आधी रात की बारिश ने लिख दी ‘अर्बन फ्लड’ की नई कहानी… रिकॉर्डतोड़ बारिश, पानी में डूबा शहर, सिस्टम बेनकाब; क्या 100 साल के सबसे बड़े बारिश अध्याय में दर्ज होगा बिलासपुर?
मोहम्मद इसराइल, एमडी अयाज| बिलासपुर
बिलासपुर। गुरुवार की आधी रात आसमान से बरसना शुरू हुआ पानी शुक्रवार को शहर के लिए अभूतपूर्व संकट में बदल गया और शनिवार तक उसका असर हर गली, हर मोहल्ले और हर परिवार में दिखाई देता रहा। यह सिर्फ बारिश नहीं थी, बल्कि तीन दिनों तक चले उस मौसमीय हमले की कहानी थी जिसने बिलासपुर की रफ्तार रोक दी। शहर की सड़कें नदियों में बदल गईं, कॉलोनियां तालाब बन गईं, घरों में पानी घुस गया, सरकारी दफ्तर टपकने लगे, बिजली व्यवस्था लड़खड़ा गई, अस्पताल अलर्ट पर आ गए और राहत-बचाव के लिए मोटरबोट तक उतारनी पड़ी।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार बिलासपुर में 24 घंटे के भीतर 276.2 मिमी बारिश दर्ज की गई। यह हाल के वर्षों में दर्ज सबसे बड़ी 24 घंटे की वर्षा घटनाओं में शामिल है। इस बारिश ने पूरे शहर को ‘अर्बन फ्लड’ की स्थिति में पहुंचा दिया।
गुरुवार की रात… जब शहर सो रहा था और संकट दस्तक दे रहा था
गुरुवार देर रात बारिश ने अचानक रफ्तार पकड़ी। पूरी रात लगातार बादल बरसते रहे। आधी रात के बाद से सुबह तक बारिश का सिलसिला बिना रुके चलता रहा। रात के अंधेरे में नाले भरने लगे, निचले इलाकों में पानी जमा होने लगा और सुबह होते-होते हालात बेकाबू हो गए।





शुक्रवार की सुबह… जब बिलासपुर शहर नहीं, समंदर दिखाई दिया
सुबह आंख खुली तो शहर का नक्शा बदल चुका था। हंसा विहार, पुराना बस स्टैंड, बहतराई, सरकंडा, व्यापार विहार, मंगला, तिफरा, जोरापारा, चिंगराजपारा, बंधवापारा, बसंत विहार सहित दर्जनों कॉलोनियां पानी में डूबी थीं।
कहीं कारें आधी पानी में डूब गईं, कहीं बाइक बंद हो गईं। कई परिवारों के घरों में रसोई से लेकर बेडरूम तक पानी भर गया। बर्तन, फर्नीचर, कपड़े और जरूरी सामान पानी में तैरते रहे। लोग बाल्टियों और मोटर पंप से पानी निकालते रहे, लेकिन बारिश के सामने उनकी कोशिशें छोटी पड़ती रहीं।
एक दिन में ठहर गया शहर
बारिश ने केवल सड़कों को नहीं डुबोया बल्कि पूरे शहर की रफ्तार रोक दी।
स्कूलों में अवकाश घोषित करना पड़ा। सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति कम रही। बाजारों में कारोबार प्रभावित हुआ। सड़कों पर लंबा जाम लगा। कई वाहन जलभराव में बंद हो गए। बिजली की आंख-मिचौली पूरे दिन जारी रही। कंपोजिट बिल्डिंग सहित कई सरकारी भवनों में छतों से पानी टपकता रहा।
मोटरबोट उतरी… और बिलासपुर ने देखा बाढ़ जैसा मंजर
सबसे चौंकाने वाला दृश्य तब सामने आया जब जलभराव वाले क्षेत्रों में राहत और बचाव के लिए मोटरबोट उतारनी पड़ी। आमतौर पर नदी या बाढ़ प्रभावित गांवों में दिखाई देने वाला दृश्य इस बार शहर की सड़कों पर नजर आया। सोशल मीडिया पर मोटरबोट से रेस्क्यू के वीडियो पूरे दिन चर्चा में रहे।
नगर निगम की तैयारियों पर सबसे बड़ा सवाल
हर वर्ष मानसून से पहले नालों की सफाई, जल निकासी और करोड़ों रुपये के प्री-मानसून कार्यों के दावे किए जाते हैं। लेकिन पहली ही रिकॉर्डतोड़ बारिश में शहर के कई हिस्सों का घंटों पानी में डूबे रहना कई सवाल खड़े करता है।
यदि नालों की सफाई पूरी थी तो पानी निकला क्यों नहीं?
यदि ड्रेनेज नेटवर्क सक्षम था तो सड़कें तालाब क्यों बन गईं?
यदि जलभराव वाले इलाकों की पहचान पहले से थी तो स्थायी समाधान क्यों नहीं दिखा?
ये सवाल शुक्रवार की बारिश के बाद शहरभर में चर्चा का विषय बने रहे।
जिला प्रशासन अलर्ट पर, लेकिन चुनौती बनी रही
हालात बिगड़ते ही जिला प्रशासन, नगर निगम, पुलिस, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग और बिजली विभाग की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुट गईं। जल निकासी, राहत, बिजली बहाली और प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी का काम लगातार चलता रहा।
स्वास्थ्य विभाग ने संभावित जलजनित बीमारियों के खतरे को देखते हुए 45 कॉम्बेट टीमें सक्रिय कर दीं। क्लोरीनेशन, ब्लीचिंग और दवा वितरण शुरू किया गया।
शनिवार… बारिश कम हुई लेकिन मुश्किलें नहीं
शनिवार को वर्षा की तीव्रता कुछ कम हुई, लेकिन संकट खत्म नहीं हुआ। कई इलाकों में जलभराव बना रहा। जिन घरों में पानी घुसा था, वहां लोग देर शाम तक सफाई और पानी निकालने में जुटे रहे। कई मोहल्लों में बिजली और पेयजल आपूर्ति सामान्य होने में समय लगा। कीचड़, गंदगी और बदबू ने नई परेशानी खड़ी कर दी।
क्या टूट गया 100 साल का रिकॉर्ड?
शहर में यह चर्चा लगातार चलती रही कि क्या यह पिछले 100 वर्षों की सबसे बड़ी बारिश है।
मौसम विभाग के उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 24 घंटे में 276.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो हाल के वर्षों की सबसे बड़ी वर्षा घटनाओं में शामिल है। हालांकि IMD ने अब तक इसे 100 वर्षों का आधिकारिक रिकॉर्ड घोषित नहीं किया है।
रविवार पर भी मौसम विभाग की नजर
मौसम विभाग के अनुसार रविवार को भी बिलासपुर सहित उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ में बारिश की गतिविधियां बनी रहेंगी। कई स्थानों पर भारी वर्षा, गरज-चमक और तेज बारिश के दौर की संभावना है। बिलासपुर जिले के लिए जारी रेड अलर्ट यह संकेत देता है कि निचले इलाकों, नदी-नालों और शहरी जलभराव वाले क्षेत्रों में सतर्कता की जरूरत बनी हुई है।
72 घंटे में क्या-क्या हुआ?
गुरुवार आधी रात से तेज बारिश शुरू।
24 घंटे में 276.2 मिमी वर्षा दर्ज।
शहर के दर्जनों मोहल्लों में जलभराव।
घरों, दुकानों और सरकारी भवनों में पानी घुसा।
मोटरबोट से राहत और बचाव अभियान।
स्कूल बंद, कार्यालय प्रभावित।
बिजली और पेयजल व्यवस्था चरमराई।
स्वास्थ्य विभाग ने 45 कॉम्बेट टीमें तैनात कीं।
शनिवार तक जलनिकासी और राहत अभियान जारी।
रविवार के लिए भी भारी बारिश की संभावना जताई गई।



