बिलासपुर। जुलाई माह के वेतन को लेकर शिक्षा विभाग और शिक्षकों के बीच विवाद गहराता नजर आ रहा है। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने दावा किया है कि VSK (वीएसके) ऐप तकनीकी रूप से त्रुटिपूर्ण है, जिसके कारण पूरे महीने की नियमित उपस्थिति दर्ज होना संभव नहीं है। संघ ने आरोप लगाया कि यदि केवल ऐप में दर्ज उपस्थिति के आधार पर वेतन जारी किया गया तो बिलासपुर जिले के करीब 6 हजार और पूरे बिलासपुर संभाग के 28 हजार से अधिक शिक्षकों का वेतन प्रभावित हो सकता है।
संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसी भी शिक्षक का वेतन काटा गया तो 7 अगस्त को प्रदेशभर में संबंधित डीडीओ (ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर) का घेराव किया जाएगा।
‘जुलाई माह की 100% उपस्थिति ऐप में संभव ही नहीं’
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि किसी भी शिक्षक की जुलाई माह की शत-प्रतिशत उपस्थिति VSK ऐप में दर्ज होना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। उनके अनुसार ऐप में लगातार तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं। समय पर चेक-इन, चेक-आउट, लोकेशन मैच न होना, सर्वर डाउन, इंटरनेट कनेक्टिविटी, विद्यालय से दूरी और अन्य तकनीकी बाधाओं के कारण सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक की नियमित उपस्थिति दर्ज नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि दो पालियों में संचालित स्कूलों में भी यही समस्या बनी हुई है।
‘83% उपस्थिति का दावा, लेकिन पूरे महीने का रिकॉर्ड कौन प्रमाणित करेगा?’
संघ ने शिक्षा विभाग के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें कहा गया है कि 83 प्रतिशत शिक्षकों ने VSK ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज की है। संजय शर्मा ने कहा कि यह आंकड़ा किसी दिन विशेष की उपस्थिति का हो सकता है, लेकिन पूरे जुलाई माह की लगातार उपस्थिति को डीपीआई, संयुक्त संचालक, जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) या विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) प्रमाणित नहीं कर सकते। ऐसे में केवल ऐप के आधार पर पूरे महीने का वेतन जारी करना या रोकना व्यवहारिक नहीं है।
‘डाउनलोड किया ऐप, लेकिन तकनीकी कारणों से अधूरी रही उपस्थिति’
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षा विभाग के निर्देश पर शिक्षकों ने VSK ऐप अपने मोबाइल में डाउनलोड कर लिया था और उसका उपयोग भी किया। इसके बावजूद तकनीकी खामियों के कारण पूरे महीने की उपस्थिति पूर्ण रूप से दर्ज नहीं हो सकी। इसलिए ऐप को उपस्थिति का एकमात्र आधार बनाना उचित नहीं होगा।
‘उपस्थिति पंजी को बनाया जाए वेतन का आधार’
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने मांग की है कि जुलाई माह के वेतन के लिए विद्यालयों में प्राचार्य और प्रधान पाठकों द्वारा संधारित उपस्थिति पंजी को प्रमाणिक आधार माना जाए। संघ का कहना है कि वर्षों से यही व्यवस्था प्रभावी रही है और वर्तमान परिस्थितियों में भी उसी आधार पर वेतन आहरित किया जाना चाहिए।
‘बिना नोटिस वेतन कटौती विधिविरुद्ध’
प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि शिक्षकों को अब तक किसी प्रकार का नोटिस या अल्टीमेटम नहीं दिया गया है। ऐसी स्थिति में सीधे वेतन कटौती करना विधिसम्मत नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि जब शिक्षक समय पर विद्यालय में उपस्थित रहे हैं और केवल तकनीकी कारणों से ऐप में उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाई है, तो इसका खामियाजा शिक्षकों पर नहीं थोपा जा सकता।
7 अगस्त को DDO कार्यालयों का घेराव
संघ ने ऐलान किया है कि यदि किसी भी जिले में VSK ऐप के आधार पर शिक्षकों का वेतन काटा गया तो 7 अगस्त को संबंधित प्राचार्य डीडीओ अथवा विकासखंड शिक्षा अधिकारी डीडीओ के कार्यालय का घेराव किया जाएगा। यह आंदोलन बिलासपुर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में किया जाएगा।
डीपीआई से आदेश में शिथिलता की मांग
संघ ने लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) से मांग की है कि VSK ऐप से वेतन आहरण संबंधी आदेश में तत्काल शिथिलता दी जाए। जुलाई माह का वेतन विद्यालयों में संधारित उपस्थिति पंजी के सत्यापन के आधार पर जारी किया जाए। संघ ने कहा कि शिक्षकों ने अपनी ड्यूटी पूरी निष्ठा से निभाई है और केवल तकनीकी कारणों से ऐप में उपस्थिति दर्ज नहीं होने पर वेतन रोकना न्यायसंगत नहीं होगा।
बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू करने की मांग
संघ ने यह भी कहा कि यदि शिक्षा विभाग भविष्य में पूरी तरह ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था लागू करना चाहता है तो प्रदेश के प्रत्येक स्कूल में बायोमेट्रिक मशीन उपलब्ध कराई जाए, ताकि तकनीकी त्रुटियों और विवादों की स्थिति समाप्त हो सके।
इन पदाधिकारियों ने रखी बात
प्रेस विज्ञप्ति में प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा, प्रदेश संयोजक सुधीर प्रधान और वाजिद खान, प्रदेश उपाध्यक्ष देवनाथ साहु, प्रवीण श्रीवास्तव, मुकेश मुदलियार, शैलेंद्र यदु, डॉ. कोमल वैष्णव, प्रदेश सचिव मनोज सनाढ्य तथा प्रदेश कोषाध्यक्ष शैलेंद्र पारीक ने संयुक्त रूप से कहा कि तकनीकी रूप से त्रुटिपूर्ण VSK ऐप के आधार पर वेतन कटौती का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा और शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए संगठन आंदोलन करेगा।



