Latest news

“शिक्षा पर टैक्स क्यों?”… बिलासपुर से उठी बड़ी मांग, स्कूलों से कमर्शियल टैक्स हटाने की गुहार, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
4 Min Read

शिक्षा के मंदिर से कमर्शियल टैक्स तत्काल हटाए – राजेश



‘शिक्षा का मंदिर या व्यापारिक प्रतिष्ठान?’… नगर निगम की टैक्स नीति पर सवाल, भाजपा शिक्षा प्रकोष्ठ ने कहा- किराए के भवनों में चल रहे स्कूलों पर कमर्शियल टैक्स तत्काल खत्म

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है। सरकारी स्कूलों में मुफ्त किताबें, गणवेश, जूते और शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत बच्चों को निःशुल्क प्रवेश जैसी व्यवस्थाओं के बीच अब बिलासपुर से एक नया मुद्दा सामने आया है। भाजपा शिक्षा प्रकोष्ठ ने नगर निगम द्वारा स्कूलों से कमर्शियल टैक्स वसूलने के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे शिक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया है।


भाजपा शिक्षा प्रकोष्ठ के जिला संयोजक एवं पूर्व पार्षद राजेश मिश्रा, जिला सहसंयोजक विद्यानंद साहू, सहसंयोजक वेदांत शुक्ला तथा कोषाध्यक्ष भूषण प्रसाद पांडे ने बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नाम ज्ञापन सौंपकर स्कूलों से कमर्शियल टैक्स तत्काल समाप्त करने की मांग की।
ज्ञापन में कहा गया है कि प्रदेश सरकार शिक्षा के विस्तार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था के लिए लगातार प्रयास कर रही है। विद्यार्थियों को निःशुल्क किताबें, स्कूल ड्रेस, जूते उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वहीं, शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने के प्रावधान का भी पालन कराया जा रहा है। इसके अलावा स्थानीय जनप्रतिनिधियों और वार्ड प्रतिनिधियों द्वारा भी विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षणिक जिम्मेदारियों के निर्वहन को लेकर स्कूलों से अपेक्षाएं की जाती हैं, जिनका स्कूल प्रबंधन सम्मानपूर्वक पालन करता है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि शहर के अनेक निजी स्कूल स्वयं के भवनों में नहीं, बल्कि गली-मोहल्लों में किराए के मकानों में विभिन्न समितियों के माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं। अब तक इन भवनों पर आवासीय (रेसीडेंशियल) संपत्ति कर लिया जाता था, लेकिन नगर निगम द्वारा इन्हें कमर्शियल श्रेणी में रखकर वाणिज्यिक कर वसूला जा रहा है।
भाजपा शिक्षा प्रकोष्ठ का कहना है कि शिक्षा संस्थानों को व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की श्रेणी में रखकर कमर्शियल टैक्स वसूलना शिक्षा के उद्देश्य के अनुरूप नहीं है। उनका तर्क है कि इससे स्कूलों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा, जिसका प्रभाव अंततः शिक्षा व्यवस्था और अभिभावकों पर भी पड़ सकता है।
ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि बिलासपुर नगर निगम सहित प्रदेशभर में किराए के भवनों में संचालित स्कूलों से कमर्शियल टैक्स लेने की व्यवस्था को तत्काल समाप्त किया जाए तथा उन्हें पूर्व की तरह आवासीय कर की श्रेणी में रखा जाए, ताकि शिक्षा संस्थानों पर अतिरिक्त वित्तीय भार न पड़े।
इस मुद्दे ने शिक्षा, स्थानीय निकायों की कर व्यवस्था और निजी स्कूलों के संचालन से जुड़े आर्थिक ढांचे को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार और नगरीय प्रशासन इस मांग पर क्या निर्णय लेते हैं।

खबर को शेयर करने के लिए क्लिक करे।।