Latest news

मानसून का ‘वायरल अटैक’, उमस, बारिश और तापमान के उतार-चढ़ाव ने बढ़ाई मुश्किलें, सिम्स की ओपीडी में रोज 100 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
7 Min Read

सिम्स के अस्पताल अधीक्षक डॉ लखन सिंह ने क्या कहा देखिए वीडियो में

बिलासपुर। मानसूनी बारिश के साथ मौसम में लगातार हो रहे बदलाव ने न्यायधानी बिलासपुर में मौसमी बीमारियों का ग्राफ तेजी से बढ़ा दिया है। कभी तेज धूप, फिर अचानक बारिश और उसके बाद बढ़ी उमस ने वायरल संक्रमण को फैलने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना दी हैं। इसका सबसे बड़ा असर अस्पतालों की ओपीडी में दिखाई दे रहा है, जहां सर्दी-जुकाम, बुखार, गले के संक्रमण और पेट संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।


प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) की मेडिसिन ओपीडी में शुक्रवार को 100 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचे। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की रही, जो वायरल संक्रमण, सर्दी-जुकाम, बुखार और गले में दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे थे। दूसरी ओर बच्चों की ओपीडी में भी वायरल फीवर के मामलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। यही स्थिति जिला अस्पताल और शहर के निजी अस्पतालों में भी देखने को मिल रही है, जहां मौसम जनित बीमारियों के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इस समय सक्रिय वायरल संक्रमण का सबसे बड़ा कारण मौसम में लगातार हो रहा उतार-चढ़ाव है। दिन में गर्मी और उमस, शाम को बारिश तथा तापमान में अचानक गिरावट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित कर रही है, जिससे संक्रमण तेजी से फैल रहा है।


कॉमन कोल्ड वायरस सक्रिय, बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित
सिम्स अस्पताल के अधीक्षक एवं मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. लखन सिंह के अनुसार फिलहाल कॉमन कोल्ड का वायरस सक्रिय है। बदलते मौसम के कारण शरीर संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है। यही वजह है कि अस्पतालों में इन दोनों आयु वर्ग के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।


सिर्फ सर्दी-जुकाम नहीं, पेट और गले के संक्रमण भी बढ़े
बारिश का मौसम केवल वायरल फीवर तक सीमित नहीं है। अस्पतालों में गले में दर्द, तेज बुखार, उल्टी, दस्त, लूज मोशन और पेट दर्द की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। चिकित्सकों के अनुसार बारिश शुरू होने के बाद वायरल संक्रमण और पेट संबंधी बीमारियों के मामलों में लगभग 10 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।
वातावरण में बढ़ी नमी वायरस और बैक्टीरिया के पनपने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करती है। इसके साथ ही दूषित पानी और अस्वच्छ खानपान संक्रमण को और बढ़ावा दे रहे हैं।


दूषित पानी और खानपान भी बन रहे संक्रमण की बड़ी वजह
बरसात के दौरान जल स्रोतों के दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में पेट संबंधी संक्रमण तेजी से फैलते हैं। अस्पतालों में उल्टी, दस्त और लूज मोशन के मरीज लगातार पहुंच रहे हैं। खुले में रखे खाद्य पदार्थ, बाहर का भोजन और असुरक्षित पेयजल संक्रमण का प्रमुख कारण बन रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पानी से फैलने वाले संक्रमण इस मौसम में तेजी से बढ़ते हैं और अस्पतालों की ओपीडी पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं।
नमी के साथ बढ़ा मच्छरजनित बीमारियों का खतरा
बारिश के मौसम में केवल वायरल संक्रमण ही नहीं बल्कि मच्छरजनित बीमारियों का जोखिम भी बढ़ जाता है। घरों के कूलर, गमलों, पुराने टायर, ड्रम और अन्य स्थानों पर जमा पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है। इसके कारण डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ने लगा है।
उबला पानी पीने पर बढ़ा जोर
मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के मौसम में पानी की गुणवत्ता सबसे अधिक प्रभावित होती है। कम से कम 5 से 10 मिनट तक उबाला गया पानी पीने से उसमें मौजूद हानिकारक जीवाणु, वायरस और पैरासाइट्स काफी हद तक नष्ट हो जाते हैं। इससे पीलिया, टाइफाइड, हैजा, दस्त और अन्य जलजनित संक्रमणों का जोखिम कम होता है। गुनगुना या उबला पानी पाचन प्रक्रिया को भी बेहतर बनाए रखने में सहायक माना जाता है।
अस्पतालों की ओपीडी पर बढ़ता दबाव


मौसम में लगातार बदलाव का असर अब स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। सिम्स सहित सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी में वायरल संक्रमण, श्वसन संबंधी बीमारियों और पेट के संक्रमण के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों में संक्रमण के मामलों ने चिकित्सकों की चिंता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य संस्थानों में मौसमी बीमारियों के बढ़ते मामलों के बीच अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती आमद दर्ज की जा रही है।


सिम्स में दवा काउंटर व्यवस्था सुधरी, मरीजों को बिना लंबी कतार मिल रही दवाएं
छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) में दवा वितरण व्यवस्था में किए गए सुधार का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। अस्पताल के दवा काउंटरों पर पहले की तुलना में भीड़ काफी कम हो गई है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को दवाएं लेने के लिए लंबी कतारों में इंतजार नहीं करना पड़ रहा है।
अस्पताल प्रबंधन द्वारा दवा वितरण प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित किए जाने के बाद काउंटरों पर मरीजों की आवाजाही सुचारु बनी हुई है। इससे ओपीडी में बड़ी संख्या में मरीज पहुंचने के बावजूद दवा वितरण सामान्य रूप से जारी है। मरीजों को बिना अनावश्यक देरी के निर्धारित दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और उन्हें किसी प्रकार की विशेष परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है।
अस्पताल परिसर में दवा वितरण व्यवस्था के बेहतर प्रबंधन के चलते मरीजों की सुविधा बढ़ी है और काउंटरों पर अव्यवस्था की स्थिति भी काफी हद तक नियंत्रित रही।

खबर को शेयर करने के लिए क्लिक करे।।