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जिस दिन अस्पतालों में थमती हैं रफ्तार, उसी दिन अपोलो में बढ़ेगी इलाज की रफ्तार

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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‘Apollo Never Sleeps’ की नई व्यवस्था: रविवार को भी OPD, हेल्थ चेकअप, जांच और ऑपरेशन; तीसरे संडे भी फुल कैपेसिटी में चला अस्पताल
बिलासपुर। रविवार को आमतौर पर अस्पतालों में नियमित सेवाओं की रफ्तार कुछ धीमी पड़ जाती है, लेकिन बिलासपुर में अपोलो हॉस्पिटल ने इस धारणा को बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया है। अस्पताल की ‘Apollo Never Sleeps’ पहल के तहत अब रविवार को भी मरीजों के लिए इलाज का सिलसिला जारी रहेगा। ओपीडी से लेकर हेल्थ चेकअप, डायग्नोस्टिक जांच और ऑपरेशन तक प्रमुख चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध रहेंगी।
इस पहल की खास बात यह है कि अस्पताल केवल औपचारिक रूप से रविवार को खुला रखने की व्यवस्था नहीं कर रहा, बल्कि डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की मौजूदगी के साथ पूरी क्षमता में सेवाएं संचालित की जा रही हैं। लगातार तीसरे रविवार को भी अस्पताल में यही व्यवस्था देखने को मिली।
बीमारी को कैलेंडर का पता नहीं, तो इलाज क्यों रुके : गुप्ता
बिलासपुर प्रेस क्लब के ‘हमर पहुंना’ कार्यक्रम में अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर के यूनिट हेड अभय गुप्ता ने इस बदलाव की वजह बताते हुए कहा कि बीमारी किसी दिन या समय को देखकर नहीं आती। किसी मरीज को रात 12 बजे भी उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसे में रविवार होने के कारण उसे अगले दिन तक इंतजार कराना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि इसी सोच के साथ अस्पताल की पारंपरिक रविवार की छुट्टी की व्यवस्था में बदलाव किया गया है, ताकि मरीजों को सप्ताह के सातों दिन आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
तीसरे रविवार का आंकड़ा: 10 ऑपरेशन, 15 तक हेल्थ चेकअप
रविवार को सेवाएं शुरू करने के बाद मरीजों की प्रतिक्रिया भी सामने आने लगी है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार पिछले रविवार को करीब 10 ऑपरेशन किए गए। इसके अलावा 12 से 15 हेल्थ चेकअप और करीब 25 से 30 मरीजों की ओपीडी हुई।
अस्पताल प्रबंधन का मानना है कि जैसे-जैसे लोगों को इस व्यवस्था की जानकारी होगी, रविवार को भी उपचार लेना उनके लिए सामान्य बात बन जाएगी।
जरूरतमंद मरीजों के इलाज में सहयोग का भरोसा
जरूरतमंद मरीजों के उपचार को लेकर भी अभय गुप्ता ने अस्पताल प्रबंधन की ओर से सहयोग का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि यदि कोई मरीज वास्तव में जरूरतमंद है और उपचार का पात्र है तो वह अस्पताल प्रबंधन से संपर्क कर सकता है।
इस दौरान उन्होंने अपने एक पुराने पत्रकार साथी के परिवार से जुड़े हादसे का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि दुर्घटना के बाद पत्रकार साथी के बेटे के उपचार में वे व्यक्तिगत रूप से जुड़े रहे और बेहतर उपचार के लिए चेन्नई स्तर तक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया।
समाज से जुड़ने के लिए 12-15 संस्थाओं से एमओयू
अपोलो हॉस्पिटल की सामुदायिक गतिविधियों की जानकारी देते हुए गुप्ता ने बताया कि अस्पताल अब तक करीब 12 से 15 सामाजिक एवं सामुदायिक संस्थाओं के साथ एमओयू कर चुका है।
इनमें सिंधी सेंट्रल पंचायत, पंजाबी समुदाय, अग्रवाल समाज और राज्य स्तरीय ड्रग एसोसिएशन सहित विभिन्न संगठन शामिल हैं। अस्पताल प्रबंधन भविष्य में ऐसी साझेदारियों को और विस्तार देने की दिशा में काम कर रहा है।
कैंसर उपचार में 600 करोड़ की तकनीक, रोज 60-65 मरीजों का इलाज
अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का उल्लेख करते हुए गुप्ता ने प्रोटॉन बीम थेरेपी को भी अपोलो की महत्वपूर्ण चिकित्सा तकनीकों में शामिल बताया। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र में अपोलो द्वारा यह अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध कराई गई है।
चेन्नई स्थित केंद्र में प्रतिदिन करीब 60 से 65 मरीजों का प्रोटॉन बीम थेरेपी से उपचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस तकनीक में इस्तेमाल होने वाली मशीन की लागत करीब 600 करोड़ रुपए तक है, जबकि उपचार की लागत करीब 30 लाख रुपए तक हो सकती है।
उन्होंने कहा कि उत्तर छत्तीसगढ़ में भी आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
पिज्जा-बर्गर आज, हिसाब 20 साल बाद—खान-पान को लेकर चेताया
स्वास्थ्य को लेकर अभय गुप्ता ने बदलती जीवनशैली और खान-पान की आदतों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज हम जो खाते हैं और जिस तरह की जीवनशैली अपनाते हैं, उसका असर हमेशा तुरंत दिखाई नहीं देता। कई बार उसका परिणाम वर्षों बाद सामने आता है।
युवाओं में पिज्जा, बर्गर, मोमोज और अत्यधिक तले-भुने खाद्य पदार्थों के बढ़ते चलन पर उन्होंने सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने रोज 30 से 45 मिनट शारीरिक गतिविधि करने को जरूरी बताया। वॉक, योग या जिम के साथ संभव हो तो प्रतिदिन 10 हजार कदम चलने की सलाह दी।
उन्होंने नमक और चीनी का सेवन सीमित रखने तथा अत्यधिक तेलयुक्त भोजन कम करने पर भी जोर दिया।
लक्षण आने का इंतजार न करें, साल में एक बार स्क्रीनिंग
गुप्ता ने कहा कि कई गंभीर बीमारियां शुरुआती चरण में स्पष्ट लक्षण नहीं देतीं। ऐसे में बीमारी के लक्षण दिखाई देने का इंतजार करने की बजाय नियमित स्वास्थ्य जांच जरूरी है।
उन्होंने लोगों को साल में कम से कम एक बार हेल्थ स्क्रीनिंग कराने की सलाह दी। नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली के जरिए बीमारी के जोखिम को समय रहते पहचाना और नियंत्रित किया जा सकता है।

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