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VSK ऐप पर तकनीकी दिक्कतों के बीच राहत के संकेत, शिक्षा सचिव बोले- नेटवर्क समस्या वाले क्षेत्रों में नहीं रुकेगा वेतन

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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मंत्रालय में कर्मचारी संघ की बैठक; आधार आधारित बायोमेट्रिक सिस्टम की मांग, कैशलेस चिकित्सा योजना पर भी हुई विस्तृत चर्चा
बिलासपुर/रायपुर। प्रदेश के शासकीय स्कूलों में शिक्षकीय और गैर-शिक्षकीय कर्मचारियों की VSK App के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति को लेकर उठ रहे तकनीकी विवाद के बीच राज्य सरकार ने राहत के संकेत दिए हैं। मंत्रालय में शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह के साथ हुई बैठक में कर्मचारी संघ ने स्पष्ट किया कि तकनीकी खामियों के कारण किसी भी कर्मचारी का वेतन नहीं रोका जाना चाहिए। इस पर सचिव ने आश्वस्त किया कि जहां नेटवर्क या कनेक्टिविटी की समस्या है, वहां व्यवस्था सुधरने तक पूर्व की तरह वेतन का भुगतान जारी रहेगा।


छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष पवन कुमार शर्मा और प्रदेश महामंत्री संतोष कुमार वर्मा ने बताया कि लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा 27 जुलाई 2026 को जारी निर्देश के तहत सभी शासकीय विद्यालयों और कार्यालयों के शिक्षकीय एवं गैर-शिक्षकीय कर्मचारियों की ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य की गई है। हालांकि, प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में नेटवर्क और तकनीकी समस्याओं के कारण इस व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन में कठिनाइयां सामने आ रही हैं।


बैठक में संघ ने मांग रखी कि केवल तकनीकी त्रुटि के आधार पर किसी भी शिक्षक या कर्मचारी का वेतन नहीं रोका जाए। यदि उपस्थिति संबंधी कोई विसंगति सामने आती है तो उसका सत्यापन संबंधित संस्था प्रमुख एवं अधिकारियों के माध्यम से कराया जाए। संघ ने मोबाइल आधारित VSK App की जगह संस्थानों में आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने का भी सुझाव दिया।
संघ के अनुसार, शिक्षा सचिव ने भरोसा दिलाया कि जिन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी की समस्या बनी हुई है, वहां फिलहाल पुरानी व्यवस्था के अनुसार वेतन आहरित होता रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जा चुके हैं और जल्द ही इस आशय के औपचारिक निर्देश भी जारी किए जाएंगे।
कैशलेस चिकित्सा योजना पर भी हुई महत्वपूर्ण बैठक
मंत्रालय में ही लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया की अध्यक्षता में राज्य के कर्मचारी एवं अधिकारियों के लिए प्रस्तावित कैशलेस चिकित्सा योजना पर भी मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के साथ विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में बताया गया कि प्रस्तावित योजना पूरी तरह कैशलेस होगी और उपचार व्यय की कोई अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं की गई है। लाभार्थियों और सूचीबद्ध अस्पतालों की शिकायतों के समाधान के लिए टोल-फ्री कॉल सेंटर एवं ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया जाएगा। इसके संचालन के लिए अलग से विशेष सेल का गठन भी प्रस्तावित है।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि 8 मार्च 2025 की स्थिति के अनुसार राज्य में 134 निजी अस्पताल तथा राज्य के बाहर 64 निजी अस्पताल कैशलेस उपचार के लिए मान्यता प्राप्त हैं। वहीं, वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
बैठक में कर्मचारी संगठनों से योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सुझाव भी लिए गए। संघ की ओर से प्रदेश अध्यक्ष पवन कुमार शर्मा और प्रदेश महामंत्री संतोष कुमार वर्मा ने कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न सुझाव और मांगें सरकार के समक्ष रखीं।

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