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‘स्मार्ट’ या ‘महंगा मीटर’? बढ़े बिजली बिलों पर कांग्रेस का सरकार पर हमला, अडानी स्मार्ट मीटर के खिलाफ राज्यव्यापी शिकायत अभियान का ऐलान

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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शहर कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष विजय पांडेय बोले- तकनीक का नहीं, जनता पर आर्थिक बोझ डालने वाली व्यवस्था का विरोध; विकास उपाध्याय ने हर परिवार से बिजली कार्यालय में शिकायत दर्ज कराने की अपील
बिलासपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। बढ़े हुए बिजली बिल, कथित गलत रीडिंग और उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान में देरी को मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस नेताओं ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि बिजली व्यवस्था के आधुनिकीकरण के नाम पर लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर आम उपभोक्ताओं के लिए राहत नहीं, बल्कि अतिरिक्त आर्थिक बोझ का कारण बन रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने उपभोक्ताओं से बड़ी संख्या में बिजली विभाग के कार्यालयों में शिकायत दर्ज कराने की अपील की है।
“स्मार्ट मीटर नहीं, जनता की परेशानी बढ़ाने वाला मीटर”
पूर्व जिला अध्यक्ष, बिलासपुर शहर कांग्रेस कमेटी विजय पांडेय ने कहा कि स्मार्ट मीटर लगाने का उद्देश्य यदि बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाना है तो इसका लाभ भी उपभोक्ताओं को मिलना चाहिए, लेकिन वर्तमान में लगातार बढ़े हुए बिजली बिल, कथित गलत रीडिंग और शिकायतों के समय पर निराकरण नहीं होने से आम लोगों की परेशानी बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस तकनीक का विरोध नहीं करती, लेकिन ऐसी किसी भी व्यवस्था का विरोध करेगी जो आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ाए। उनके अनुसार सरकार को स्मार्ट मीटर से जुड़ी सभी शिकायतों की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए, बढ़े हुए बिजली बिलों की समीक्षा करनी चाहिए और प्रभावित उपभोक्ताओं को राहत देनी चाहिए।
विजय पांडेय ने कहा कि जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता और कांग्रेस हर उस नागरिक के साथ खड़ी है जो अपने अधिकार और न्याय की मांग कर रहा है।
“बीजेपी-अडानी का स्मार्ट मीटर नहीं चलेगा” के नारे के साथ अभियान


इस मुद्दे पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं रायपुर पश्चिम के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने भी राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए स्मार्ट मीटर के खिलाफ व्यापक शिकायत अभियान शुरू करने की घोषणा की है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भीषण महंगाई के दौर में आम लोगों के घरों और दुकानों के बिजली बिल लगातार बढ़ रहे हैं। उनका दावा है कि लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर मनमाने ढंग से बिजली की रीडिंग दर्ज कर रहे हैं, जिससे परिवारों का मासिक बजट प्रभावित हो रहा है।
विकास उपाध्याय ने कहा कि इस संबंध में कांग्रेस ने एक शिकायत प्रारूप (फॉर्म) तैयार किया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस फॉर्म को भरकर अपने बढ़े हुए बिजली बिल की प्रति संलग्न करें और संबंधित बिजली जोन कार्यालय में औपचारिक शिकायत दर्ज कराएं।
उन्होंने प्रत्येक परिवार से आग्रह किया कि अधिक से अधिक लोगों तक शिकायत प्रारूप पहुंचाकर स्मार्ट मीटर के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज कराएं।
सरकार पर गरीब विरोधी नीतियों का आरोप
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार लगातार महंगाई बढ़ाने वाले निर्णय ले रही है और स्मार्ट मीटर भी उसी कड़ी का हिस्सा है। उनका कहना है कि बढ़े हुए बिजली बिलों से घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ छोटे व्यापारियों और दुकानदारों पर भी अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ रहा है।
कांग्रेस का कहना है कि यदि उपभोक्ताओं की शिकायतों का समाधान नहीं हुआ तो इस मुद्दे को और व्यापक स्तर पर उठाया जाएगा।
स्मार्ट मीटर को लेकर क्या है विवाद?
देश के कई राज्यों में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया चल रही है। बिजली वितरण कंपनियों का दावा है कि स्मार्ट मीटर से वास्तविक समय में बिजली खपत की जानकारी मिलती है, बिलिंग में पारदर्शिता आती है, मीटर रीडिंग की आवश्यकता समाप्त होती है और बिजली चोरी पर नियंत्रण में मदद मिलती है।
वहीं दूसरी ओर कई राज्यों में उपभोक्ताओं और विपक्षी दलों की ओर से बढ़े हुए बिजली बिल, तकनीकी गड़बड़ियों, प्रीपेड व्यवस्था, मीटर रीडिंग की सटीकता और शिकायत निवारण प्रणाली को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। बिजली वितरण कंपनियां आमतौर पर इन आरोपों से इनकार करते हुए कहती हैं कि यदि किसी उपभोक्ता को बिल या मीटर संबंधी आपत्ति है तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसकी जांच और सुधार की व्यवस्था उपलब्ध है।
फिलहाल छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर को लेकर कांग्रेस और राज्य सरकार के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति और बिजली उपभोक्ताओं के बीच प्रमुख चर्चा का विषय बना रह सकता है।

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