महतारी दुलार योजना के विद्यार्थियों को टीसी और रिजल्ट नहीं मिलने का आरोप, कॉलेज प्रवेश अटकने से आक्रोश; जल्द समाधान नहीं हुआ तो उग्र आंदोलन की चेतावनी
बिलासपुर। कोरोना महामारी में अपने माता-पिता को खो चुके बच्चों के लिए शुरू की गई महतारी दुलार योजना अब बिलासपुर में सियासी और छात्र राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गई है। योजना के तहत 12वीं तक निशुल्क शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को कथित रूप से स्कूलों द्वारा ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) और 12वीं का परीक्षा परिणाम नहीं दिए जाने के आरोपों के बीच गुरुवार को एनएसयूआई सड़क पर उतर आई। संगठन ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का पुतला दहन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
एनएसयूआई का आरोप है कि कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से तत्कालीन सरकार ने महतारी दुलार योजना लागू की थी, जिसके तहत इन बच्चों को 12वीं तक निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई गई। अब जब ये विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए कॉलेजों में प्रवेश लेने की तैयारी कर रहे हैं, तब कई निजी स्कूल उन्हें टीसी और परीक्षा परिणाम देने से इंकार कर रहे हैं।
संगठन का कहना है कि टीसी और रिजल्ट नहीं मिलने से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों का कॉलेजों में प्रवेश अटक गया है। प्रवेश की समय-सीमा नजदीक होने के कारण विद्यार्थी और उनके परिजन मानसिक तनाव में हैं। एनएसयूआई ने आरोप लगाया कि बिलासपुर जिले में कई विद्यार्थी इस समस्या से प्रभावित हैं, लेकिन अब तक शिक्षा विभाग ने कोई प्रभावी पहल नहीं की है।
इसी मुद्दे को लेकर एनएसयूआई कार्यकर्ता शहर में एकत्र हुए और विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का पुतला दहन किया गया। कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मांग की कि महतारी दुलार योजना के सभी पात्र विद्यार्थियों को तत्काल टीसी और परीक्षा परिणाम उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनका शैक्षणिक भविष्य प्रभावित न हो।
एनएसयूआई पदाधिकारियों ने कहा कि यदि विद्यार्थियों की समस्या का तत्काल समाधान नहीं किया गया तो संगठन चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा और विरोध प्रदर्शन को और व्यापक बनाया जाएगा। उनका कहना है कि कोरोना महामारी में अपने माता-पिता को खो चुके बच्चों के साथ इस तरह की स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और सरकार को तत्काल हस्तक्षेप कर राहत सुनिश्चित करनी चाहिए।
पुतला दहन के दौरान छात्र नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में विरोध प्रदर्शन देर तक जारी रहा। पूरे घटनाक्रम के दौरान महतारी दुलार योजना के लाभार्थियों के भविष्य और उच्च शिक्षा में प्रवेश का मुद्दा केंद्र में रहा।



