

00 वीडियो में देखें जिला मलेरिया नियंत्रण दफ्तर का हाल
बिलासपुर। प्रदेश को मलेरिया मुक्त बनाने के सरकारी दावों के बीच बिलासपुर की जमीनी हकीकत कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। एक तरफ कोटा विधानसभा क्षेत्र के 72 मलेरिया संवेदनशील वनांचल गांवों में पिछले तीन वर्षों से नई मेडिकेटेड मच्छरदानियां नहीं पहुंची हैं और छह वर्षों से डीडीटी का छिड़काव बंद पड़ा है, वहीं दूसरी ओर जिला मलेरिया कार्यालय की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। सोमवार को कार्यालय का निरीक्षण करने पर 15 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों की पदस्थापना वाले दफ्तर में सन्नाटा पसरा मिला। अधिकांश कर्मचारी अनुपस्थित थे और जिला मलेरिया अधिकारी का कक्ष भी बंद मिला। ऐसे में बारिश के मौसम में मलेरिया नियंत्रण की तैयारियों पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।
दफ्तर में सन्नाटा, अधिकारी का कक्ष मिला बंद
सोमवार को जिला मलेरिया कार्यालय का निरीक्षण करने पर कार्यालय लगभग खाली नजर आया। 15 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों की पदस्थापना के बावजूद मौके पर केवल एक कर्मचारी आराम करते मिला, जबकि स्थापना शाखा में एक महिला कर्मचारी कार्यालयीन कार्य निपटाती दिखाई दीं। स्लाइड जांच के लिए पदस्थ लैब टेक्नीशियन मौजूद नहीं थीं। स्थापना शाखा की लिपिक ने बताया कि वे भोजन के लिए गई हैं। कुछ कर्मचारियों के फील्ड में होने की जानकारी दी गई, लेकिन जिला मलेरिया अधिकारी का कक्ष बंद मिला। कर्मचारियों ने बताया कि अधिकारी अक्सर सीएमएचओ कार्यालय में बैठते हैं।
72 गांवों में तीन साल से नई मेडिकेटेड मच्छरदानियां नहीं
कोटा विधानसभा क्षेत्र के 72 मलेरिया संवेदनशील वनांचल गांवों में वर्ष 2023 के बाद से नई मेडिकेटेड मच्छरदानियों का वितरण नहीं हुआ है। इससे पहले करीब 33 हजार मच्छरदानियां बांटी गई थीं। विभागीय जानकारी के अनुसार इन मच्छरदानियों में लगी दवा का प्रभाव लगभग तीन वर्ष तक ही रहता है। ऐसे में अधिकांश मच्छरदानियां अब प्रभावहीन हो चुकी हैं। विभाग ने वर्ष 2024, 2025 और 2026 में लगातार 35-35 हजार नई मेडिकेटेड मच्छरदानियों की मांग शासन को भेजी, लेकिन अब तक आपूर्ति नहीं हो सकी।
छह वर्षों से बंद पड़ा DDT का छिड़काव
विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2020 के बाद से कोटा के वनांचल क्षेत्रों में डीडीटी का छिड़काव नहीं कराया गया है। विभाग का तर्क है कि क्षेत्र का वार्षिक परजीवी सूचकांक (API) दो प्रतिशत से कम होने के कारण नियमित छिड़काव की आवश्यकता नहीं है। हालांकि स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हर बारिश के मौसम में मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है और बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं दिखाई देते।
बारिश के साथ बढ़ा संक्रमण का खतरा
इस वर्ष 1 जनवरी से 10 जुलाई तक कोटा क्षेत्र में मलेरिया के 23 मरीज सामने आ चुके हैं। वर्ष 2025 में यहां 63 मरीज दर्ज किए गए थे। सरगोड़, बेलगहना, कारीमाटी, कारीछापर सहित कई वनांचल गांव हर साल मलेरिया से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बीमारी की आशंका हर साल बनी रहती है, लेकिन रोकथाम के उपाय पर्याप्त नहीं दिखते।
विभाग का दावा—घर-घर सर्वे और जांच जारी
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि प्रभावित गांवों में घर-घर सर्वे कराया जा रहा है। बुखार के मरीजों की तत्काल जांच, रक्त नमूने लेकर उपचार और दवाइयों का वितरण किया जा रहा है। साथ ही ग्रामीणों को जलभराव रोकने, मच्छरों के लार्वा न पनपने देने और साफ-सफाई बनाए रखने के प्रति लगातार जागरूक किया जा रहा है।
फैक्ट फाइल
72 वनांचल गांव मलेरिया संवेदनशील
3 वर्षों से नई मेडिकेटेड मच्छरदानियों का वितरण नहीं
6 वर्षों से DDT छिड़काव बंद
वर्ष 2024, 2025 और 2026 में हर साल 35 हजार मच्छरदानियों की मांग
वर्ष 2023 में 33 हजार मेडिकेटेड मच्छरदानियों का वितरण
10 जुलाई 2026 तक 23 मलेरिया मरीज दर्ज
वर्ष 2025 में 63 मरीज सामने आए
निरीक्षण के दौरान जिला मलेरिया अधिकारी का कक्ष बंद मिला और अधिकांश कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए।



