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मोदी-शाह पर हमला, बघेल की तारीफ… बिलासपुर से अमित जोगी ने फूंका JCCJ 2.0 का चुनावी बिगुल, ‘बेटा बचाओ आंदोलन’ का ऐलान

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर। बिलासपुर प्रेस क्लब बुधवार को छत्तीसगढ़ की सियासत का नया मंच बन गया। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित जोगी ने JCCJ 2.0 की लॉन्चिंग करते हुए केंद्र की मोदी सरकार, गृह मंत्री अमित शाह और अडानी-अंबानी पर तीखे राजनीतिक हमले किए। लोकतंत्र बचाने की बात करते हुए उन्होंने खुद को संघर्ष की राजनीति का चेहरा बताया और आगामी चुनाव लड़ने का ऐलान भी किया। हालांकि, जब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से राजनीतिक रिश्तों और टकराव का सवाल उठा तो उन्होंने हमला करने के बजाय उनकी राजनीतिक क्षमता की खुलकर तारीफ की। वहीं कांग्रेस में विलय के सवाल पर वे सीधा जवाब देने से बचते नजर आए।
बिलासपुर प्रेस क्लब से JCCJ 2.0 लॉन्च, ‘बेटा बचाओ आंदोलन’ को बनाया बड़ा अभियान
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने बिलासपुर प्रेस क्लब में “JCCJ 2.0 – नया विजन, नया स्वरूप और नई कार्ययोजना” का औपचारिक शुभारंभ किया। इस दौरान पार्टी की सर्वोच्च नेता डॉ. रेणु जोगी, राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित जोगी, प्रदेश अध्यक्ष ईश्वर उपाध्याय और कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।
अमित जोगी ने कहा कि पार्टी अब नए संगठनात्मक ढांचे और नई राजनीतिक सोच के साथ जनता के बीच जाएगी। उन्होंने बताया कि JCCJ 2.0 को “बेटा बचाओ आंदोलन” से जोड़ा गया है, जिसका उद्देश्य नशे की चपेट में आ रहे युवाओं को बचाना और समाज को जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि यह केवल सरकार का नहीं बल्कि पूरे समाज का साझा दायित्व है।
भूपेश बघेल पर हमला नहीं, तारीफ… बोले- वे लड़ने वाले नेता हैं
प्रेस वार्ता में जब भूपेश बघेल से जुड़े सवाल पूछे गए तो राजनीतिक टकराव की उम्मीद के विपरीत अमित जोगी ने उनकी तारीफ की। उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल एक लड़ने वाले राजनेता हैं और संघर्ष करने की उनकी राजनीतिक शैली को स्वीकार किया। उन्होंने इस मुद्दे पर किसी तरह का व्यक्तिगत हमला करने से परहेज किया।
मोदी, अमित शाह और अडानी-अंबानी पर तीखे राजनीतिक प्रहार
राष्ट्रीय राजनीति पर बोलते हुए अमित जोगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उद्योगपति अडानी-अंबानी का नाम लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र को बचाने के लिए व्यापक राजनीतिक सुधार जरूरी हैं। उनका दावा था कि उन्होंने निर्वाचन आयोग में पंजीकृत 66 मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के अध्यक्षों को आगामी चुनावों के बहिष्कार का प्रस्ताव भेजा है।
उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) प्रदेश में स्वतंत्र और संघर्षशील राजनीतिक विकल्प के रूप में आगे बढ़ेगी।
दोबारा चुनाव लड़ने का ऐलान, कांग्रेस में विलय पर चुप्पी
अमित जोगी ने साफ किया कि वे आगामी चुनाव में फिर से मैदान में उतरेंगे। हालांकि, जब कांग्रेस में संभावित विलय और उसमें आ रही बाधाओं को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया और विषय को टाल गए।
जग्गी प्रकरण पर न्यायपालिका पर जताया भरोसा
जग्गी प्रकरण से जुड़े सवाल पर अमित जोगी ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वे कानूनी प्रक्रिया के तहत अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
विस्थापितों के लिए मुफ्त कानूनी लड़ाई लड़ने का दावा
उन्होंने कहा कि अधिवक्ता के रूप में वे नकटी, हसदेव, लैलूंगा, बचेली, केशदा-इकलामा (कवर्धा), पथर्रा (बेमेतरा) और फास्टरपुर (मुंगेली) सहित कई क्षेत्रों के विस्थापितों की ओर से निःशुल्क पैरवी कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे।
रेणु जोगी ने सुनाए अजित जोगी के संस्मरण
डॉ. रेणु जोगी ने अपने संबोधन में स्वर्गीय अजित जोगी के जीवन से जुड़े संस्मरण साझा किए। उन्होंने बताया कि विवाह के समय अजित जोगी ने दहेज लेने से इनकार कर दिया था और जीवनभर सिद्धांतों के साथ समझौता नहीं किया।
अमित जोगी ने कहा कि बिलासपुर उनके परिवार के लिए भावनात्मक रूप से बेहद खास शहर है। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता का बचपन यहीं बीता और उनकी प्रेम कहानी की शुरुआत भी बिलासपुर के कंपनी गार्डन से हुई थी।
संगठन विस्तार और चुनावी तैयारी का खाका
पार्टी नेताओं ने बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने, जनसंपर्क अभियान तेज करने और विधानसभा चुनाव की तैयारियों का रोडमैप भी साझा किया। अंत में जिला अध्यक्ष प्रशांत त्रिपाठी ने कहा कि JCCJ 2.0 और “बेटा बचाओ आंदोलन” को प्रदेशव्यापी जनआंदोलन बनाया जाएगा।
राजनीतिक मायने
इस प्रेस वार्ता में अमित जोगी का फोकस मुख्य रूप से केंद्र सरकार पर राजनीतिक हमला, लोकतंत्र के मुद्दे, संगठन के पुनर्गठन और आगामी चुनावी रणनीति पर रहा। वहीं भूपेश बघेल को लेकर उन्होंने टकराव का रास्ता नहीं चुना, बल्कि उन्हें “लड़ने वाला राजनेता” बताते हुए सम्मानजनक टिप्पणी की। इससे साफ संकेत मिला कि उनकी राजनीतिक आक्रामकता का केंद्र इस बार कांग्रेस नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति और मौजूदा सत्ता व्यवस्था रही।

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