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पेट चीरते हुए फेफड़े तक पहुंचा चाकू… बाहर आ गई थीं आंतें, सिम्स के डॉक्टरों ने 15 वर्षीय किशोर को मौत के मुंह से खींच लाया

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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‘गोल्डन ऑवर’ में शुरू हुआ ऑपरेशन, पेट-छाती की जटिल सर्जरी, आईसीयू में 24 घंटे की निगरानी… बिलासपुर सिम्स की मेडिकल टीम ने बचाई गंभीर घायल किशोर की जान
बिलासपुर, 18 जुलाई। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के चिकित्सकों ने गंभीर ट्रॉमा प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करते हुए चाकू के जानलेवा हमले में गंभीर रूप से घायल 15 वर्षीय किशोर का जीवन बचाने में सफलता हासिल की है। पेट और छाती में गहरे चाकू के वार से किशोर की छोटी आंतें शरीर से बाहर आ गई थीं, जबकि फेफड़ों पर दबाव बनने से उसकी सांसें भी तेजी से थमने लगी थीं। ऐसी अत्यंत गंभीर स्थिति में इमरजेंसी, सर्जरी, एनेस्थीसिया और आईसीयू की विशेषज्ञ टीम ने समन्वित उपचार कर मरीज को नया जीवन दिया।
11 जुलाई की रात हुआ था जानलेवा हमला
सिरगिट्टी निवासी 15 वर्षीय किशोर पर 11 जुलाई 2026 की शाम लगभग 8:30 बजे चाकू से हमला किया गया। गंभीर रूप से घायल अवस्था में उसे रात लगभग 9 बजे सिम्स के आपातकालीन विभाग में लाया गया। घटना की जानकारी मिलते ही सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति के निर्देश पर तत्काल उपचार शुरू किया गया।
पेट की दीवार फटी, आंतें बाहर निकलीं, फेफड़ों पर बना दबाव
चिकित्सकों के अनुसार चाकू का वार शरीर के सबसे संवेदनशील हिस्सों तक पहुंचा था। पेट की दीवार गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई थी और छोटी आंतें बाहर निकल आई थीं। दाहिनी ओर छाती में लगी गहरी चोट के कारण फेफड़ों पर दबाव बन गया था, जिससे मरीज को सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई हो रही थी।
साथ ही छोटी आंतों में कई स्थानों पर छेद होने से पेरिटोनाइटिस, सेप्सिस और अत्यधिक रक्तस्राव जैसी जानलेवा जटिलताओं का खतरा पैदा हो गया था। चिकित्सकों के अनुसार ऐसी स्थिति में उपचार का हर मिनट मरीज के जीवन के लिए निर्णायक होता है।
वरिष्ठ सर्जनों ने संभाली कमान, तुरंत हुआ ऑपरेशन
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए सर्जरी विभाग को तत्काल सक्रिय किया गया। वरिष्ठ सर्जन डॉ. बृजेश पटेल के निर्देशन में आपातकालीन शल्य चिकित्सा की गई।
ऑपरेशन टीम में—
डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह
डॉ. शुभा एक्का
डॉ. रवि राजवाड़े
पीजी रेजिडेंट डॉ. कुणाल
शामिल रहे, जबकि ऑपरेशन थिएटर में ओटी सिस्टर अंजिता ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।
आंतों के कई छेदों की मरम्मत, अंदर जमा रक्त भी निकाला गया
सर्जरी के दौरान चिकित्सकों ने छोटी आंतों में कई स्थानों पर हुए छेदों की सफलतापूर्वक मरम्मत की। पेट की गुहा में जमा रक्त निकालकर आंतरिक रक्तस्राव को नियंत्रित किया गया। डॉक्टरों ने बताया कि मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाने और बिना विलंब ऑपरेशन शुरू किए जाने के कारण उसकी जान बचाई जा सकी।
आईसीयू में 24 घंटे चली गहन निगरानी
सर्जरी के बाद मरीज को एनेस्थीसिया विभाग की गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती किया गया। विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति के नेतृत्व में डॉ. अपर्णा मिश्रा एवं पीजी रेजिडेंट्स की टीम ने लगातार 24 घंटे वेंटिलेटरी सपोर्ट, संक्रमण नियंत्रण और दर्द प्रबंधन किया।
स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद मरीज को सर्जरी वार्ड में स्थानांतरित कर दिया गया। वर्तमान में उसकी स्थिति स्थिर है और वह खतरे से बाहर है।
‘गोल्डन ऑवर’ ने बचाई जान
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने बताया कि चाकू लगने जैसे गंभीर ट्रॉमा मामलों में ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर उपचार मिलना सबसे महत्वपूर्ण होता है। सिम्स के इमरजेंसी, सर्जरी और एनेस्थीसिया विभागों के समन्वित प्रयासों तथा आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के कारण एक और गंभीर मरीज का जीवन बचाया जा सका।
आधुनिक चिकित्सा और टीम वर्क का उदाहरण
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने पूरी चिकित्सा टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह सफलता संस्थान की आधुनिक चिकित्सा अधोसंरचना, विशेषज्ञ चिकित्सकों की दक्षता, अनुशासित कार्यप्रणाली और टीम भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सिम्स चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और गुणवत्तापूर्ण रोगी सेवा के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रहा है तथा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

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