सेंट्रल जेल के गैसीफायर प्लांट में हुई सनसनीखेज घटना… कलेक्टर-एसएसपी मौके पर पहुंचे, FSL जांच शुरू… लगातार हो रही मौतों ने सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर खड़े किए बड़े सवाल
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली बिलासपुर सेंट्रल जेल बुधवार को उस समय सनसनीखेज घटना का केंद्र बन गई, जब डबल मर्डर के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा एक कैदी जेल परिसर में स्थापित गैसीफायर प्लांट की जलती भट्ठी में कूद गया। घटना इतनी अचानक हुई कि जेलकर्मियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कुछ ही पलों में पूरे जेल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और आपात स्थिति घोषित करते हुए सायरन बजा दिया गया।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान बृजेश उर्फ राहुल के रूप में हुई है, जो डबल मर्डर के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस महकमा हरकत में आ गया। कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सेंट्रल जेल पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस तथा एफएसएल की टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाकर जांच शुरू कर दी है।
चलती भट्ठी में लगा दी मौत की छलांग
जेल परिसर में स्थापित गैसीफायर प्लांट लकड़ियों से गैस तैयार करता है, जिसका उपयोग जेल की रसोई में कैदियों का भोजन पकाने के लिए किया जाता है। बताया जा रहा है कि घटना के समय प्लांट पूरी तरह चालू था और भट्ठी में आग जल रही थी। इसी दौरान कैदी अचानक वहां पहुंचा और देखते ही देखते जलती भट्ठी में छलांग लगा दी। जब तक जेलकर्मी उसे बाहर निकालने की कोशिश करते, तब तक काफी देर हो चुकी थी।
हाई सिक्योरिटी जेल की सुरक्षा पर गंभीर सवाल
घटना ने सेंट्रल जेल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक सजायाफ्ता कैदी जेल के संवेदनशील गैसीफायर प्लांट तक कैसे पहुंच गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि घटना के समय किसकी ड्यूटी थी, सुरक्षा व्यवस्था में कहीं लापरवाही तो नहीं हुई और कैदी वहां तक कैसे पहुंचा।
एक महीने में पांचवीं मौत, बढ़ी चिंता
बिलासपुर सेंट्रल जेल में पिछले एक महीने के भीतर यह पांचवीं बंदी की मौत है। 23 जून को पॉक्सो मामले के आरोपी नीलू जगत की जेल के भीतर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद रायगढ़ निवासी आजीवन कारावास की सजा काट रहे रामभरोसे माझी की तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। जून में ही राजू गोंड और उससे पहले धर्मेंद्र सिंह की भी जेल में मौत हो चुकी है। अब बृजेश उर्फ राहुल की मौत ने लगातार हो रही घटनाओं को लेकर जेल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर नई बहस खड़ी कर दी है।
हर पहलू की जांच में जुटी पुलिस
फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। जांच का फोकस इस बात पर है कि कैदी ने यह कदम किन परिस्थितियों में उठाया, घटना के पीछे कोई अन्य कारण तो नहीं था और सुरक्षा व्यवस्था में कहीं कोई चूक हुई या नहीं। जेल प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है।



