बिलासपुर।
बिलासपुर में सामने आए 17 करोड़ रुपये से अधिक के कथित सर्पदंश मुआवजा घोटाले को लेकर सियासत तेज हो गई है। भाजपा ने इस मामले में कांग्रेस और बिलासपुर के पूर्व विधायक को सीधे निशाने पर लेते हुए कई सवाल दागे हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में गरीबों के नाम पर सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग हुआ और अब जब जांच में लगातार गिरफ्तारियां हो रही हैं तो कांग्रेस को अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए।
भाजपा के मंडल अध्यक्ष बबलू कश्यप, शैलेन्द्र यादव, राकेश लालवानी, मनोज सोनी, श्रीनिवास राव और देवेंद्र पाठक ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि यह केवल आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि गरीब और पीड़ित परिवारों के अधिकारों पर डाका डालने जैसा गंभीर प्रकरण है। उन्होंने कहा कि जिस अवधि में यह कथित घोटाला हुआ, उस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और बिलासपुर का प्रतिनिधित्व कांग्रेस के विधायक कर रहे थे। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि उन्हें इस पूरे खेल की जानकारी नहीं थी या फिर यह सब उनकी जानकारी और संरक्षण में चलता रहा।
431 संदिग्ध प्रकरणों की जांच, कई गिरफ्तारियां
भाजपा नेताओं ने कहा कि जांच एजेंसियां 431 संदिग्ध सर्पदंश मुआवजा प्रकरणों की जांच कर रही हैं, जिनमें 17 करोड़ रुपये से अधिक की शासकीय राशि के कथित गबन की आशंका है। अब तक डॉक्टर, पुलिसकर्मी, राजस्व विभाग के कर्मचारी, बैंककर्मी सहित कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इससे स्पष्ट होता है कि यह कोई छोटी-मोटी गड़बड़ी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित नेटवर्क था।
‘गरीबों की राहत योजना को बना दिया भ्रष्टाचार का अड्डा’
भाजपा ने आरोप लगाया कि गरीब, आदिवासी और वास्तविक पीड़ित परिवारों के लिए बनाई गई राहत योजना को भ्रष्टाचार का माध्यम बना दिया गया। जिन परिवारों को सर्पदंश जैसी दुखद परिस्थितियों में तत्काल सहायता मिलनी चाहिए थी, उनके नाम पर कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये निकाले गए। इसे जनता के विश्वास के साथ घोर विश्वासघात बताया गया।
पूर्व विधायक से भाजपा के पांच बड़े सवाल
भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के पूर्व विधायक से सार्वजनिक रूप से जवाब मांगते हुए पूछा—
जब यह कथित फर्जीवाड़ा चल रहा था, तब आपने प्रशासन से कितनी बार जवाब मांगा?
विधानसभा में इस मुद्दे को क्यों नहीं उठाया?
क्या आपको करोड़ों रुपये के इस कथित खेल की जानकारी नहीं थी?
यदि जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं कराई?
आखिर किन लोगों के संरक्षण में यह पूरा नेटवर्क वर्षों तक फलता-फूलता रहा?
भाजपा का कहना है कि जनता अब बहाने नहीं, बल्कि स्पष्ट जवाब चाहती है। पूर्व विधायक को बताना होगा कि उनके कार्यकाल में सरकारी योजनाएं भ्रष्टाचार का माध्यम क्यों बनीं और इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी कौन लेगा।
‘सरकार किसी भी दोषी को नहीं बख्शेगी’
संयुक्त बयान में भाजपा नेताओं ने कहा कि वर्तमान सरकार पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच करा रही है। लगातार हो रही गिरफ्तारियां इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार किसी भी दोषी को बख्शने के मूड में नहीं है। चाहे वह अधिकारी हो, कर्मचारी हो या राजनीतिक संरक्षण देने वाला कोई प्रभावशाली व्यक्ति, सभी को कानून के दायरे में लाकर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यह केवल 17 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का मामला नहीं, बल्कि जनता के भरोसे, गरीबों के अधिकार और शासन व्यवस्था की विश्वसनीयता का प्रश्न है। कांग्रेस को अपनी चुप्पी तोड़कर जनता के सामने सच रखना चाहिए। भाजपा ने दावा किया कि भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के बजाय वर्तमान सरकार उसे जड़ से समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है और जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।



