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पेपर लीक से सुलगा सेंट्रल यूनिवर्सिटी, सड़कों तक पहुंचा छात्र आक्रोश, परीक्षा रद्द, जांच रिपोर्ट पर पर्दा और देशभर में शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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मोहम्मद इसराइल | बिलासपुर/रायपुर
देश में प्रतियोगी और विश्वविद्यालय परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच छत्तीसगढ़ की गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय का कथित पेपर लीक प्रकरण अब राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है। एक ओर विश्वविद्यालय प्रशासन ने बीए एलएलबी छठे सेमेस्टर की परीक्षा निरस्त कर दोबारा परीक्षा का नया टाइम टेबल जारी कर दिया है, वहीं दूसरी ओर परीक्षा दे चुके छात्र फैसले के खिलाफ खुलकर मैदान में उतर आए हैं। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा रद्द कर उन्हें दोबारा परीक्षा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जबकि कथित पेपर लीक के जिम्मेदार लोगों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इसी बीच दिल्ली में पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और छात्र संगठनों का आंदोलन भी तेज हो गया है।
परीक्षा रद्द, लेकिन दोषियों पर कार्रवाई नहीं—यहीं से भड़का विरोध
गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय ने पिछले माह संपन्न हुई बीए एलएलबी छठे सेमेस्टर की परीक्षा को निरस्त करते हुए नया परीक्षा कार्यक्रम जारी कर दिया। इस फैसले के बाद लॉ के छात्रों में गहरा असंतोष है। उनका कहना है कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा दी थी, ऐसे में दोबारा परीक्षा लेना छात्रों के साथ अन्याय है।
छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने वास्तविक जिम्मेदारों पर कार्रवाई करने के बजाय केवल विभागाध्यक्ष को हटाकर औपचारिकता पूरी कर दी। जिन लोगों की भूमिका कथित पेपर लीक में रही, उनके खिलाफ न विभागीय कार्रवाई हुई और न ही किसी कानूनी कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की गई।
पोर्टल हैक से शुरू हुआ विवाद, जांच में सामने आई कथित गड़बड़ी
मई में विश्वविद्यालय के परीक्षा पोर्टल में कथित साइबर सेंधमारी का मामला सामने आया था। उस समय दावा किया गया था कि हैकर्स ने परीक्षा और प्रशासनिक रिकॉर्ड से जुड़ा डाटा हासिल कर लिया। प्रारंभिक स्तर पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा था कि पोर्टल हैक होने अथवा प्रश्नपत्र लीक होने के ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं और पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।
इसके बाद विश्वविद्यालय ने आंतरिक जांच समिति गठित की। समानांतर रूप से केंद्र स्तर से भी एक उच्च स्तरीय टीम बिलासपुर पहुंची और तकनीकी व प्रशासनिक पहलुओं की जांच की। जांच प्रक्रिया के बाद पोर्टल में गड़बड़ी और उसके परिणामस्वरूप प्रश्नपत्र लीक होने की बात सामने आने की चर्चा के बीच विश्वविद्यालय ने परीक्षा निरस्त करने का निर्णय लिया।
जांच रिपोर्ट जमा, लेकिन सार्वजनिक नहीं
विश्वविद्यालय की ओर से गठित जांच समिति में प्रो. एस.सी. श्रीवास्तव, प्रो. मुकेश कुमार सिंह, प्रो. खेमचंद देवांगन, प्रो. भारती अहिरवार और टी.पी. सिंह शामिल थे। समिति अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंप चुकी है, लेकिन रिपोर्ट की सामग्री अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
यही मुद्दा अब छात्रों के आंदोलन का केंद्र बन गया है। उनका कहना है कि यदि जांच पूरी हो चुकी है तो रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और दोष तय कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
प्रशासनिक भवन पहुंचे छात्र, नए एचओडी के सामने दर्ज कराया विरोध
नया टाइम टेबल जारी होने के बाद बीए एलएलबी के छात्र लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। बीकॉम एलएलबी के विद्यार्थियों ने भी उनके समर्थन में आवाज उठाई है। छात्र पहले प्रशासनिक भवन पहुंचे और बाद में नए विभागाध्यक्ष से मुलाकात कर अपना विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि परीक्षा रद्द करने के बजाय कथित पेपर लीक के दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।
विश्वविद्यालय का पक्ष—जांच जारी, कार्रवाई चरणबद्ध होगी
विश्वविद्यालय के मीडिया सेल प्रभारी मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि बीए एलएलबी छठे सेमेस्टर की परीक्षा अपरिहार्य कारणों से स्थगित की गई है। पेपर लीक प्रकरण की विभागीय जांच के लिए समिति गठित की गई है। उन्होंने कहा कि कार्रवाई कई चरणों में होती है। साइबर सेल को पत्र भेजा गया है या नहीं, इसकी जानकारी फिलहाल उनके पास उपलब्ध नहीं है।
पेपर लीक से दिल्ली तक सियासी संग्राम


विश्वविद्यालय विवाद के समानांतर नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक टकराव भी तेज हो गया है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, के.सी. वेणुगोपाल सहित अन्य नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में बिलासपुर में कांग्रेस ने रैली निकाली। कांग्रेस भवन से नेहरू चौक तक मार्च निकालकर कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का प्रतीकात्मक पुतला दहन किया।
संयुक्त प्रदर्शन में जिला कांग्रेस शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा, ग्रामीण अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री, पूर्व अध्यक्ष विजय पांडेय, विजय केशरवानी, पूर्व विधायक शैलेश पांडेय सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता शामिल हुए। कांग्रेस ने नीट पेपर लीक की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कठोर कार्रवाई और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग दोहराई।
एआईडीएसओ ने कलेक्ट्रेट घेरा, एनटीए व्यवस्था पर उठाए सवाल
उधर, अखिल भारतीय लोकतांत्रिक छात्र संगठन (एआईडीएसओ) के नेतृत्व में सैकड़ों छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और छात्र प्रतिनिधियों ने बिलासपुर कलेक्ट्रेट का घेराव किया।
संगठन ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों, महिलाओं और बुजुर्गों पर लाठीचार्ज किया तथा आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
जिला अध्यक्ष त्रिलोचन साहू ने कहा कि पेपर लीक और परीक्षा भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरे देश में छात्रों में आक्रोश है। जिला सचिव सूरज साहू ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की वर्तमान व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए अधिक पारदर्शी परीक्षा प्रणाली लागू करने की मांग की।


आज तिफरा में कांग्रेस का धरना, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग होगी प्रमुख
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर 23 जुलाई को बिलासपुर के तिफरा में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। दोपहर 12 बजे एचडीएफसी बैंक के समीप बछेरा तालाब, फल-सब्जी मंडी चौक में होने वाले इस कार्यक्रम में शिक्षा व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार, पेपर लीक और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का विरोध किया जाएगा।
धरने में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, परीक्षा अनियमितताओं पर संसद में चर्चा तथा आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग उठाई जाएगी। ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष लक्ष्मीनाथ साहू ने पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है।

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