अरपा भैंसाझार परियोजना
दिनांक 18/07/2026
समय 7:30 pm
- पूर्ण जल भराव स्तर- 302.00 मीटर
- वर्तमान जल स्तर – 299.20 मीटर
- नदी मे छोड़े जा रहे पानी की मात्रा- 111.50 घन मी./सेकंड
बिलासपुर।
बिलासपुर। कई महीनों से सूखी पड़ी अरपा नदी ने आखिरकार फिर करवट ले ली। शनिवार सुबह अचानक अरपा का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा और देखते ही देखते नदी में पानी का तेज बहाव दिखाई देने लगा। कुछ दिन पहले तक जहां रेत के टीले, अवैध उत्खनन और सूखी नदी की उदासी नजर आती थी, वहीं अब बहते पानी ने अरपा को फिर से जीवंत कर दिया है। नदी में पानी आने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग रिवर व्यू फ्रंट पहुंच गए। परिवारों, युवाओं और बच्चों ने बहती अरपा को निहारा, तस्वीरें खींचीं और लंबे समय बाद अपनी लाइफ लाइन को उसके वास्तविक स्वरूप में देखा।



बिलासपुर की पहचान मानी जाने वाली अरपा केवल एक नदी नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक, सामाजिक और भावनात्मक धड़कन है। पिछले दो-तीन महीनों से नदी लगभग सूखी हुई थी। पानी नहीं होने से नदी का अधिकांश हिस्सा रेत में तब्दील हो गया था। इसी दौरान अवैध रेत उत्खनन भी लगातार होता रहा, जिसे लेकर शहरवासियों में नाराजगी बढ़ रही थी। लोगों का कहना था कि जिस नदी ने वर्षों तक शहर को जीवन दिया, वही नदी आज अपनी पहचान बचाने के लिए संघर्ष करती नजर आ रही थी।
शनिवार की सुबह तस्वीर पूरी तरह बदल गई। गुरुवार और शुक्रवार को हुई बारिश के बाद भी अरपा सामान्य बहाव में थी, लेकिन शनिवार सुबह अचानक जलस्तर बढ़ना शुरू हुआ। देखते ही देखते नदी में तेज बहाव दिखाई देने लगा और पूरे रिवर फ्रंट का नजारा बदल गया। शांत और सूनी दिखने वाली अरपा फिर से कल-कल बहने लगी।
अरपा भैंसाझार परियोजना के अनुसार शनिवार शाम 7:30 बजे तक पूर्ण जलभराव स्तर 302.00 मीटर के मुकाबले वर्तमान जलस्तर 299.20 मीटर दर्ज किया गया। वहीं नदी में 111.50 घन मीटर प्रति सेकंड की दर से पानी छोड़ा जा रहा था। इसी पानी ने अरपा के बहाव को नई गति दी और नदी का स्वरूप पूरी तरह बदल गया।
रिवर फ्रंट पर दिनभर लोगों की भीड़ लगी रही। किसी ने बहती नदी के साथ सेल्फी ली तो कोई परिवार के साथ शाम बिताने पहुंचा। बच्चों के चेहरे पर उत्साह था, बुजुर्ग वर्षों पुरानी अरपा को याद करते दिखाई दिए। कई लोगों का कहना था कि बहती हुई अरपा को देखकर ऐसा लगा जैसे शहर की धड़कन फिर लौट आई हो।
अरपा में पानी आने के साथ ही नदी किनारे का पूरा वातावरण भी बदल गया। बहते पानी की आवाज, ठंडी हवाएं और हरियाली ने रिवर फ्रंट की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा दिया। लंबे समय बाद नदी अपने वास्तविक स्वरूप में दिखाई दी। यह वही अरपा है, जिसके किनारे बसकर बिलासपुर ने विकास की यात्रा तय की और जिसने इस शहर की पहचान पूरे प्रदेश में बनाई।
शहर के जानकार मानते हैं कि अरपा केवल जलधारा नहीं, बल्कि बिलासपुर की जीवनरेखा है। जब नदी में पानी रहता है तो शहर का प्राकृतिक सौंदर्य अलग ही दिखाई देता है, जबकि सूखी अरपा पूरे शहर को उदास कर देती है। पिछले महीनों में सूखी नदी और अवैध उत्खनन ने लोगों को निराश किया था, लेकिन अब बहते पानी ने उम्मीदों को फिर से जगा दिया है।
शनिवार का दिन बिलासपुर के लिए केवल नदी में पानी आने का दिन नहीं था, बल्कि अपनी लाइफ लाइन को फिर से जीवंत होते देखने का दिन था। बहती अरपा ने एक बार फिर यह एहसास कराया कि शहर की असली खूबसूरती उसकी नदी से ही है। पानी के साथ लौटे इस जीवन ने पूरे बिलासपुर को एक बार फिर अपनी अरपा से जोड़ दिया।



