजूदगी नहीं मिली तो डिप्टी सीएम ने नाराजगी जताई। उन्होंने चारों अधिकारियों को शो-कॉज नोटिस जारी कर जवाब तलब करने के निर्देश दिए।
बैठक में सड़क, बिजली, जल जीवन मिशन, जलभराव, स्वास्थ्य, कृषि, ग्रामीण विकास, नगरीय विकास और पुराने निर्माण कार्यों की स्थिति पर सवाल-जवाब हुए। डिप्टी सीएम ने अधिकारियों को मैदानी स्तर पर योजनाओं की निगरानी करने और विकास कार्यों में तेजी के साथ गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
‘समीक्षा बैठक से बड़ा कौन सा फोरम?’
चार अधिकारियों के बैठक में मौजूद नहीं होने पर डिप्टी सीएम अरुण साव ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएम की समीक्षा बैठक से बड़ा कौन सा फोरम है? चारों अधिकारियों को नोटिस जारी कर यह पूछा जाए कि वे किस शासकीय कार्य में व्यस्त थे।
बैठक से अनुपस्थित अधिकारियों में बिल्हा, कोटा और तखतपुर जनपद पंचायत के सीईओ तथा रतनपुर नगरपालिका के सीएमओ शामिल हैं।
सड़क के बीच बिजली का खंभा देखकर भड़के
बैठक में बिल्हा के बरतोरी-मोहतरा मार्ग का मामला सामने आते ही डिप्टी सीएम ने नाराजगी जताई। हाल ही में नवीनीकृत सड़क के बीच बिजली के खंभे खड़े किए जाने को उन्होंने गंभीरता से लिया।
उन्होंने जिला पंचायत सीईओ को मौके का निरीक्षण कर पूरे मामले की जांच करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। जांच में जिम्मेदार अधिकारी दोषी पाए जाने पर बिजली विभाग के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई।
यह मामला सड़क निर्माण और विभागों के बीच समन्वय पर भी सवाल खड़े करता है कि सड़क बनने के बाद उसके बीच बिजली के खंभे कैसे खड़े रह गए।
जलभराव पर दो टूक- अगली बारिश से पहले तैयारी
बिलासपुर शहर में बारिश के दौरान सामने आई जलभराव की स्थिति पर भी डिप्टी सीएम ने अधिकारियों से जवाब लिया। उन्होंने कहा कि पहली बारिश में शहर में जलभराव की स्थिति सामने आई है। आने वाले वर्षों में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए अभी से स्थायी कार्ययोजना तैयार की जाए।
उन्होंने बारिश के कारण सड़कों पर बने गड्ढों और क्षतिग्रस्त हिस्सों को लेकर भी तैयारी रखने को कहा, ताकि बारिश खत्म होते ही मरम्मत और सुधार का काम शुरू किया जा सके।
निर्माण विभागों की अलग से बैठक लेकर कार्यों की विस्तृत समीक्षा करने की बात भी कही गई।
‘पैसों की कमी नहीं, बारिश खत्म होते ही काम दिखना चाहिए’
विकास कार्यों में देरी पर डिप्टी सीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि विकास के लिए पैसों की कमी नहीं है। प्रक्रियाएं समय पर पूरी करने और संबंधित अमले तथा ठेकेदारों के साथ समन्वय बनाकर काम को गति देने की बात कही गई।
निर्माण कार्यों में पुराने तरीके से काम करने के बजाय भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर दूरगामी कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया गया। समय और पैसे का बेहतर उपयोग करने तथा काम की गुणवत्ता बनाए रखने को लेकर भी समीक्षा हुई।
बिजली विभाग पर भी सवाल
बिजली व्यवस्था को लेकर भी बैठक में सख्ती दिखाई गई। डिप्टी सीएम ने कहा कि बिजली की समस्या पूरे प्रदेश में बड़ी समस्या बनकर सामने आई है। केवल ट्रांसफार्मर या लाइन की खराबी ठीक करके जिम्मेदारी पूरी मानने के बजाय ऐसी ठोस कार्ययोजना बनाई जाए जिससे बार-बार वही समस्या सामने न आए।
संसदीय कार्यकाल के कामों पर भी नाराजगी
समीक्षा के दौरान डिप्टी सीएम ने अपने संसदीय कार्यकाल में स्वीकृत कराए गए निर्माण कार्यों की स्थिति पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उनके संसदीय कार्यकाल में जिन कामों को मंजूरी मिली थी, उनमें कई अब तक पूरे नहीं हुए हैं और जो काम हुए हैं, उनमें गुणवत्ता को लेकर भी शिकायतें हैं।
उन्होंने ऐसे कार्यों की स्थिति सुधारने और लंबित कामों को गति देने पर जोर दिया।
जल जीवन मिशन: 804 में 310 योजनाएं पूरी
जल जीवन मिशन की समीक्षा में बताया गया कि जिले में 804 सिंगल विलेज योजनाओं में से 310 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं। इनमें से 219 योजनाएं ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित की जा चुकी हैं।
बैठक में योजनाओं के लगातार संचालन और रखरखाव पर भी चर्चा हुई। इसके लिए जनभागीदारी से जल अर्पण अभियान चलाने पर जोर दिया गया। जिले में वाटर रिचार्जिंग के लिए जनभागीदारी से किए गए प्रयासों की भी सराहना की गई।
मल्हार-रतनपुर के लिए बनेगा मास्टर प्लान
ऐतिहासिक नगरी मल्हार और रतनपुर के समन्वित एवं सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए गए। दोनों ऐतिहासिक स्थलों की विरासत, पर्यटन संभावनाओं और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए समग्र विकास की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
नगरीय विकास की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना, अधोसंरचना विकास और साफ-सफाई के कार्यों में तेजी लाने को कहा गया।
बिलासपुर में आईएसडीपी योजना के तहत बने आवासों की आवश्यक मरम्मत कराकर पात्र गरीब परिवारों को जल्द आवंटित करने के निर्देश भी दिए गए।
मौसमी बीमारी पर गांव-गांव निगरानी
मलेरिया सहित मौसमी बीमारियों की स्थिति की भी समीक्षा हुई। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि कोटा विकासखंड में अब तक मलेरिया के 48 मरीज मिले हैं। इनमें 6 मरीज उपचाररत हैं, जबकि बाकी मरीज स्वस्थ हो चुके हैं।
प्रभारी मंत्री ने गांव स्तर तक लगातार निगरानी रखने और मितानिन स्तर तक जरूरी एवं मूलभूत दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा।
प्रभावित क्षेत्रों में रोटरी क्लब के सहयोग से 1500 मच्छरदानियां वितरित की जा रही हैं।
खाद-बीज की स्थिति पर भी समीक्षा
कृषि विभाग ने बताया कि जिले में पर्याप्त बारिश होने से फसलों की स्थिति अच्छी है। बांधों में भी पर्याप्त जलभराव है। समितियों में लगभग 300 क्विंटल बीज और 10 हजार मीट्रिक टन डीएपी, यूरिया सहित अन्य उर्वरक उपलब्ध हैं।
धान खरीदी के लिए किसानों का एग्रीस्टैक पोर्टल में पंजीयन जरूरी बताया गया। अधिकारियों को गांव-गांव शिविर लगाकर किसानों का पंजीयन कराने को कहा गया, ताकि पंजीयन के अभाव में कोई किसान धान बेचने से वंचित न रहे।
वीबी-जी रामजी योजना में स्थानीय जरूरतों पर जोर
जिला पंचायत की योजनाओं की समीक्षा में वीबी-जी रामजी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया। योजना के तहत स्थानीय जरूरतों और फील्ड की वास्तविक स्थिति के आधार पर काम स्वीकृत करने की बात कही गई।
इसमें मुक्तिधाम, शौचालय, स्कूलों की मरम्मत, जल संरक्षण और छोटे बांध जैसे स्थानीय आवश्यकता से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने की बात कही गई।
गांवों में जल संरक्षण को लेकर सकारात्मक वातावरण बनाने और पानी बचाने के लिए जनभागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
महिला जनप्रतिनिधियों ने कहा- अफसर नहीं सुनते
बैठक से जुड़े राजनीतिक और प्रशासनिक विमर्श के बीच महिला जनप्रतिनिधियों की ओर से यह मुद्दा भी सामने आया कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते। मीडिया से बातचीत में महिला जनप्रतिनिधियों ने अफसरों की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
इससे समीक्षा बैठक में उठे प्रशासनिक समन्वय और मैदानी स्तर पर जनप्रतिनिधियों की सुनवाई के मुद्दे को भी अलग आयाम मिला।
जीवनदीप और आयुष समिति की बैठक भी हुई
समीक्षा बैठक के बाद जिला अस्पताल की जीवनदीप समिति तथा शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय की आयुष समिति की बैठक आयोजित की गई। इन बैठकों में अस्पताल और महाविद्यालय की आवश्यक सुविधाओं तथा विकास कार्यों से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा हुई और कई प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।
बैठक में ये प्रमुख चेहरे रहे मौजूद
बैठक में विधायक धरमलाल कौशिक, धर्मजीत सिंह, सुशांत शुक्ला और दिलीप लहरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, महापौर श्रीमती पूजा विधानी, कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह, नगर निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे, जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल सहित सभी जनपद पंचायतों एवं नगरीय निकायों के अध्यक्ष और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव द्वारा दिए गए निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया।



