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एक अटल… पूरी बीजेपी मैदान में! आखिर उस बयान में क्या था जिसने सत्ता को फ्रंटफुट पर ला दिया?

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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अटल के एक बयान पर क्यों सुलग उठी सियासत?… हिड़मा विवाद से छत्तीसगढ़ में कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने, एक विधायक के बहाने पूरे राजनीतिक नैरेटिव की जंग”

बिलासपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में इस समय सबसे बड़ा सियासी संग्राम किसी विधानसभा सीट, चुनाव या सरकार के फैसले पर नहीं, बल्कि कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव के एक बयान पर छिड़ा हुआ है। एक इंटरव्यू के वायरल अंश ने ऐसा राजनीतिक भूचाल खड़ा किया कि सत्ता पक्ष ने इसे ‘नक्सल समर्थक मानसिकता’ का प्रमाण बताया, जबकि कांग्रेस ने इसे वीडियो के चुनिंदा हिस्से को काटकर फैलाया गया राजनीतिक दुष्प्रचार करार दिया। सवाल अब सिर्फ एक बयान का नहीं, बल्कि उस राजनीतिक लड़ाई का है, जिसमें एक विधायक को केंद्र में रखकर दोनों दल अपनी-अपनी वैचारिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
एक इंटरव्यू… और शुरू हो गई राजनीतिक घेराबंदी
पूरा विवाद उस इंटरव्यू के बाद शुरू हुआ, जिसमें कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने जन-जंगल-जमीन के संघर्ष के संदर्भ में अपनी बात रखी। इंटरव्यू का एक हिस्सा सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर तेजी से वायरल हुआ। इसके बाद भाजपा ने कांग्रेस विधायक को सीधे निशाने पर लेते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने दुर्दांत नक्सली हिड़मा का महिमामंडन किया है।
भाजपा ने इसे केवल एक व्यक्तिगत बयान नहीं, बल्कि कांग्रेस की कथित राजनीतिक सोच से जोड़ते हुए बड़ा मुद्दा बना दिया।
भाजपा का सीधा हमला: ‘यह शहीदों का अपमान है’
भाजपा प्रदेश मंत्री हर्षिता पांडेय ने मोर्चा संभालते हुए कहा कि हिड़मा जैसे खूंखार नक्सली की तुलना किसी प्रेरणास्रोत से करना छत्तीसगढ़ के शहीद जवानों, निर्दोष आदिवासियों और लोकतांत्रिक व्यवस्था का अपमान है।
उन्होंने कहा कि हिड़मा झीरम घाटी, ताड़मेटला, बीजापुर और सुकमा जैसे कई बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड रहा है। ऐसे व्यक्ति का किसी भी रूप में महिमामंडन अस्वीकार्य है।
भाजपा ने कांग्रेस नेतृत्व से सार्वजनिक जवाब मांगा कि क्या वह अपने विधायक के बयान के साथ खड़ा है। साथ ही अटल श्रीवास्तव से बिना शर्त सार्वजनिक माफी की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो भाजपा सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेगी।
कांग्रेस का पलटवार: ‘वीडियो काटकर भ्रम फैलाया गया’
भाजपा के हमलों के जवाब में कांग्रेस ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पूरे विवाद को ‘सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र’ बताया।
कोटा विधानसभा क्षेत्र के जिला, ब्लॉक और मंडल स्तर के कांग्रेस पदाधिकारियों ने कहा कि विधायक अटल श्रीवास्तव ने अपने इंटरव्यू में किसी व्यक्ति विशेष का समर्थन नहीं किया था। उन्होंने केवल जन-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष करने वालों को अपना आदर्श बताया था।
कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा के आईटी सेल ने इंटरव्यू का एक अंश काटकर ऐसा माहौल बनाया, जिससे विधायक की छवि धूमिल हो और राजनीतिक लाभ लिया जा सके।
आदिवासी राजनीति भी बहस के केंद्र में
कांग्रेस ने इस विवाद को सीधे आदिवासी अधिकारों से जोड़ दिया।
पार्टी नेताओं ने कहा कि भूपेश बघेल सरकार के दौरान पेसा कानून, ग्राम सभाओं को अधिकार, वनोपज की समर्थन मूल्य पर खरीदी, वन अधिकार पट्टों का वितरण और बस्तर-सरगुजा में शिक्षा, स्वास्थ्य तथा रोजगार से जुड़ी अनेक योजनाएं लागू की गई थीं।
कांग्रेस का आरोप है कि वर्तमान भाजपा सरकार इन योजनाओं को कमजोर कर रही है और अब आदिवासी हितों की लड़ाई लड़ने वाले नेताओं को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है।
एक विधायक पर इतना बड़ा हमला क्यों?
राजनीतिक गलियारों में इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक बयान का विवाद नहीं माना जा रहा।
अटल श्रीवास्तव पिछले कुछ महीनों से विधानसभा के भीतर लगातार आक्रामक भूमिका में दिखाई दिए हैं। सरकार को कई मुद्दों पर घेरने, डिप्टी सीएम सहित सत्ता पक्ष पर लगातार हमले करने और विपक्ष की मुखर आवाज बनने के कारण उनकी राजनीतिक सक्रियता बढ़ी है।
ऐसे में उनके एक बयान को लेकर भाजपा का शीर्ष नेतृत्व, संगठन और प्रवक्ता एक साथ मैदान में उतरना इस विवाद को साधारण बयानबाजी से आगे ले गया है।
कांग्रेस ने दिखाई संगठनात्मक एकजुटता
विवाद बढ़ने के बाद कोटा विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस संगठन ने विधायक के समर्थन में खुलकर मोर्चा संभाल लिया।
जिला कांग्रेस, ब्लॉक कांग्रेस, आदिवासी कांग्रेस, जिला पंचायत प्रतिनिधियों, जनपद सदस्यों, सरपंचों और संगठन के अनेक पदाधिकारियों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि विधायक की छवि बिगाड़ने का प्रयास लोकतांत्रिक राजनीति के लिए ठीक नहीं है।
इस संयुक्त बयान में अरुण त्रिवेदी, अश्वनी उद्देश्य, सुभाष अग्रवाल, आदित्य दीक्षित, पंकज तिवारी, कुलवंत सिंह, रियाज जुनजानी, वीणा मसीह, ईश्वर राजू सिदार, रजनी मरकाम सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेताओं ने हस्ताक्षर किए।
भाजपा ने कांग्रेस नेतृत्व को भी कटघरे में खड़ा किया
भाजपा ने विवाद को केवल विधायक तक सीमित नहीं रखा।
प्रदेश मंत्री हर्षिता पांडेय ने कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व और आलाकमान से पूछा कि यदि पार्टी विधायक के बयान से सहमत नहीं है तो अब तक उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
भाजपा का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति का बयान नहीं, बल्कि कांग्रेस की वैचारिक सोच का प्रतिबिंब है।
अब सियासी लड़ाई सिर्फ बयान की नहीं, नैरेटिव की है
इस विवाद ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में दो समानांतर नैरेटिव खड़े कर दिए हैं।
भाजपा इस मुद्दे को राष्ट्रवाद, शहीदों के सम्मान और नक्सलवाद के खिलाफ अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता से जोड़ रही है।
वहीं कांग्रेस इसे जन-जंगल-जमीन, आदिवासी अधिकारों और राजनीतिक दुष्प्रचार का मामला बताकर भाजपा पर वीडियो के चुनिंदा हिस्से को वायरल कर भ्रम फैलाने का आरोप लगा रही है।
इसी वजह से अटल श्रीवास्तव का एक बयान अब केवल एक इंटरव्यू का हिस्सा नहीं रहा, बल्कि सत्ता और विपक्ष के बीच वैचारिक, राजनीतिक और चुनावी संघर्ष का नया केंद्र बन गया है।

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