00 वीडियो में देखिए निगम के इंजीनियरों का आक्रोश
बिलासपुर। नगर निगम की मेयर-इन-काउंसिल (MIC) की बैठक में एक जनप्रतिनिधि द्वारा निगम के इंजीनियर के लिए कथित तौर पर “मक्कार” शब्द का इस्तेमाल किए जाने के बाद विवाद गहरा गया है। सोमवार को नगर निगम के सभी अभियंताओं ने एकजुट होकर इसे पूरे इंजीनियरिंग संवर्ग का अपमान बताया और बैठक आयोजित कर आगे की रणनीति तय की। इसके बाद अभियंताओं ने नगर निगम आयुक्त और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए संबंधित जनप्रतिनिधि से सार्वजनिक रूप से माफी मंगवाने तथा उचित कार्रवाई की मांग की। अभियंताओं ने चेतावनी दी है कि मांग पूरी नहीं होने पर वे उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे।
बैठक कर जताया विरोध, कहा- पूरे तकनीकी अमले का हुआ अपमान
सोमवार को नगर निगम के अभियंताओं ने बैठक कर पूरे घटनाक्रम पर चर्चा की। अभियंताओं ने कहा कि किसी अधिकारी या कर्मचारी के साथ सार्वजनिक रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग करना और अपमानजनक टिप्पणी करना स्वीकार्य नहीं है। उनका कहना था कि वे शासन की नीतियों के अनुरूप अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं और अधिकारियों एवं तकनीकी कर्मचारियों के सम्मान की रक्षा होना भी उतना ही आवश्यक है।
बैठक के बाद अभियंताओं के प्रतिनिधिमंडल ने नगर निगम आयुक्त को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में संबंधित जनप्रतिनिधि से सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई।
ज्ञापन में रखीं कई मांगें
अभियंताओं ने अपने ज्ञापन में कहा कि किसी एक अधिकारी की कार्यशैली पर सवाल उठाना अलग विषय हो सकता है, लेकिन पूरे अभियंता वर्ग के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करना अनुचित है। उनका कहना है कि इससे अधिकारियों का मनोबल प्रभावित होता है।
ज्ञापन में उन्होंने मांग की है कि—
पूरे मामले का विधिवत संज्ञान लिया जाए।
संबंधित टिप्पणी को बैठक के कार्यवृत्त में दर्ज किया जाए।
संबंधित जनप्रतिनिधि सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त करें।
भविष्य में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच संवाद के लिए स्पष्ट आचार-संहिता बनाई जाए।
अभियंताओं ने गिनाईं अपनी जिम्मेदारियां
ज्ञापन में अभियंताओं ने यह भी उल्लेख किया कि नगर निगम का इंजीनियरिंग अमला केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है। सड़क, नाली, भवन अनुज्ञा, टेंडर प्रक्रिया, गुणवत्ता नियंत्रण, जल निकासी, स्ट्रीट लाइट, अतिक्रमण, न्यायालयीन प्रकरण, पोर्टल संचालन, बाढ़ प्रबंधन और आपदा राहत जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी अभियंताओं की जिम्मेदारी में शामिल हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कई स्थानों पर स्टाफ की कमी के कारण तकनीकी अधिकारियों को लिपिकीय कार्य भी करने पड़ रहे हैं।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
अभियंताओं ने स्पष्ट किया कि यदि संबंधित जनप्रतिनिधि से सार्वजनिक माफी नहीं मंगवाई गई और उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
आयुक्त ने विभाग को भेजने की कही बात
नगर निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे ने अभियंताओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि पूरे मामले की जानकारी नगर प्रशासन एवं विकास विभाग को भेजी जाएगी। विभाग से प्राप्त निर्देशों के अनुरूप आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
जवाबदेही और सम्मान के बीच बढ़ी बहस
नगर निगम के विकास कार्यों की गुणवत्ता, अधूरे प्रोजेक्ट, जलभराव, खराब सड़कें और नागरिकों की शिकायतों को लेकर लंबे समय से जनप्रतिनिधियों द्वारा अधिकारियों से जवाब मांगे जाते रहे हैं। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जनता ने उन्हें विकास कार्यों की समीक्षा और जवाबदेही तय करने की जिम्मेदारी दी है। वहीं अभियंताओं का कहना है कि जवाबदेही तय करना अलग विषय है, लेकिन पूरे तकनीकी संवर्ग के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करना उचित नहीं है।



